Ramesh Bidhuri : जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी का बयान नया विवाद खड़ा कर सकता है, रमेश बिधूड़ी ने प्रदर्शन में शामिल लोगों को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं और दावा किया कि वहां छात्रों की संख्या बहुत कम थी. उनका कहना था कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जिनका छात्रों से कोई संबंध नहीं था.
रमेश बिधूड़ी ने कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों में छात्र कम और बेरोजगार पंचर लगाने वाले तथा ताला-चाबी बनाने वाले ज्यादा थे, उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों बच्चों को बरगलाकर प्रदर्शन में इकट्ठा किया गया, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, वे असली छात्र नहीं हो सकते.
NEET आंदोलन पर भी उठाए सवाल
पूर्व सांसद ने कहा कि NEET के नाम पर हुए धरने में मृत बच्चों की तस्वीरें लगाकर अभिभावकों और लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया गया. रमेश बिधूड़ी के मुताबिक, प्रदर्शन में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस मांग नहीं थी और मुख्य मांग केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी.
रमेश बिधूड़ी ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन अपने घोषित उद्देश्य से भटक गया था, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने समय रहते मांगों को स्वीकार किया ताकि देश में भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो. उनका दावा था कि यह आंदोलन विपक्ष के सहयोग से देश में अव्यवस्था फैलाने की नीयत से चलाया गया.
15-20 प्रतिशत ही छात्र थे
पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोग भटके हुए थे और उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में केवल 15 से 20 प्रतिशत लोग ही छात्र थे. साथ ही आरोप लगाया कि वहां सीलमपुर, जाफराबाद, सहारनपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों से लोगों को लाया गया था तथा उन्हें टोपी पहनकर नहीं, बल्कि कलावा बांधकर आने के लिए कहा गया था.
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