
Assam CM controversy : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े कथित ‘शूटिंग वीडियो’ विवाद मामले में याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से सीधा इनकार कर दिया है। इसके साथ कहा है कि वे पहले हाईकोर्ट जाएं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि हर चुनावी या राजनीतिक विवाद को सीधे सुप्रीम कोर्ट लाना उचित प्रवृत्ति नहीं है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि “आप गौहाटी हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? उसकी अधिकारिता को कमतर न आंकें।” साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले में सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध भी किया।
वरिष्ठ वकील की दलील
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि मुख्यमंत्री के बयान और कथित वीडियो की प्रकृति गंभीर है, इसलिए शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। हालांकि, पीठ ने यह स्पष्ट किया कि संवैधानिक ढांचे के तहत पहले संबंधित हाईकोर्ट में याचिका दायर करना ही उचित प्रक्रिया है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत 7 फरवरी को हुई, जब असम बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया। इस वीडियो में मुख्यमंत्री कथित रूप से एक विशेष समुदाय की ओर राइफल से निशाना साधते दिखाई दे रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई और विपक्षी दलों ने इसे नफरत फैलाने वाला कदम बताया। विवाद बढ़ने पर संबंधित पोस्ट को हटा लिया गया।
एफआईआर और SIT जांच की मांग
इस मामले में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े नेताओं ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है। सीपीआई नेता एनी राजा ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है।
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