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	<title>लाइफ़स्टाइल News in Hindi, लाइफस्टाइल की खबरें, Hindi News - Hindi Khabar</title>
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		<title>Summer Cold Drink : गर्मी में ठंडक का असरदार उपाय, घर पर बनाएं सौंफ का शरबत</title>
		<link>https://hindikhabar.com/summer-cooling-remedy-saunf-sherbet-recipe-home-made-refreshing-drink/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:38:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[Summer Cold Drink : गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक देने के लिए लोग तरह-तरह के पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। नींबू पानी और शिकंजी के अलावा सौंफ का शरबत भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि ताजगी का एहसास भी कराता है। सौंफ &#8230;]]></description>
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<p><strong>Summer Cold Drink :</strong> गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक देने के लिए लोग तरह-तरह के पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। नींबू पानी और शिकंजी के अलावा सौंफ का शरबत भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि ताजगी का एहसास भी कराता है।</p>



<p>सौंफ की तासीर ठंडी होने के कारण यह लू और गर्मी से बचाने में मदद करती है। साथ ही यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है। आइए जानते हैं घर पर आसानी से बनने वाली सौंफ शरबत की रेसिपी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सामग्री-</h3>



<p>सौंफ – आधा कप<br>मिश्री या चीनी – 1 कप (मिश्री अधिक ठंडी मानी जाती है)<br>हरी इलायची – 4 से 5<br>काला नमक – 1 छोटा चम्मच<br>नींबू का रस – 2 बड़े चम्मच<br>ठंडा पानी और बर्फ के टुकड़े – आवश्यकता अनुसार</p>



<h3 class="wp-block-heading">बनाने की विधि-</h3>



<p>सबसे पहले सौंफ को साफ करके 2 से 3 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। अगर समय कम हो तो इसे सीधे भी उपयोग किया जा सकता है।</p>



<p>इसके बाद भीगी हुई सौंफ का पानी निकालकर इसे इलायची के साथ मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें। चाहें तो सौंफ, मिश्री और इलायची को सूखा पीसकर पाउडर भी तैयार किया जा सकता है।</p>



<p>अब एक जग में ठंडा पानी लें और उसमें तैयार किया हुआ सौंफ मिश्रण मिलाएं। इसके बाद इसमें काला नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।</p>



<p>अंत में गिलास में बर्फ के टुकड़े डालें और ऊपर से तैयार शरबत डालकर परोसें। चाहें तो पुदीने की पत्तियों से सजाकर इसे और भी ताजगी भरा बनाया जा सकता है।</p>



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		<item>
		<title>एम्स की चेतावनी, स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की भाषा और सामाजिक क्षमता पर पड़ सकता है असर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/aiims-warning-increased-screen-time-can-affect-child-language-and-social-skills/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 May 2026 12:59:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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		<category><![CDATA[Autism Awareness]]></category>
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					<description><![CDATA[Screen Time Risk : All India Institute of Medical Sciences के विशेषज्ञों ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव &#8230;]]></description>
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<p><strong>Screen Time Risk :</strong> All India Institute of Medical Sciences के विशेषज्ञों ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र में मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्राकृतिक विकास में आती है बाधा</h3>



<p>पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ Shafali Gulati के अनुसार जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को किसी भी प्रकार की स्क्रीन से दूर रखना बेहतर माना जाता है। इस उम्र में बच्चों का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है और अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर उनके प्राकृतिक विकास को प्रभावित कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संवाद कौशल पर पड़ता है असर</h3>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने वाले बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसके अलावा उनके सामाजिक व्यवहार और संवाद कौशल पर भी असर पड़ सकता है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में बच्चों में ऐसे व्यवहारिक संकेत दिखाई देते हैं जो ऑटिज्म जैसे लग सकते हैं, हालांकि इसे सीधे तौर पर ऑटिज्म का कारण नहीं माना गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बातचीत और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होना</h3>



<p>डॉक्टरों ने सलाह दी है कि 18 महीने से लेकर 6 साल तक के बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखा जाए। इस दौरान बच्चों को आउटडोर गतिविधियों, खेलकूद, परिवार के साथ बातचीत और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना अधिक जरूरी है ताकि उनका मानसिक और भावनात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Every Life has Value” थीम</h3>



<p>हर वर्ष अप्रैल महीने को दुनियाभर में ऑटिज्म जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने “Autism &amp; Humanity: Every Life has Value” थीम निर्धारित की है। इसी कड़ी में एम्स दिल्ली में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर विशेष जनस्वास्थ्य व्याख्यान आयोजित किया जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बच्चों के विकास में सकारात्मक सुधार</h3>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 12 से 18 महीने की उम्र में पहचाने जा सकते हैं। समय पर पहचान और सही हस्तक्षेप से बच्चों के विकास में सकारात्मक सुधार संभव है। आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी संख्या में बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित पाए जा रहे हैं, जिससे यह एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समस्याएं और नींद से जुड़ी परेशानियां</h3>



<p>एम्स के विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटिज्म से प्रभावित कई बच्चों में अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी देखने को मिलती हैं, जिनमें मिर्गी, ध्यान की कमी, व्यवहारिक समस्याएं और नींद से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं। इन चुनौतियों का असर बच्चों के साथ-साथ उनके परिवारों के जीवन पर भी पड़ता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इलाज अपनाने से बच्चों को बेहतर जीवन</h3>



<p>डॉक्टरों का कहना है कि ऑटिज्म से जुड़े मामलों में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सही जानकारी, नियमित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से इलाज अपनाने से बच्चों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है। साथ ही बिना प्रमाण वाली वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों से बचने की भी सलाह दी गई है। इस तरह की जागरूकता पहलों का उद्देश्य समाज में समझ बढ़ाना और ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को सम्मानजनक और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी सामान्य जीवन में आगे बढ़ सकें।</p>



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		<item>
		<title>गर्मी में गन्ने का जूस कितना सुरक्षित? एक्सपर्ट ने बताए फायदे और खतरे</title>
		<link>https://hindikhabar.com/summer-safety-sugarcane-juice-expert-benefits-risks-health-advice-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:08:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[diabetic patients]]></category>
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					<description><![CDATA[Sugarcane Juice Risk : तेज धूप और गर्मी में गन्ने का जूस लोगों के लिए एक ताजगी भरा विकल्प माना जाता है। नींबू, पुदीना और काला नमक मिलाकर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है, जिससे यह गर्मियों में काफी लोकप्रिय हो जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक देने में मदद करता &#8230;]]></description>
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<p><strong>Sugarcane Juice Risk :</strong> तेज धूप और गर्मी में गन्ने का जूस लोगों के लिए एक ताजगी भरा विकल्प माना जाता है। नींबू, पुदीना और काला नमक मिलाकर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है, जिससे यह गर्मियों में काफी लोकप्रिय हो जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक देने में मदद करता है, इसलिए सड़क किनारे इसे खूब पसंद किया जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">डायबिटीज के मरीज के लिए नुकसानदेह</h3>



<p>हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ने का जूस जितना फायदेमंद दिखता है, उतनी ही सावधानी इसकी गुणवत्ता और मात्रा को लेकर जरूरी है। गन्ने के रस में प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है और जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीमित मात्रा में करना चाहिए इसका सेवन</h3>



<p>इसके अलावा, जिन लोगों को मोटापा, फैटी लिवर या मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें भी इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि अधिक शुगर शरीर में फैट बढ़ाने का कारण बन सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पानी की सफाई पर नहीं दिया जाता ध्यान</h3>



<p>एक और बड़ी चिंता इसकी स्वच्छता को लेकर है। अक्सर सड़क किनारे बनाए जाने वाले गन्ने के जूस में मशीन, बर्फ और पानी की सफाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में दूषित पानी या उपकरणों के कारण टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पीने से पहले बरतें सावधानी</h3>



<p>विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गन्ने का जूस हमेशा साफ और हाइजेनिक जगह से ही लिया जाए और इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए। विशेषकर डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को इसे पीने से पहले सावधानी जरूर बरतनी चाहिए।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/sleeper-bus-registration-rules-fire-safety-emergency-exit-checks-strict-nitin-gadkari-rule-update/">स्लीपर बसों के रजिस्ट्रेशन नियम सख्त, अब फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट की होगी सख्ती से जांच</a></p>



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		<item>
		<title>श्रद्धा या रहस्य? मांतगेश्वर मंदिर का शिवलिंग वैज्ञानिकों के लिए भी बना पहेली, चढ़ाया जल पलभर में गायब</title>
		<link>https://hindikhabar.com/shraddha-ya-rahasya-matangeshwar-temple-shivling-scientific-mystery-water-disappears-instantly/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:39:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab News]]></category>
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					<description><![CDATA[Matangeshwar Mandir : मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित मांतगेश्वर मंदिर अपनी आस्था और रहस्य दोनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थापित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि उस पर चढ़ाया गया जल या दूध कुछ ही क्षणों में अदृश्य हो जाता है, जिससे श्रद्धालु अक्सर हैरान रह जाते हैं। स्पष्ट निकासी व्यवस्था के स्वयं ही &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Matangeshwar Mandir : </strong>मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित मांतगेश्वर मंदिर अपनी आस्था और रहस्य दोनों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थापित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि उस पर चढ़ाया गया जल या दूध कुछ ही क्षणों में अदृश्य हो जाता है, जिससे श्रद्धालु अक्सर हैरान रह जाते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्पष्ट निकासी व्यवस्था के स्वयं ही गायब</h3>



<p>स्थानीय लोगों के अनुसार, शिवलिंग पर अर्पित की गई हर बूंद बिना किसी स्पष्ट निकासी व्यवस्था के स्वयं ही गायब हो जाती है। यही कारण है कि यह स्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और अनुभव का केंद्र माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल</h3>



<p>मंदिर में आने वाले भक्त बताते हैं कि यहां का माहौल उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति देता है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। पीढ़ियों से लोग इस घटना को देखते और अनुभव करते आ रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मंदिर की संरचना और पत्थरों की बनावट</h3>



<p>वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस रहस्य को समझने के प्रयास किए गए हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे मंदिर की संरचना और पत्थरों की बनावट से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे भू-वैज्ञानिक कारणों से समझाने की कोशिश करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">वैज्ञानिक विश्लेषण का विषय</h3>



<p>हालांकि, आस्थावान लोगों के लिए यह स्थान केवल वैज्ञानिक विश्लेषण का विषय नहीं है, बल्कि गहरी श्रद्धा और अनुभव का प्रतीक है। भक्तों का मानना है कि यहां आकर व्यक्ति को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/passengers-please-note-trains-crowded-in-summer-wedding-season-confirmed-tickets-difficult/">Uttarakhand News : यात्रीगण कृप्या ध्यान दें- गर्मी और शादी सीजन में ट्रेनों में भारी भीड़, कंफर्म टिकट मिलना हुआ मुश्किल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>Skincare Mistakes : स्किन केयर में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी, डर्मेटोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/skincare-me-ye-galtiyan-padh-sakti-hain-bhari-dermatologist-ne-di-chetavni/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 09:14:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[health update]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[SkinCare]]></category>
		<category><![CDATA[Skincare Mistakes]]></category>
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					<description><![CDATA[Skincare Mistakes : आज के समय में स्किन केयर लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन गलत तरीके अपनाने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। धूल, प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण त्वचा पर असर पड़ता है, इसलिए सही देखभाल जरूरी हो जाती है। स्किन कैंसर का बढ़ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Skincare Mistakes : </strong>आज के समय में स्किन केयर लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन गलत तरीके अपनाने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। धूल, प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण त्वचा पर असर पड़ता है, इसलिए सही देखभाल जरूरी हो जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्किन कैंसर का बढ़ सकता है खतरा</h3>



<p>डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार सबसे बड़ी गलती सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना है। यूवी किरणें त्वचा को समय से पहले बूढ़ा बना सकती हैं, पिगमेंटेशन बढ़ा सकती हैं और लंबे समय में स्किन कैंसर का खतरा भी पैदा कर सकती हैं। इसलिए इसे हर मौसम में लगाना जरूरी माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संवेदनशील या मुंहासे वाली स्किन पर असर</h3>



<p>एक और आम गलती नींबू, टूथपेस्ट या घरेलू नुस्खों को सीधे चेहरे पर लगाना है। इससे त्वचा में जलन, एलर्जी और दाग-धब्बे बढ़ सकते हैं, खासकर संवेदनशील या मुंहासे वाली स्किन पर इसका असर ज्यादा खराब होता है। सोशल मीडिया पर वायरल स्किन केयर हैक्स को बिना विशेषज्ञ सलाह के अपनाना भी नुकसानदायक हो सकता है। एक्ने, एक्जिमा या पिगमेंटेशन जैसी समस्याओं के लिए हमेशा प्रमाणित और सही इलाज लेना बेहतर होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाना जरूरी</h3>



<p>कई लोग सिर्फ चेहरे की ही देखभाल करते हैं, जबकि गर्दन, हाथ और छाती जैसे हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो समय के साथ जल्दी उम्र बढ़ने के संकेत दिखाते हैं। इन हिस्सों पर भी मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। बार-बार चेहरा धोना या हार्श साबुन का इस्तेमाल करने से स्किन की प्राकृतिक परत कमजोर हो सकती है, जिससे रूखापन और पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जोर से रगड़ना त्वचा के लिए नुकसानदायक</h3>



<p>इसके अलावा गीली त्वचा पर एक्टिव इंग्रेडिएंट्स जैसे रेटिनोल या एसिड लगाने से जलन और रिएक्शन का खतरा बढ़ जाता है। चेहरे को तौलिए से जोर से रगड़ना भी त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाना बेहतर माना जाता है।</p>



<p>स्किन केयर प्रोडक्ट्स को अचानक और तेज़ तरीके से इस्तेमाल करना भी स्किन बैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे इरिटेशन और रिएक्शन की समस्या हो सकती है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/kedarnath-dham-yatra-me-1-lakh-se-zyada-shraddhaluon-ne-kiye-darshan-bhakton-me-bhari-utsah/">केदारनाथ धाम यात्रा में 1 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, भक्तों में भारी उत्साह</a></p>



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		<item>
		<title>चैटिंग होगी और आसान, WhatsApp में आ सकते हैं फ्लोटिंग नोटिफिकेशन बबल्स</title>
		<link>https://hindikhabar.com/whatsapp-floating-notification-bubbles-chatting-easier-new-feature-update/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:18:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[टेक]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Android Update]]></category>
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		<category><![CDATA[Whatsapp update]]></category>
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					<description><![CDATA[WhatsApp Update : WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक और बड़ा विजुअल और इंटरफेस बदलाव लाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta का यह मैसेजिंग ऐप जल्द ही एक नए और फ्रेश डिजाइन के साथ नजर आ सकता है, जिसमें टॉप नेविगेशन बार में भी बदलाव देखने को मिलेंगे। इंटरफेस को सिंपल और &#8230;]]></description>
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<p><strong>WhatsApp Update :</strong> WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक और बड़ा विजुअल और इंटरफेस बदलाव लाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta का यह मैसेजिंग ऐप जल्द ही एक नए और फ्रेश डिजाइन के साथ नजर आ सकता है, जिसमें टॉप नेविगेशन बार में भी बदलाव देखने को मिलेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इंटरफेस को सिंपल और मॉडर्न बनाने का काम</h3>



<p>WaBetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार, नए अपडेट में ऐप के नाम की जगह WhatsApp का ऑफिशियल लोगो टॉप बार में दिख सकता है। इसके साथ ही इंटरफेस को ज्यादा सिंपल और मॉडर्न बनाने पर काम चल रहा है, ताकि नए फीचर्स तक पहुंच और आसान हो सके। इसमें स्टेटस अपडेट्स को टॉप सेक्शन से सीधे एक्सेस करने की सुविधा भी शामिल हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नोटिफिकेशन बबल्स सपोर्ट मिलने की संभावना</h3>



<p>इसके अलावा, WhatsApp एक ऐसे नए फीचर पर भी काम कर रहा है जो बातचीत को और तेज और आसान बना देगा। इसमें नोटिफिकेशन बबल्स का सपोर्ट मिलने की संभावना है, जो एंड्रॉयड सिस्टम पर आधारित होगा। इस फीचर की मदद से यूजर्स चैट को किसी भी स्क्रीन पर फ्लोटिंग आइकन के रूप में देख सकेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">डिवाइस सेटिंग्स और सिस्टम सपोर्ट पर करेगी निर्भर</h3>



<p>इन बबल्स के जरिए यूजर्स बिना किसी ऐप को बंद किए सीधे मैसेज पढ़ और रिप्लाई कर सकेंगे। जैसे ही यूजर बबल पर टैप करेगा, एक छोटा चैट विंडो खुल जाएगा, जिससे मल्टीटास्किंग और भी आसान हो जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीचर एंड्रॉयड 11 और उससे ऊपर के वर्जन वाले डिवाइसेज पर बेहतर तरीके से काम करेगा। हालांकि, इसकी उपलब्धता डिवाइस सेटिंग्स और सिस्टम सपोर्ट पर निर्भर करेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूजर्स के लिए रोलआउट किए जाने की संभावना</h3>



<p>फिलहाल ये सभी बदलाव डेवलपमेंट स्टेज में हैं और पहले बीटा यूजर्स के लिए जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद इन्हें धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट किए जाने की संभावना है।</p>



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		<title>Kedarnath Yatra 2026 : यात्रा के दौरान पैक करें ये 5 जरूरी चीजें, सफर हो जाएगा आसान</title>
		<link>https://hindikhabar.com/kedarnath-yatra-2026-pack-these-5-essential-items-for-a-smooth-journey/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 12:08:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Char Dham Yatra 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Kedarnath Bag Pack Guide]]></category>
		<category><![CDATA[Kedarnath Dham]]></category>
		<category><![CDATA[Kedarnath Yatra 2026]]></category>
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					<description><![CDATA[Kedarnath Yatra 2026 : चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत हो चुकी है और आज केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं, जिससे उत्तराखंड की पवित्र वादियों में भक्ति और आस्था का माहौल फिर से जीवित हो गया है। हर साल लाखों भक्तों के लिए केदारनाथ यात्रा एक विशेष अनुभव होती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Kedarnath Yatra 2026 :</strong> चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत हो चुकी है और आज केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं, जिससे उत्तराखंड की पवित्र वादियों में भक्ति और आस्था का माहौल फिर से जीवित हो गया है। हर साल लाखों भक्तों के लिए केदारनाथ यात्रा एक विशेष अनुभव होती है, लेकिन यह उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>



<p>यात्रा के दौरान ऊंचाई, ठंड, अचानक बदलता मौसम, लंबा ट्रेक और ऑक्सीजन की कमी जैसी मुश्किलें सामने आ सकती हैं। इसलिए यदि आप इस पवित्र यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो सही तैयारी करना बेहद जरूरी है ताकि आपका सफर सुरक्षित और आरामदायक हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अगर आप केदारनाथ जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 5 चीजों को अपने बैग में जरूर पैक करें-</h3>



<p>ऊनी कपड़े और गर्म वस्त्र- केदारनाथ में मौसम कभी भी ठंडा हो सकता है, खासकर सुबह और रात के समय। यहां तक कि गर्मियों में भी ठंडी हवाएं चलती हैं। इसलिए ऊनी कपड़े, जैकेट, स्वेटर, मफलर, दस्ताने और मोटे मोजे जरूर रखें, ताकि ठंड से बचाव हो सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रेनकोट और छाता</h3>



<p>पहाड़ी इलाकों में मौसम जल्दी बदल सकता है और अचानक बारिश हो सकती है। एक अच्छा रेनकोट और हल्का छाता हमेशा अपने पास रखें, जो आपको बारिश से पूरी तरह बचाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ट्रेकिंग शूज और वॉकिंग स्टिक</h3>



<p>केदारनाथ का रास्ता लंबा और चढ़ाई वाला होता है। इसलिए आरामदायक और मजबूत ट्रेकिंग शूज पहनना जरूरी है, जो फिसलने से बचाएं। साथ ही वॉकिंग स्टिक रखें, जो चलने में सहारा दे और थकान कम करे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एनर्जी स्नैक्स</h3>



<p>लंबी यात्रा के दौरान शरीर जल्दी थक सकता है। इसलिए पानी की बोतल, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट, केले और हल्के स्नैक्स अपने पास रखें, जो आपको ऊर्जा प्रदान करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मेडिकल किट और पहचान पत्र</h3>



<p>ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सिरदर्द, चक्कर या थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए एक छोटी मेडिकल किट रखें जिसमें जरूरी दवाइयां, बैंडेज और एंटीसेप्टिक क्रीम हो। साथ ही अपना पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या अन्य सरकारी आईडी) और पावर बैंक जरूर रखें ताकि आप किसी भी आपातकालीन स्थिति में काम में आ सकें। यात्रा के दौरान ये चीजें आपकी मदद करेंगी और यात्रा को सुखद और सुरक्षित बनाएंगी।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/tragic-accident-in-chamba-vehicle-falls-into-gorge-eight-dead-two-injured/">Tehri Accident : चंबा में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरा वाहन, आठ लोगों की मौत, दो घायल</a></p>



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		<item>
		<title>Dengue Vaccine India: भारत में डेंगू से मिलेगी राहत, पहली वैक्सीन को मिली मंजूरी, डिटेल में पढ़ें पूरी ख़बर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/dengue-relief-in-india-first-dengue-vaccine-approved-in-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 10:54:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Dengue Vaccine]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Qdenga Dengue Vaccine]]></category>
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					<description><![CDATA[Dengue Vaccine India : भारत में डेंगू का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है, खासकर मानसून के मौसम में जब मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में अब देश के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है कि भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। इसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Dengue Vaccine India : </strong>भारत में डेंगू का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है, खासकर मानसून के मौसम में जब मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में अब देश के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है कि भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। इसे बीमारी से बचाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">1.13 लाख से ज्यादा मामले आ चुके सामने</h3>



<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2020 में जहां करीब 44 हजार केस दर्ज हुए थे, वहीं 2023 और 2024 में यह संख्या बढ़कर 2.3 लाख से अधिक हो गई। 2025 में भी नवंबर तक 1.13 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असल आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते।</p>



<h3 class="wp-block-heading">4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए उपयोग</h3>



<p>भारत में अब TAK-003 (Qdenga) नाम की डेंगू वैक्सीन को मंजूरी दी गई है। इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की विशेषज्ञ समिति ने 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए उपयोग की अनुमति दी है। इस वैक्सीन को जापान की टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी ने विकसित किया है। इसकी खास बात यह है कि इसे उन लोगों को भी लगाया जा सकता है जिन्हें पहले डेंगू हुआ हो या न हुआ हो। यह चारों प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षा देने में सक्षम मानी जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चार साल तक प्रदान करेगी सुरक्षा</h3>



<p>यह वैक्सीन दो डोज में दी जाती है, जिनके बीच तीन महीने का अंतर होता है। क्लीनिकल परीक्षणों में पाया गया है कि यह लगभग चार साल तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताया है जहां डेंगू का खतरा अधिक रहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सावधानी बरतना अभी भी जरूरी</h3>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी डेंगू के जोखिम में है, ऐसे में यह वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैक्सीन पूरी तरह से समाधान नहीं है और सावधानी बरतना अभी भी जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उपलब्धता और कीमत बेहतर होने की उम्मीद</h3>



<p>इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा, जिसके लिए टाकेडा कंपनी ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। इससे आने वाले समय में इसकी उपलब्धता और कीमत बेहतर होने की उम्मीद है।<br>डॉक्टरों के अनुसार, वैक्सीन के साथ-साथ मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई और समय पर इलाज भी उतना ही जरूरी है।</p>



<p><strong>Disclaimer :</strong> यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/earthquake-tremors-felt-in-uttarakhand-earth-shook-three-times-panic-among-people/">उत्तराखंड में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3 बार हिली धरती, लोगों में दहशत का माहौल</a></p>



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		<item>
		<title>गर्मी में चंदन की लकड़ी क्यों मानी जाती है रामबाण? जानें इसके जबरदस्त फायदे</title>
		<link>https://hindikhabar.com/why-is-sandalwood-considered-a-panacea-for-summer-learn-about-its-amazing-benefi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 06:01:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Ayurveda]]></category>
		<category><![CDATA[chandan benefits]]></category>
		<category><![CDATA[chandan paste]]></category>
		<category><![CDATA[heat relief]]></category>
		<category><![CDATA[herbal remedy]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[natural cooling]]></category>
		<category><![CDATA[sandalwood]]></category>
		<category><![CDATA[Skin Care]]></category>
		<category><![CDATA[skincare tips]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Cooling]]></category>
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					<description><![CDATA[Chandan Ki Lakdi Ke Use : गर्मियों के मौसम ने दस्तक दे दी है. दिन प्रति दिन देश के कई हिस्सों का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है. ऐसे में आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियों का वर्णन मिलता है, जिनके सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Chandan Ki Lakdi Ke Use : </strong>गर्मियों के मौसम ने दस्तक दे दी है. दिन प्रति दिन देश के कई हिस्सों का तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है. ऐसे में आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियों का वर्णन मिलता है, जिनके सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत भी मिलती है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण औषधि चंदन की लकड़ी है.</p>



<p>चंदन एक सुगंधित और खास लकड़ी है, जिसका वानस्पतिक नाम सैंटलम एल्बम लिन है. इसके हार्टवुड हिस्से का उपयोग मुख्य रूप से औषधीय रूप में किया जाता है. चंदन शरीर को ठंडक पहुंचाने और रक्त की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">आयुर्वेद में चंदन की लकड़ी का विशेष स्थान</h3>



<p>आयुर्वेद में चंदन की लकड़ी का विशेष स्थान बताया गया है. यह शरीर को ठंडक प्रदान करती है. इसे डायबिटीज की समस्या में फायदेमंद माना जाता है. यह बार-बार पेशाब आने की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है. चंदन की लकड़ी मूत्र में जलन को कम करने में भी उपयोगी है. इसके अलावा यह कमजोरी और थकान को दूर करने में भी कारगर मानी जाती है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">चंदन की लकड़ी के नियमित उपयोग से लाभ</h3>



<p>चंदन की लकड़ी का काढ़ा और चंदन पाउडर के नियमित उपयोग से मरीजों को राहत मिलती है. इससे पेशाब में जलन कम होती है, ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है और शरीर में ठंडक का अहसास होता है. चंदन के सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं और यह डायबिटीज के नियंत्रण में भी मदद करता है, क्योंकि इसमें मौजूद गुण ब्लड शुगर को संतुलित रखते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">चंदन की ठंडक और त्वचा पर असर</h3>



<p>पेशाब में जलन की समस्या में चंदन बहुत प्रभावी माना जाता है और यह मूत्र मार्ग से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है. रक्तस्राव संबंधी विकारों में भी चंदन का उपयोग फायदेमंद माना गया है. यह खून को शुद्ध करने और अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है. चंदन की ठंडक शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करती है, जिससे त्वचा की समस्याएं, चिड़चिड़ापन और गर्मी से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है. आयुर्वेद में चंदन को शीतल द्रव्य माना गया है. यह हृदय को शांति देता है, तनाव कम करता है और शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करता है. चंदन का लेप त्वचा पर लगाने से मुंहासे, सूजन और जलन में आराम मिलता है.</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="http://xn--%20%20%20%20%2012%20%20%20,%20%20%20%20%20-1v0f9m8imag78bidd5jpe2a8dwa1yncs3j0a8eiklhp15ae2c8dj0qf3oenkk5fih0hf2e6uhae1c2ujb7g0b/">दोस्त से मिलने के लिए 12 किलोमीटर दौड़ी लड़की, धूल से हुआ बुरा हाल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>Toilet में मोबाइल चलाने की आदत बन सकती है खतरनाक, बढ़ रहा बड़ा खतरा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/toilet-mobile-usage-habit-dangerous-increases-health-risk-piles-threat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:03:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Piles Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Toilet Risks]]></category>
		<category><![CDATA[Using Phone On Toilet Risks]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006412532</guid>

					<description><![CDATA[Using Phone On Toilet Risks : आजकल ज्यादातर लोग टॉयलेट में बैठते ही मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की आदत अपना चुके हैं। शुरुआत में यह आदत सामान्य और नुकसान रहित लगती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धीरे-धीरे पेल्विक हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल सकती है। आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव डॉक्टरों का कहना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Using Phone On Toilet Risks : </strong>आजकल ज्यादातर लोग टॉयलेट में बैठते ही मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की आदत अपना चुके हैं। शुरुआत में यह आदत सामान्य और नुकसान रहित लगती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धीरे-धीरे पेल्विक हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव</h3>



<p>डॉक्टरों का कहना है कि टॉयलेट का उद्देश्य सीमित समय में शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया को पूरा करना होता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति वहां लंबे समय तक बैठा रहता है, तो रेक्टम और आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने लगता है। सामान्य स्थिति में कुर्सी पर बैठने से शरीर को सहारा मिलता है, लेकिन टॉयलेट सीट पर ऐसा सपोर्ट नहीं मिलता, जिससे रक्त का प्रवाह नीचे की ओर बढ़ सकता है और दबाव और अधिक हो जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एनल एरिया की सूज जाती हैं नसें</h3>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति 10 मिनट से अधिक समय तक टॉयलेट में बैठा रहता है, तो यह स्थिति पाइल्स जैसी समस्या का कारण बन सकती है। पाइल्स में एनल एरिया की नसें सूज जाती हैं, जिससे दर्द और कई बार ब्लीडिंग भी हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बाहर निकलने में पैदा कर सकता है कठिनाई</h3>



<p>समस्या केवल यहीं तक सीमित नहीं है। फोन चलाने के दौरान ध्यान भटकने से शरीर के प्राकृतिक संकेत नजरअंदाज हो जाते हैं। इससे मल लंबे समय तक कोलन में रह सकता है, सूख सकता है और बाहर निकलने में कठिनाई पैदा कर सकता है। यही स्थिति कब्ज, पाइल्स और एनल फिशर जैसी समस्याओं को बढ़ावा देती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एनल कैनाल में सूक्ष्म दरारें</h3>



<p>डॉक्टर इस स्थिति को ‘स्ट्रेनिंग पैराडॉक्स’ भी कहते हैं, जिसमें व्यक्ति सीधे तौर पर जोर नहीं लगाता, लेकिन लंबे समय तक बैठने से पेल्विक फ्लोर पर लगातार दबाव बना रहता है। इससे एनल कैनाल में सूक्ष्म दरारें पड़ सकती हैं, जो काफी दर्दनाक होती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फोन को दूर रखना एक अच्छी आदत</h3>



<p>विशेषज्ञों का सुझाव है कि टॉयलेट में 5 मिनट से अधिक समय नहीं बिताना चाहिए। यदि इस समय में काम पूरा न हो, तो थोड़ी देर बाद दोबारा प्रयास करना बेहतर होता है। इसके साथ ही फोन को टॉयलेट से दूर रखना एक अच्छी आदत है, जिससे ध्यान भटकता नहीं है और प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्टूल रखने से बेहतर होता है एंगल</h3>



<p>इसके अलावा सही बैठने की मुद्रा भी महत्वपूर्ण है। पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखने से शरीर का एंगल बेहतर होता है, जिससे प्रक्रिया आसान हो सकती है। डॉक्टर पर्याप्त पानी पीने, फाइबर युक्त आहार लेने और शरीर के संकेतों को अनदेखा न करने की सलाह देते हैं।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/csk-big-blow-khalil-ahmed-ruled-out-of-ipl-2026-major-reason-revealed/">IPL 2026 : CSK को बड़ा झटका, खलील अहमद टूर्नामेंट से बाहर, यह बड़ी वजह आई सामने</a></p>



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