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UP चुनाव 2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव, सवर्ण वोटरों को लेकर दिए बयान से बढ़ी हलचल

UP Political News : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने की मांग उठाई है. मंगलवार, 11 अगस्त को प्रेस वार्ता के दौरान मायावती ने कहा कि जिस तरह सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान है, उसी तरह निजी क्षेत्र में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए. उनके इस बयान का असर उत्तर प्रदेश की सियासत पर पड़ सकता है.

मायावती ने कहा कि सरकार ने पब्लिक सेक्टर को कमजोर किया और प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया. उनके मुताबिक, इसका फायदा देश के पूंजीपतियों को मिल रहा है, जबकि सर्व समाज के गरीब और बेरोजगार लोग पीछे जा रहे हैं.

बीजेपी और कांग्रेस पर जातिवादी सोच का आरोप

बसपा प्रमुख ने दावा किया कि निजी क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव के बीच दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का लाभ सीमित होता जा रहा है, उन्होंने आरएसएस पर भी आरक्षण को निष्प्रभावी बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

मायावती ने कहा कि बसपा ने बीजेपी और कांग्रेस की तरह जातिवादी या पूंजीवादी सोच के आधार पर सरकार नहीं चलाई, बल्कि ‘सर्वजनहिताय’ के सिद्धांत पर काम किया.

सवर्ण मतदाताओं को लेकर भी चर्चा

मायावती के निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग के बाद यूपी में सवर्ण मतदाताओं के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है. खासकर ऐसे समय में जब बसपा सवर्ण समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

इससे पहले मायावती ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा था, उन्होंने कहा था कि सवर्ण समाज का हित बसपा में ही निहित है. मायावती का दावा था कि सपा सवर्णों के हित की बात सिर्फ नारों और बयानों में करती है.

कांग्रेस पर आंदोलन हाईजैक करने का आरोप

मायावती ने इससे पहले कांग्रेस पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप भी लगाया था. अब निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग के जरिए उन्होंने एक बार फिर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे को केंद्र में ला दिया है.

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