UP News : उत्तर प्रदेश में अब स्कूल वाहनों की लापरवाही पर बड़ा एक्शन शुरू हो गया है. योगी सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर ऐसा डिजिटल सिस्टम लागू कर दिया है, जिससे अब कोई भी स्कूल बस या वैन बिना जांच के सड़कों पर नहीं दौड़ पाएगी. नई व्यवस्था के तहत सभी स्कूलों को एक खास पोर्टल से जोड़ा जा रहा है, जहां हर गाड़ी की पूरी जानकारी दर्ज होगी और उसकी हर कमी सबके सामने आएगी.
वहीं, एआरटीओ संभल अमिताभ चतुर्वेदी के मुताबिक इस नए सिस्टम का नाम UP Integrated School Vehicle Management Portal है. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसमें प्रदेश के सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है, चाहे उनके पास खुद की गाड़ियां हों या बाहर से लगाई गई हों. इस पोर्टल पर हर स्कूल को अपनी सभी गाड़ियों की जानकारी डालनी होगी, जिसके बाद परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर मौके पर जाकर हर वाहन की जांच करेंगे और उसकी स्थिति की रिपोर्ट और फोटो अपलोड करेंगे.
हर स्कूल वाहन पर QR कोड अनिवार्य
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब केवल एक विभाग नहीं बल्कि कई विभाग मिलकर निगरानी करेंगे. इसमें परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन सभी की सीधी भागीदारी होगी. यानी अब किसी भी गाड़ी की खामी छिपाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. इसके साथ ही एक और बड़ा बदलाव किया गया है. हर स्कूल वाहन के लिए एक QR कोड तैयार किया जाएगा, जिसे गाड़ी पर चिपकाना अनिवार्य होगा. कोई भी व्यक्ति उस QR कोड को स्कैन करके गाड़ी के कागजात, फिटनेस और उसकी कमियों की जानकारी तुरंत देख सकेगा. इससे पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो जाएगी और अभिभावकों को भी सच्चाई पता चल सकेगी.
नई व्यवस्था में स्कूलों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है. अब हर स्कूल को यह शपथ पत्र देना होगा कि उसकी सभी गाड़ियां नियमों के अनुसार हैं. अगर कोई गाड़ी छिपाई जाती है या नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन पर होगी.
लापरवाह स्कूल वाहनों पर सख्ती
सरकार ने यह कदम हाल की कुछ दुखद घटनाओं के बाद उठाया है, जहां स्कूल वाहनों की लापरवाही सामने आई थी. अब इस सिस्टम के लागू होने के बाद उम्मीद है कि बिना फिटनेस, बिना बीमा और नियमों को तोड़कर चलने वाली गाड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी. कुल मिलाकर साफ है कि अब बच्चों की सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए रास्ते बंद हो रहे हैं और हर स्कूल वाहन पर सरकार की पैनी नजर रहने वाली है. बताते कि संभल जिले में लगभग 140 ऐसे स्कूल हैं जिनके नाम पर अपनी कुल 600 से अधिक गाड़ियाँ हैं, जिनमें से लगभग 130-140 बसें हैं और बाकी मैजिक (छोटे वाहन) आदि हैं.
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