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Rajasthan Borewell Rescue : 23 घंटे बाद भी नहीं निकला 9 साल का भोमाराम, कैमरे में मूवमेंट बंद, बच्चे के ऊपर गिर रहा पानी

Rajasthan Borewell Rescue : राजस्थान के फलोदी जिले में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को निकालने का अभियान जारी है। हादसे के 23 घंटे बाद भी बच्चे को बाहर नहीं निकाला जा सका। कैमरे में उसका मूवमेंट दिखना बंद हो गया है। रास्ते में फंसा पत्थर और बोरवेल में भरता पानी बचाव दल की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

Rajasthan Borewell Rescue : राजस्थान के फलोदी जिले में नौ साल के भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को पूनियों की ढाणी में खेत पर स्थित बोरवेल में गिरा बच्चा करीब 640 फीट की गहराई पर फंसा बताया जा रहा है। बोरवेल की कुल गहराई लगभग 1,050 फीट है। बचाव दल और प्रशासन बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास में जुटे हैं।

कैमरा फंसने से बच्चे की निगरानी में परेशानी

बचाव अभियान के दौरान बोरवेल में कैमरा उतारकर बच्चे की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कैमरा करीब 30 फीट की गहराई पर फंस गया, जिससे बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखने में परेशानी आ रही है। लगातार चल रहे अभियान के बीच बोरवेल में पानी टपकने की सूचना भी सामने आई है। हालांकि, बच्चे की मौजूदा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

देसी विशेषज्ञों की मदद से रेस्क्यू की तैयारी

बच्चे को बाहर निकालने के लिए स्थानीय स्तर पर बोरवेल से बचाव का अनुभव रखने वाले मादाराम और उनकी टीम की मदद ली जा रही है। योजना के तहत लोहे के सरियों को जोड़कर एक विशेष जाल तैयार किया जा रहा है, जिससे बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया जा सके।

पत्थर हटाने के लिए बनाया गया विशेष उपकरण

रेस्क्यू ऑपरेशन में बोरवेल के भीतर फंसा पत्थर बड़ी बाधा बन रहा है। बताया गया है कि यह पत्थर बच्चे से लगभग 30 फीट ऊपर है, जिसके कारण पाइप और अन्य उपकरण नीचे पहुंचाने में मुश्किल हो रही है। इसे हटाने के लिए लोहे के एंगल जोड़कर पाइप जैसी संरचना वाला उपकरण तैयार किया गया है। इसकी मदद से पत्थर को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।

घटनास्थल पर मौजूद परिवार, पहुंचे चिकित्सा मंत्री

हादसे के बाद से बच्चे के परिजन और ग्रामीण घटनास्थल के पास मौजूद हैं और प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। रेस्क्यू अभियान की निगरानी के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी दी गई है। बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती रास्ते में फंसे पत्थर को हटाकर बच्चे तक पहुंचना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना है।

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