Punjab News : आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के आई.सी.एस.एस.आर. सेमिनार हॉल में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रो. भीम एस. दहिया के सम्मान में ‘फेस्टश्रिफ्ट: ए ट्रिब्यूट टू द एकेडमिक लीडरशिप एंड मेंटरशिप ऑफ प्रो. भीम एस. दहिया’ का लोकार्पण किया गया।
यह पुस्तक प्रख्यात विद्वान, आलोचक, साहित्यिक शिक्षक और प्रशासक प्रोफेसर भीम एस. दहिया के जीवन, विद्वत्ता, गतिशील नेतृत्व और प्रेरणादायक मार्गदर्शन को समर्पित है।
नैतिक नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका
इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. भीम एस. दहिया ने इस पुस्तक को तैयार करने के लिए अपने सहयोगियों, विद्यार्थियों और संपादकीय टीम का तहेदिल से धन्यवाद किया। उन्होंने अपने अकादमिक सफर को याद करते हुए आधुनिक शिक्षा में आलोचनात्मक चिंतन, मार्गदर्शन और नैतिक नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
शानदार योगदान के लिए विशेष सम्मान
पुस्तक की संपादक डॉ. सुषमा आर्या और प्रो. एस.पी.एस. दहिया ने कहा कि यह प्रकाशन साहित्यिक शोध, अकादमिक नेतृत्व और मार्गदर्शन के प्रति प्रो. दहिया के जीवनभर के समर्पण तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके शानदार योगदान के लिए विशेष सम्मान है।
शिक्षा, नेतृत्व और साहित्यिक विरासत को उजागर करने वाली हाल ही में जारी की गई ‘फेस्टश्रिफ्ट’ प्रोफेसर भीम एस. दहिया के अकादमिक और सार्वजनिक क्षेत्रों में दिए गए बहुमूल्य योगदान को समर्पित है।
विशेष अतिथि के रूप में की शिरकत
इस समारोह में पंजाब विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. शेली वालिया ने मुख्य अतिथि के रूप में तथा ई.एफ.एल.यू., हैदराबाद के पूर्व कुलपति डॉ. अभय मौर्य ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी, नारनौल के पूर्व कुलपति डॉ. आर.सी. कुहाड़ ने की।
इस अवसर पर प्रो. के.के. गौतम, प्रो. अक्षय, प्रो. पंकज शर्मा और डॉ. उज्ज्वल शर्मा ने संबोधित किया तथा अकादमिक विचार साझा किए। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव सुनाए और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. दहिया के गहरे प्रभाव को उजागर किया।
अकादमिक मानकों को रखा कायम
समारोह के वक्ताओं ने प्रो. दहिया की सराहना करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी शिक्षाविद् बताया, जिन्होंने युवा शिक्षण प्रतिभाओं को निखारने के साथ-साथ अकादमिक मानकों को भी कायम रखा। ‘फेस्टश्रिफ्ट’ का लोकार्पण उनके लंबे समय तक चले नेतृत्व और साहित्यिक शोध के प्रति जीवनभर के योगदान का जश्न मनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
प्रशंसक बड़ी संख्या में हुए शामिल
इस पुस्तक का संपादन डॉ. सुषमा आर्या और प्रो. एस.पी.एस. दहिया द्वारा किया गया है तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. प्रेम सिंह ने आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस समारोह में प्रो. दहिया के पूर्व विद्यार्थी, शिक्षक सहयोगी और प्रशंसक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस अवसर पर उनके परिवार के सदस्य, जिनमें उनके पुत्र त्रिभुवन दहिया तथा पुत्रियां डॉ. दिव्या और डॉ. हेमा शामिल थीं, भी उपस्थित रहे।
रजिस्ट्रार के रूप में शानदार सेवाएं
उल्लेखनीय है कि प्रो. दहिया ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति (1993-1996), प्रो-वाइस चांसलर (1992-1993), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रमुख तथा महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के रजिस्ट्रार के रूप में शानदार सेवाएं निभाईं। वर्ष 2008 से वह ‘द शेक्सपियर एसोसिएशन (इंडिया)’ के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
अपना विशिष्ट दृष्टिकोण किया प्रस्तुत
अर्नेस्ट हेमिंग्वे के प्रमुख विद्वान के रूप में पहचाने जाने वाले प्रो. दहिया ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी से अपनी पीएच.डी. पूरी की, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘टैफ्ट फेलोशिप’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने शोध-प्रबंध में हेमिंग्वे के नायक के बारे में अपना विशिष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और पश्चिमी आलोचनात्मक ढांचों को चुनौती दी।
नैतिक दृढ़ता और जनता की सेवा
अकादमिक क्षेत्र के अलावा, डॉ. दहिया ने वर्ष 1982 में रोहत विधानसभा क्षेत्र का विधायक (एम.एल.ए.) के रूप में प्रतिनिधित्व किया तथा राजनीतिक ईमानदारी, नैतिक दृढ़ता और जनता की सेवा के माध्यम से एक बेदाग रिकॉर्ड कायम रखा।
विद्वानों की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन
अपने पूरे करियर के दौरान प्रो. दहिया ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों का नेतृत्व किया, साहित्यिक शोध के उच्च मानकों को प्रोत्साहित किया तथा हरियाणा और भारत में अंग्रेजी साहित्य के विद्वानों की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया।
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