Ajinkya Rahane Retirement : भारतीय क्रिकेट के भरोसेमंद और शांत स्वभाव वाले बल्लेबाजों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने 36 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। टेस्ट, वनडे और टी20 क्रिकेट को अलविदा कहते हुए रहाणे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कैप नंबर 278, साइनिंग ऑफ।” इसके साथ ही 2011 में शुरू हुए उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत हो गया।
मेलबर्न में 112 रनों की शानदार पारी
रहाणे के करियर के कई यादगार पल रहे हैं, लेकिन 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे की मेलबर्न टेस्ट पारी हमेशा खास रहेगी। एडिलेड टेस्ट में भारतीय टीम के 36 रन पर सिमटने के बाद जब हालात मुश्किल थे, तब रहाणे ने मेलबर्न में 112 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई थी। हालांकि, उनके करियर का एक ऐसा रिकॉर्ड भी है जो उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
4 मुकाबले जीते और 2 मैच ड्रॉ रहे
अजिंक्य रहाणे ने जब भी भारतीय टीम की कप्तानी संभाली, टीम को हार का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कुल 6 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिसमें टीम ने 4 मुकाबले जीते और 2 मैच ड्रॉ रहे। इसके अलावा 2015 में जिम्बाब्वे दौरे पर एमएस धोनी की गैरमौजूदगी में रहाणे को वनडे टीम की कमान मिली थी। उन्होंने तीन वनडे मैचों में कप्तानी की और तीनों में भारत को जीत दिलाई।
सचिन तेंदुलकर का कप्तानी कार्यकाल
इस तरह रहाणे का कप्तानी रिकॉर्ड पूरी तरह अजेय रहा। हालांकि, भारत के दिग्गज कप्तान एमएस धोनी और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों ने लंबे समय तक टीम की जिम्मेदारी संभाली और कई ऐतिहासिक जीत हासिल कीं, लेकिन उनकी कप्तानी में हार भी दर्ज हुई। वहीं सचिन तेंदुलकर का कप्तानी कार्यकाल भी आसान नहीं रहा था। इसके मुकाबले रहाणे का छोटा लेकिन बेदाग कप्तानी रिकॉर्ड क्रिकेट इतिहास में खास जगह रखता है।
कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई
रहाणे को कभी स्थायी कप्तान के तौर पर नहीं देखा गया था। उन्हें ज्यादातर मौकों पर परिस्थितियों के कारण टीम की कमान संभालनी पड़ी। 2017 में विराट कोहली की चोट के समय और 2020-21 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एडिलेड टेस्ट में हार के बाद कोहली के भारत लौटने पर रहाणे ने कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई।
भारत ने 328 रनों का लक्ष्य हासिल किया
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने गाबा में इतिहास रचा। ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया का 32 साल पुराना अजेय रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत ने 328 रनों का लक्ष्य हासिल किया और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की। यह भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में शामिल है।
लंबे समय तक कप्तानी एक अलग चुनौती
हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि धोनी के 60 टेस्ट और विराट कोहली के 68 टेस्ट मैचों की कप्तानी की तुलना में रहाणे के 6 टेस्ट मैचों का आंकड़ा छोटा है। लंबे समय तक कप्तानी करना एक अलग चुनौती होती है, लेकिन कम समय में बिना हार के रिकॉर्ड बनाना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
शानदार करियर को यादगार अंदाज में किया समाप्त
अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच खेले और इस दौरान 5,000 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 12 शतक शामिल हैं। मराठी भाषा में ‘अजिंक्य’ शब्द का अर्थ होता है जिसे हराना मुश्किल हो। भारतीय टीम की कप्तानी के दौरान रहाणे ने अपने नाम के इस अर्थ को पूरी तरह साबित किया और अपने शानदार करियर को यादगार अंदाज में समाप्त किया।
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