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नया आयकर अधिनियम 2025 लागू: ITR, टीडीएस और निवेश नियमों में अहम बदलाव

Income Tax Return : 1 अप्रैल 2026 से भारत में नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो गया है. हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जो आयकर रिटर्न भरे जाएंगे, वे अभी भी पुराने आयकर कानून, 1961 के अनुसार ही दाखिल होंगे. इस साल का आईटीआर दाखिल करना उसी पुराने नियम के तहत होगा. नए कानून के तहत कर केवल 1 अप्रैल 2026 के बाद की आय पर लागू होगा. आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सभी रिटर्न फॉर्म (आईटीआर-1, 2, 3, 5, 6, 7 और आईटीआर-यू) अधिसूचित कर दिए हैं.

अब निवेशकों को टीडीएस कम या न कटवाने के लिए अलग-अलग जगह फॉर्म जमा करने की जरूरत नहीं होगी. एकीकृत फॉर्म (पहले 15जी और 15एच) सीधे एनएसडीएल या सीडीएसएल में जमा किया जा सकता है. इससे डिमैट अकाउंट में रखी गई निवेश आय जैसे डिविडेंड, बॉन्ड पर ब्याज और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर राहत मिल सकेगी.

कंपनी कर्मचारियों के फॉर्म बदलेंगे

आपको बता दें कि वर्ष 2027 से कर्मचारियों को फॉर्म 16 जारी नहीं किया जाएगा. नए नियम के तहत इसे फॉर्म 130 से बदल दिया गया है. इसके अलावा अन्य कई आईटीआर और सूचना फॉर्म के नाम और नंबर भी अपडेट किए गए हैं.

डिविडेंड या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए गए लोन पर अब कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी. पहले यह छूट 20% तक थी, लेकिन अब पूरी तरह खत्म कर दी गई है. यह ब्याज सीधे ‘अन्य स्रोतों से आय’ में जोड़ा जाएगा.

शेयर बायबैक और कैपिटल गेन

शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि अब डिविडेंड नहीं मानी जाएगी, बल्कि इसे कैपिटल गेन के तहत टैक्स किया जाएगा. इसका मतलब है कि निवेशकों को लंबे समय तक शेयर रखने पर पहले की तुलना में अधिक लाभ मिलेगा.

ज्वैलरी और कला वस्तुओं की कीमत अब बाजार मूल्य के आधार पर तय होगी. अगर ज्वैलरी रजिस्टर्ड डीलर से खरीदी गई है तो इनवॉइस वैल्यू को मान्य माना जाएगा. वहीं, अन्य मामलों में, अगर मूल्य ₹50,000 से अधिक हो, तो वैल्यूएशन के लिए रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट ली जा सकती है. अचल संपत्ति (जमीन या भवन) का मूल्य सरकार द्वारा तय स्टांप ड्यूटी मूल्य पर आधारित होगा, जबकि अन्य संपत्तियों के लिए ओपन मार्केट मूल्य आधार होगा.

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