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ईरान-अमेरिका वार्ता फेल, 21 घंटे की बातचीत के बाद भी नहीं निकला हल

Iran US Talks Failure : ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. इस वार्ता को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने निराशा जताई और साफ कहा कि बातचीत के बावजूद कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई.

इस्लामाबाद में हुई लंबी बैठक के बाद वेंस ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के सामने अपने प्रस्ताव रखे थे, लेकिन तेहरान उनकी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ, उन्होंने कहा कि बातचीत की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन अंत तक दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहे और कोई समाधान नहीं निकल सका. ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौट रहा है.

ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया

वहीं ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई. ईरानी पक्ष ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और उन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था. इसी वजह से वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई.

करीब 21 घंटे चली इस बातचीत में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. इसमें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करना, लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना प्रमुख विषय रहे. यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इसकी सुरक्षा पर दोनों देशों के अलग-अलग रुख सामने आए.

शहबाज शरीफ और असीम मुनीर रहे शामिल

आपको बता दें कि वार्ता में अमेरिका की ओर से जेडी वेंस शामिल हुए, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने किया. पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर भी मौजूद रहे.

बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा टकराव रहा. ईरान इस क्षेत्र में अपना नियंत्रण चाहता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानते हुए किसी भी तरह की रोक को स्वीकार नहीं कर रहा. इसी बीच अमेरिकी युद्धपोतों की गतिविधियां भी इस इलाके में बढ़ गई हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं.

पाकिस्तान को समाधान की उम्मीद

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न उठाए और इस संबंध में ठोस आश्वासन दे. हालांकि ईरान इस पर सहमत नहीं हुआ, जिससे बातचीत का रास्ता और कठिन हो गया है.

फिलहाल, इस असफल वार्ता के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, लेकिन पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि आगे चलकर कूटनीतिक प्रयासों से कोई समाधान जरूर निकल सकता है.

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