Captain Smit Machchhar : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में पायलट ने जिस साहस और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह उनके पालन-पोषण, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और जीवन में मिले संस्कारों को दर्शाता है। भागवत ने इस घटना को सांस्कृतिक मूल्यों के प्रभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे मूल्य लोगों को कठिन परिस्थितियों में भी दूसरों की सुरक्षा के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
विजयादशमी संबोधन में हिंदू स्वभाव पर रखे विचार
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कैप्टन मच्छार की प्रतिक्रिया को हिंदू जीवन मूल्यों से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि पायलट को ऐसी परिस्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए अलग से कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला था, बल्कि उनके संस्कार और सांस्कृतिक जड़ें उनके व्यवहार में दिखाई दीं।
भागवत के मुताबिक, मातृभूमि, संस्कृति और पारिवारिक परवरिश से मिलने वाले मूल्य व्यक्ति के आचरण को प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विचार में हिंदू स्वभाव विविधता को स्वीकार करने, उसकी रक्षा करने और समाज में एकता को बढ़ावा देने की भावना से जुड़ा है।
फ्लाईदुबई की उड़ान में कैप्टन पर हुआ था हमला
यह घटना 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र में था, तभी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर विमान में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में कैप्टन के सिर और बांहों में गंभीर चोटें आईं।
गंभीर चोटों के बावजूद मदद के लिए उठाया कदम
हमले के बाद विमान तेजी से नीचे उतरने लगा। घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने खुद को बचाने और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर अन्य क्रू सदस्यों को सतर्क करने की कोशिश की। उनकी कोशिशों से दूसरे पायलटों और यात्रियों को स्थिति संभालने में मदद मिली। इसके बाद हमलावर को काबू में किया गया और विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना में विमान में सवार लोगों की जान बच गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी बातचीत
घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की और उनके साहस की सराहना की। भारतीय पायलट के इस कदम को विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए उनकी जिम्मेदारी और कठिन परिस्थितियों में कर्तव्य निभाने के उदाहरण के रूप में देखा गया।
संस्कार, विविधता और राष्ट्रीय एकता पर जोर
मोहन भागवत ने इस घटना के जरिए सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन में विविधता का सम्मान करने, एकता बनाए रखने और ऐसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो व्यक्ति को संकट के समय दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करते हैं।
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