UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के भावुक होने का मामला सामने आया है. बीते गुरुवार को मेरठ दौरे के दौरान वह एक कवि सम्मेलन में शामिल हुए थे. कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम अचानक भावुक हो गए. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे गरीबों के दर्द को भली-भांति समझते हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं अपना बचपन गरीबी में बिताया है. ब्रजेश पाठक ने भावुक स्वर में यह भी कहा कि आज वे जिस पद पर हैं, उसके योग्य खुद को नहीं मानते और यह सब जनता के आशीर्वाद से संभव हो पाया है.
दरअसल, भाषण के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मंच पर ही भावुक होकर रो पड़े. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
बचपन की गरीबी याद कर भावुक हुए डिप्टी सीएम
भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “मैं गरीबों के दर्द को भली-भांति समझता हूं, क्योंकि मैंने खुद गरीबी देखी है। पढ़ाई के समय मेरे पास पूरे संसाधन नहीं होते थे. कभी पैंट होती थी तो जूते नहीं होते थे, कभी जूते होते थे तो चप्पल नहीं होती थी- दोनों चीजें एक साथ कभी नहीं होती थीं. जब पढ़ने के लिए बाहर गया तो मां ने स्टोव दे दिया, लेकिन मुझे आटा गूंथना नहीं आता था और मां तवा देना भूल गई थीं. ऐसे में मैं सीधे स्टोव के ऊपर ही रोटी सेंकता था. इसलिए मैं खुद को गरीबों से जुड़ा हुआ मानता हूं और उनके दुख को समझता हूं. आज जिस पद पर हूं, उसके योग्य खुद को नहीं मानता.
कई कार्यक्रमों में शिरकत कर किया संबोधन
वही, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मेरठ दौरे के दौरान कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मेरठ में नेताजी सुभाष जन्म दिवस समारोह समिति और पंवार वाणी फाउंडेशन की ओर से राष्ट्र नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की पावन स्मृति में ‘पराक्रम दिवस’ को समर्पित 129वीं जयंती पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कार्यक्रम को संबोधित किया.
फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन
इसके अलावा एक अन्य पोस्ट में उन्होंने बताया, “पी.एल. शर्मा स्मारक भवन, मेरठ में आजाद हिंद संघ द्वारा आयोजित नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी को समर्पित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया. यह प्रदर्शनी नेताजी के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा’ जैसे ओजस्वी विचारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है. नेताजी का जीवन हम सभी के लिए राष्ट्रसेवा, त्याग और आत्मसम्मान की प्रेरणा है.
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