खेत-खलिहान

कम लागत में ज्यादा मुनाफा, करेला की खेती बन रही किसानों की पसंद

Karela Cultivation : बिहार के अररिया जिले के तैरासी गांव के किसान मोहम्मद अकरम करेला की खेती से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में करेला जल्दी तैयार हो जाता है, जिससे किसानों को कम समय में बाजार में बेचकर बेहतर लाभ मिल सकता है। गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें जहां लंबी अवधि लेती हैं, वहीं करेला कुछ ही हफ्तों में उत्पादन देने लगता है।

कम समय में तैयार, बाजार में अच्छी मांग

करेला एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती सीमित समय में पूरी हो जाती है और इसकी बाजार में मांग भी लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि किसान मुख्य फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। सरकार भी सब्जी खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान और योजनाएं उपलब्ध कराती है। कई किसान इसके लिए लोन लेकर भी खेती करते हैं।

पारंपरिक तरीके से मंडप तैयार कर खेती

किसान आमतौर पर देसी तकनीक का उपयोग करते हुए बांस और रस्सी की मदद से करेला के लिए मंडप तैयार करते हैं। इससे पौधों को सहारा मिलता है और उत्पादन बेहतर होता है।

50–60 दिनों में फल देने लगता है करेला

करेला की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेजी से बढ़ने वाली प्रकृति है। बुवाई के करीब 50 से 60 दिनों के भीतर यह फूल और फल देना शुरू कर देता है। इसके औषधीय गुणों के कारण भी इसकी मांग अधिक रहती है, खासकर शुगर के मरीजों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी

करेला में विटामिन A, B और C के साथ-साथ आयरन, पोटैशियम, जिंक, मैग्नीशियम, बीटा-कैरोटीन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी बनाते हैं।

कम खर्च में अच्छी आमदनी का जरिया

किसान मोहम्मद अकरम के अनुसार, आधे एकड़ जमीन में करेला की खेती पर लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक का खर्च आता है, जिसमें बीज, खाद और सिंचाई शामिल है। सही बाजार भाव मिलने पर इस फसल से 1 से 2 लाख रुपये तक की कमाई संभव है।

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