
Pakistan Flour Prices : पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें लोगों की परेशानी लगातार बढ़ा रही हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह के बाद अगस्त की शुरुआत में गेहूं के आटे और मैदे के दाम में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के कई हिस्सों में आटे की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
कराची में 20 किलो आटे की कीमत 3,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंची
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 6 अगस्त तक के सेंसेटिव प्राइस इंडेक्स (SPI) के आंकड़ों में कराची में गेहूं के आटे और मैदे के दाम बढ़े हैं। 30 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 20 किलो गेहूं के आटे की कीमत 2,600 से 2,900 पाकिस्तानी रुपये थी, जो अब बढ़कर 2,700 से 3,000 रुपये हो गई है। वहीं, 10 किलो गेहूं की बोरी का दाम 1,160 रुपये से बढ़कर 1,200 रुपये हो गया है। एक किलो मैदे की कीमत भी 149.46 रुपये से बढ़कर 158.56 रुपये दर्ज की गई है।
कई शहरों में 20 किलो आटे की बोरी 100 रुपये तक महंगी
6 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान पाकिस्तान के कई शहरों में 20 किलो आटे की बोरी की कीमत में औसतन 100 पाकिस्तानी रुपये की वृद्धि हुई। सेंसेटिव प्राइस इंडेक्स में गेहूं के आटे की कीमत में सप्ताह-दर-सप्ताह करीब 0.52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी अवधि में फाइन फ्लोर यानी मैदे के दाम में भी तेजी देखने को मिली। कराची में एक किलो फाइन फ्लोर की कीमत करीब 158 रुपये तक पहुंच गई।
गेहूं आयात से पहले कीमतों पर नियंत्रण की मांग
व्यापारियों का कहना है कि सरकार करीब एक मिलियन यानी 10 लाख टन गेहूं के आयात की तैयारी कर रही है, लेकिन उससे पहले घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि आयातित गेहूं बाजार में पहुंचने से पहले कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इस कदम का फायदा आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाएगा।
इस्लामाबाद-रावलपिंडी में आटा सबसे ज्यादा महंगा
इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 10 किलो गेहूं की थैली की कीमत सबसे अधिक 1,339.31 पाकिस्तानी रुपये बताई गई है। इसके चलते इन दोनों शहरों में 20 किलो आटे की बोरी का दाम 3,040 से 3,133 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, बारीक आटे यानी फाइन फ्लोर की कीमत 173.68 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई है, जो अन्य शहरों के मुकाबले काफी अधिक है।
महंगाई पर लगाम लगाने की व्यापारियों ने सरकार से अपील
आटे और मैदे की बढ़ती कीमतों को लेकर व्यापारियों ने सरकार से जल्द कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि गेहूं के आयात से पहले घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो महंगे आटे से पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे आम लोगों को तत्काल राहत मिलना मुश्किल होगा।
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