France Protests 2026 : फ्रांस के कई राज्य आज आग की लपटों से घिरें हुए हैं। सरकार की नीतियों और कई समस्यों से जूझ रहे स्थानीय लोग आज सड़कों पर आक्रामक रुप दिखा रहे हैं। जिससे फ्रांस की राजनीति निरंतर कमजोर होती दिखाई पड़ रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके विरोधियों का कहना है कि वे अब तक के सबसे कमजोर राष्ट्रपति साबित हुए हैं।
स्कूलों की जर्जर व्यवस्था, बढ़ाई गई फीस, घरों के किराए व बढ़ती महंगाई होने से लोगों में आक्रोश है। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी जनता अपने अधिकारों के लिए लड़ रही है। भड़की भीड़ ने कई सरकारी बिल्डिंग व वाहनों में आग लगा दी। जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण बने गए हैं।
2400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया
फ्रांस में 17 अक्टूबर को प्रस्तावित सरकारी बजट कटौती और महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं (Public Services) में गिरावट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। करीब 5 लाख से ज्यादा लोगों ने आक्रामक विरोध जताया। कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। फ्रांस की पुलिस ने 2400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। वहीं, हिंसा रोकने के प्रयास में करीब 1 हजार या उससे अधिक पुलिसकर्मी और सैना के जवान घायल बताए जा रहे हैं।
भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च निकालना मुश्किल
इटली के मिलान, बोलोनिया और ट्यूरिन समेत कई शहरों में लोगों ने बढ़ते घरेलू खर्च और बिलों के खिलाफ आवाज उठाई। बेल्जियम में भी जीवनयापन की लागत को लेकर नाराजगी सामने आई। महंगे आवास का असर केवल घर खरीदने वालों तक सीमित नहीं बल्कि किराएदारों, नौकरी के लिए दूसरे शहर जाने वाले युवाओं और बच्चों वाले परिवारों के लिए भी भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में किफायती आवास यूरोप के सामने बड़ी समस्या बन गया है।
इसी कड़ी में बताते चलें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी आग में घी कर काम कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस की राजधानी पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन पॉलिसी को इसका जिम्मेदार ठहराया। जानकारी यह भी है कि ट्रंप लंबे समय से इमिग्रेशन पर सख्ती की वकालत करते रहे हैं।
तोड़फोड़ और लूटपाट की चुकानी होगी कीमत
डोनाल्ड ट्रम्प ने मैक्रों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने करीब 8 साल पहले मैक्रों को अलर्ट करते हुए कहा था कि दूसरे देशों के लोगों को बड़ी संख्या में एंट्री देना गलत है। इसके बावजूद भी सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए, जिसका खामियाज़ा आज देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को सख्त कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इस हिसाब से है फ्रांस की आबादी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस में करीब 46 प्रतिशत लोग ईसाई धर्म से हैं। करीब 43 प्रतिशत लोग किसी धर्म को नहीं मानते। मुस्लिम आबादी तकरीबन 9% है। हिंदू, बौद्ध और दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों की संख्या 1 प्रतिशत के आसपास है। मिली जानकारी के हिसाब से फ्रांस में जनगणना के समय धर्म के बारे में खास कोई जानकारी नहीं ली जाती है। जिस कारण से ये आंकड़े ऊपर नीचे हो सकते हैं।
51% लोगों ने कहा किसी धर्म को नहीं मानते
फ्रांस के 2019-20 के सरकारी सर्वे में 18 से 59 साल के लोगों में 10 प्रतिशत ने खुद को मुस्लिम और 29% ने कैथोलिक ईसाई बताया था। वहीं, 51% लोगों ने कहा कि वे किसी धर्म को नहीं मानते हैं। ट्रम्प ने फ्रांस में हो रही हिंसा को दूसरे देशों से लोगों को आने देने की नीति से जोड़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक फ्रांस के हालात के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम, आर्थिक परेशानियां, सरकारी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव और युवाओं की नाराजगी जैसे मुद्दे बताए गए हैं।
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