पुलिस सिस्टम का एक ऐसा ग्रुप जो 742 जिलों के बदमाशों पर कस रहा नकेल

पुलिस सिस्टम…। एक ऐसा सिस्टम जो ब्रिटिश राज में बना और अब तक चल रहा है। पुलिस सिस्टम जहां इलाके को लेकर पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई ना करने की बातें आम हैं। जहां ज्यूरिस्डिक्शन(अपने इलाके) को लेकर पुलिसवाले अक्सर आपस में ही उलझते रहते हैं। इसी सिस्टम में चंद पुलिसवालों ने एक ऐसा सामानांतर सिस्टम खड़ा कर लिया, जिसमें पूरे देश की पुलिस एक हो गई है। मैं इसी सिस्टम की कहानी लेकर हाजिर हूं।

बड़ा होता पुलिस सिस्टम

पुलिस का यह सिस्टम सोशल मीडिया पर खड़ा हो गया है। पुलिस विभाग में यह सिस्टम नेशनल पुलिस ग्रुप के नाम से जाना जाता है। यह पुलिस सिस्टम देश भर के 28 स्टेट, 8 केंद्र-शासित प्रदेश, 742 जिले और 15700 पुलिस थानों तक फैला हुआ है। वर्तमान में नेशनल पुलिस ग्रुप के 13 हजार सदस्य हैं। इनमें 500 से अधिक महिलाएं हैं।

कांस्टेबल से लेकर डीजीपी तक इस ग्रुप के सदस्य हैं। अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने वाले इस ग्रुप की परिकल्पना दिल्ली पुलिस के एसीपी राजपाल डबास, एसीपी (यूपी पुलिस) विनोद सिंह सिरोही, इंस्पेक्टर (उत्तराखंड) हरपाल सिंह ने की थी।

हम पंछी एक डाल के नाम से बना व्हाट्सएप ग्रुप

हम पंछी एक डाल के नामक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। बाद में सदस्यों की संख्या बढ़ती गई तो हरियाणा पुलिस के यशवंत,सुरेंद्र, केवल सिंह और महाराष्ट्र पुलिस के श्रीराम घोडके आदि भी सक्रिय हुए औऱ टेलीग्राम एप्प पर इस ग्रुप का संचालन शुरू हुआ। समूह आपसी विश्वास के सिद्धांत पर काम करता है और सदस्यों से एक-दूसरे की हरसंभव मदद करने की अपेक्षा की जाती है। समूह में कई सुपरकॉप औऱ एक्सपर्ट हैं।

साल 2014 में 50 पुलिस अफसरों के साथ यह ग्रुप शुरू हुआ था। इस ग्रुप में ना केवल पुलिस के बल्कि सीबीआई, साइबर एक्सपर्ट, आईबी, मिलिट्री इंटेलीजेंस, एनसीबी, एनएचआरसी, एनएचएआई, सेना, कस्टम, नेवी, एयरफोर्स,  सभी पैरामिलिट्री फोर्स, एनआईए,डीआरआई, रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी, तकनीकी एकस्पर्ट, नेपाल पुलिस औऱ मिसिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं।

नेशनल के अलावा सभी राज्यों और सुरक्षा बलों में भी अलग से ग्रुप बनाए गए है। इसके अलावा क्राइम और क्रिमिनल के तौर तरीकों पर आधारित ग्रुप भी इसी बैनर के अंतर्गत बनाए गए हैं। ग्रुप के सदस्यों को संबंधित राज्य से मदद के लिए प्रशंसा पत्र देने का रिवाज भी इस ग्रुप में है। ग्रुप के सदस्यों में आपसी तालमेल बना रहे इसके लिए हर साल एक गेट-टूगेदर का आयोजन भी किया जाता है।

जहां ग्रुप के सदस्य अपराध और आपराधिक सूचनाओं या डाटा को साझा करते हैं।

इसी तरह महिलाओं के लिए भी अलग से ग्रुप काम कर रहा है जिसमें सभी राज्यों से सिपाही से आईजी स्तर तक की 500 महिलाएं हैं। यहां ग्रुप एडमिन ना होकर एडमिन का समूह होता है। सभी राज्यों औऱ केंद्रशासित प्रदेश से 4-5 लोगों को एडमिन बनाया जाता है। इसके तहत एक कोर ग्रुप भी है जो फैसले लेने का काम करता है। इसी तरह ये ग्रुप फेसबुक पर भी काम करता है। फेसबुक पर इस समय इसके 54 सौ से ज्यादा सदस्य हैं।

हर गुजरते दिन के साथ, समूह बड़ा और बड़ा होता जा रहा है, और आने वाले समय में,इसका महत्व और उपयोगिता कैसी होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

देश की सीमा से निकलकर इस ग्रुप के सदस्य नेपाल तक पहुंच गए हैं। नेपाल पुलिस के साथ साथ ग्रुप में एनसीबी, एमआईए, आईबी, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी, आरपीएफ, असम राइफल्स, एयरफोर्स, सेना आदि के जवान और अधिकारी भी इसके सदस्य हैं। जब भी ग्रुप का कोई सदस्य किसी दूसरे इलाके में पुलिसिया कार्रवाई के लिए जाता है ग्रुप के सदस्य उसकी मदद करते हैं। विशेष हालातो में मदद के लिए इस ग्रुप में विभिन्न क्षेत्रों में एक्सपर्ट सीविलियन को भी शामिल किया गया है।

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