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UP: जिसकी हत्या के मामले में दो लोग गए थे जेल, वही युवती हुई नोएडा से बरामद

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उत्तर प्रदेश के भदोही से आश्चर्यजनक मामला सामने आया है। जिसने पुलिस पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल, मई 2022 में एक किशोरी की हत्या के जुर्म में पुलिस ने दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। वह किशोरी नोएडा से भली चंगी बरामद कर ली गई है। बता दें कि श्यामकिशोर पाण्डेय पुत्र रंगलाल पाण्डेय निवासी सीखापुर थाना गोपीगंज भदोही के रहने वाले हैं। उन्होंने 16 मई 2022 को लिखित सूचना दी कि उसकी नाबालिग पुत्री उम्र करीब 17 वर्ष 14 मई 2022 को घर से शौच के लिए निकली वापस नहीं आयी। सूचना के आधार पर थाना स्थानीय पर मुअसं 143/22 धारा 363 भादवि का अभियोग पंजीकृत कर अपहृता की सकुशल बरामदगी हेतु प्रयास कर रही थी।

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इसी दौरान 27 मई 2022 को ऊंज थाना क्षेत्र के मोहनपुर (सोबरी) गांव के सिवान कुएं से एक अज्ञात लड़की का शव बरामद हुआ। अपहृत बताने वाले सीखापुर निवासी परिजनों शव की पहचान अपने अपहृत पुत्री के रूप में की थी और कस्तूरीपुर गांव निवासी रामचंद्र व प्रदीप कुमार सेठ पुत्र मेहीलाल पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। परिजनों ने शव सड़क पर रखकर न्याय की गुहार भी लगाई थी। पीड़ित परिवार के लिए न्याय और आर्थिक मदद के लिए मुहिम भी चलाई गई थी। मृतका के घर संवेदना व्यक्त करने गए कई नेताओं व समाजसेवियों ने आर्थिक सहायता भी दी थी। वहीं पुलिस ने शव पोस्टमार्टम जांच कराने के साथ दोनों नामजद आरोपियों को हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

एक आरोपी को करीब साढ़े 4 माह तो दूसरे को करीब 7 महीने में हाईकोर्ट से जमानत मिली। मृतका का शव पूर्ण रुप से पहचान में नही आ रहा था, संदेह होने के फलस्वरुप मृतका के सही पहचान हेतु पुलिस ने उसके माता पिता के डीएनए परीक्षण मिलान हेतु उसके माता- पिता का ब्लड सेम्पल लेकर विधिविज्ञान प्रयोगशाला गोरखपुर भेजा था। हालांकि वह रिपोर्ट 9 माह बाद भी अभी नही आ सकी है। वहीं पुलिस लगातार इस मामले में पड़ताल कर रही थी। कई बार पुलिस अधीक्षक ने जांच के लिेए टीमें भी बदलीं। आखिरकार लम्बे समय के गहन पड़ताल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के बाद पुलिस ने 17 वर्षीय किशोरी को नोएडा से बरामद किया। एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि नाबालिगा का कहना है कि वह घर से प्रताड़ित होने पर अपनी इच्छा से चली गई थी। पुलिस ने झूठी पहचान व गलत सूचना देने और निर्दोषों को फंसाने के जुर्म में किशोरी के माता-पिता के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस जो शव बरामद हुआ था, उस सम्बंध में भी छानबीन कर रही है।

वहीं एसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान बरामदशुदा अपहृता द्वारा बताया गया कि वह काफी दिनों से अपने मां बाप से सम्पर्क में थी। मां बाप द्वारा षडयन्त्र के तहत बताया गया कि किसी भी समय पुलिस को जानकारी होगी तो पुलिस को बताना है कि आशीष पाण्डेय , ललित पाण्डेय , प्रदीप सेठ , डान मलिया , विष्णु कहार , बाबा मिश्रा द्वारा बाप का झूठा एक्सीडेंड की सूचना बताकर चार पहिया गाड़ी में बैठाकर हाथ पैर मुह बांधकर मारते पीटते हुए वाराणसी हाईवे पर फेकने की बात बताने हेतु बताया गया। बरामदशुदा नाबालिक के परिजनों को जानकारी थी कि उसकी पुत्री नोएडा में रह रही है। परिजनों द्वारा थाना स्थानीय पर साक्ष्य को छिपाते हुए झूठी सूचना लिखा कर नामजद आरोपीयों के विरुद्ध मिथ्या आरोप लगाकर मिथ्या साक्ष्य दिया गया।

वहीं फर्जी हत्या के मामले में जेल भेजे गए पीड़ित कैमरे पर रोने लगे। उनका व परिजनों का कहना है कि उन्हें फर्जी ढंग से फंसाया गया। वह बार-बार कहते रह गए वह निर्दोष हैं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नही सुनी, और तमाम यातनाएं भी दीं। कहीं न कहीं पुलिस की जांच पड़ताल भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि साजिश करने वाले व मान सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले पर ऐसी कार्रवाई हो, भविष्य में ऐसा करने से पहले लोगों को सौ बार सोचना पड़े।

(भदोही से रामकृष्ण पाण्डेय की रिपोर्ट)

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