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फाजिल्का में पोटाश खोज के लिए नई परियोजना, 21 महीनों में 48 वर्ग किलोमीटर में ड्रिलिंग शुरू

Punjab News : पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल द्वारा पंजाब भर के सभी खनिज समृद्ध क्षेत्रों की तत्काल पहचान करने के मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाए जाने के बाद केंद्रीय खनन मंत्रालय के राष्ट्रीय खनिज खोज एवं विकास ट्रस्ट की परियोजना सैंकशनिंग कमेटी की 9 फरवरी, 2026 को हुई बैठक में ‘‘पंजाब के ज़िला फाजिल्का के चवाड़ियांवाली क्षेत्र में पोटाश के लिए खोज सर्वेक्षण जी-4’’ शीर्षक वाली नई खोज परियोजना को मंजूरी दे दी गई है.

इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि यह परियोजना मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा 21 महीनों की अवधि के अंदर 1903.11 लाख रुपये की अनुमानित लागत से 48.0 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू की जाएगी. उन्होंने बताया कि स्वीकृत योजना के अनुसार 9 महीनों बाद परियोजना की समीक्षा की जाएगी. पहले चरण में 3200 मीटर के ग्रिड अंतराल पर 5700 मीटर की कुल ड्रिलिंग सहित छह बोरहोल किए जाएंगे. समीक्षा के बाद पहचाने गए संभावित जोनों में दूसरे चरण के तहत 1600 मीटर के ग्रिड अंतराल पर 8550 मीटर की कुल ड्रिलिंग सहित नौ अतिरिक्त बोरहोल किए जाएंगे.

बरिंदर गोयल ने पंजाब में पोटाश खोज पर जोर दिया

उल्लेखनीय है कि पिछले जनवरी महीने में पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर गोयल ने गुजरात के गांधीनगर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय खनिज चिंतन सम्मेलन-2026 के दौरान पंजाब में पोटाश की खोज का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था, उन्होंने फाजिल्का जिले में पोटाश के संभावित स्रोतों की पहचान का मुद्दा उठाते हुए फील्ड सीज़न 2025-26 के दौरान ड्रिलिंग और भू-वैज्ञानिक मैपिंग के कार्यों में तेजी लाने के लिए भी कहा था.

पंजाब में पोटाश खोज को प्राथमिकता देने की अपील

इसी दौरान कैबिनेट मंत्री ने केंद्रीय एजेंसियों से अपील की थी कि पंजाब में पोटाश की खोज को प्राथमिकता दी जाए क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की भलाई से जुड़ा हुआ है, उन्होंने राज्य भर के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में विश्वसनीय तरीके से खनिज सूची तैयार करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग भी की थी.

फाजिल्का में पोटाश खोज के लिए सर्वेक्षण

पंजाब सरकार द्वारा खोज क्षेत्र के विस्तार के बारे में अनुरोध के बाद भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने फील्ड सीजन 2026-27 के दौरान फाजिल्का जिले के केरा-खेड़ा ब्लॉक और सईदवाला ब्लॉक में पोटाश के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण और कंधवाला-रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक खोज कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा है. इस कार्यक्रम के तहत पहचानी गई 15 संभावित स्थानों पर ड्रिलिंग की जानी है. कैबिनेट मंत्री ने मांग की कि राज्य के पोटाश स्रोत आधार को मजबूत करने के लिए सभी प्रस्तावित ब्लॉकों में कार्य, फील्ड सीजन 2026-27 की निर्धारित समय-सीमा के अंदर पूरे किए जाएं.

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और कृषि को मिलेगा लाभ

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पोटाश देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण और लाभकारी है क्योंकि इसकी लगभग 99 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी की जाती है और घरेलू खोज एवं खनन में किसी भी प्रगति से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को मज़बूती मिलेगी.

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