Nagpur Cyber Fraud : साइबर ठग अब लोगों को फंसाने के लिए पुलिस के बड़े अधिकारियों की पहचान का भी इस्तेमाल करने लगे हैं. महाराष्ट्र के नागपुर से सामने आया एक मामला इस नए तरीके की गंभीरता दिखाता है. यहां ठगों ने पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल की तस्वीर और आवाज की नकल का सहारा लेकर एक व्यक्ति को वीडियो कॉल किया. खुद को पुलिस और जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर उसे कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया. इसके बाद डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उससे 1 करोड़ 40 लाख रुपये ठग लिए गए. हालांकि, नागपुर पुलिस की अपराध शाखा ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है.
जानकारी के मुताबिक, नागपुर के दीनदयाल इलाके में रहने वाले प्रवीर कुमार तालुकदार को ठगों ने निशाना बनाया था. आरोपियों ने उन्हें वीडियो कॉल किया, जिसमें पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया. उनकी आवाज की नकल भी की गई, जिससे पीड़ित को लगा कि वह किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से बात कर रहा है.
ठगों ने इसी भरोसे का फायदा उठाया, उन्होंने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाया. आरोपियों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए के प्रदीप जायसवाल के नाम का भी इस्तेमाल किया और लगातार दबाव बनाते रहे.
आरटीजीएस से निकलवाए 1.40 करोड़ रुपये
डर के माहौल में पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई. इस तरह आरोपियों ने कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपये अपने कब्जे में कर लिए.शिकायत मिलने के बाद नागपुर पुलिस की अपराध शाखा की साइबर सेल ने जांच शुरू की. तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने दिनेश अवभाई रावरिया और अरविंद कांजी गाला को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया.
इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. पुलिस ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है. किसी भी अनजान वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई या एनआईए का अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति पर बिना पुष्टि भरोसा न करें.
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