Literature and Arts Festival : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने पंजाब कला परिषद, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित ‘महिंदर सिंह रंधावा साहित्य और कला उत्सव’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब शुरू से ही सभ्यता का केंद्र रहा है।
पंजाब कला परिषद अधिकारियों का धन्यवाद
उन्होंने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि हमें कठिन परिश्रम और साहस के साथ-साथ एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत मिली है। पंजाब कला परिषद के अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसी कोशिशें समय की मांग हैं ताकि हमारी युवा पीढ़ी को हमारी समृद्ध संस्कृति से परिचित करवाया जा सके।
आधुनिक पंजाब का बताया निर्माता
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह एक ऐसी शख्सियत को समर्पित है जिन्होंने पंजाब के लोगों के अंदर उम्मीद की किरण जगाई थी। डॉ. महिंदर सिंह रंधावा को दिल की गहराइयों से याद करते हुए, भगवंत सिंह मान ने उन्हें 1947 की देश के विभाजन के बाद आधुनिक पंजाब का निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि होशियारपुर जिले से संबंधित होने के कारण डॉ. रंधावा एक योग्य प्रशासक होने के साथ-साथ एक दार्शनिक भी थे।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रंधावा सूझ और सहनशीलता जैसे गुणों से परिपूर्ण थे और उन्हें पता था कि यदि किसी कौम का पेट खाली है तो वह लड़ नहीं सकती, लेकिन यदि उसकी आत्मा खाली है तो वह समाप्त हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए एक तरफ डॉ. रंधावा ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की और दूसरी तरफ उन्होंने पूरे पंजाब भर में चंडीगढ़ आर्ट गैलरी और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए।
हमारे मन में डॉ. रंधावा का नाम
भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब भी हम पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, किसानों, साहित्यकारों और 1947 के विभाजन के दौरान उजाड़े गए लोगों का साथ देने वाली शख्सियतों की बात करते हैं, तो हमारे मन में सिर्फ डॉ. रंधावा का नाम आता है।
‘अनाज’ और ‘किसान’ पर निर्भर हरित क्रांति
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में हरित क्रांति का श्रेय डॉ. रंधावा को जाता है और उन्होंने कहा कि उस समय उनकी दूरदर्शी सोच के कारण पंजाब ने भारत को अकाल से बचाया। डॉ. रंधावा का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि हरित क्रांति ‘अनाज’ और ‘किसान’ पर निर्भर करती है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज का यह समारोह कोई राजनीतिक सभा नहीं है, बल्कि यह पंजाबी मातृभाषा और भाषा के विकास का उत्सव है।
मातृभाषा को प्रोत्साहित करना चाहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा को हर माध्यम से प्रोत्साहित करना चाहिए, उन्होंने कहा कि इस नेक कार्य के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने उनके जीवन और करियर पर कविता, साहित्य, कला और संस्कृति के गहरे प्रभाव को भी याद किया। भगवंत सिंह मान ने संत राम उदासी, दविंद्र सत्यार्थी, रसूल हम्ज़ातोज़, नरिंदर कपूर, कीट्स, शिव कुमार बटालवी और कई अन्य महान हस्तियों को साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए याद किया।
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