Bombay High Court EPFO Decision : कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक अहम अपडेट है। हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि केंद्र सरकार EPF पर मिलने वाले ब्याज को 10% तक बढ़ा सकती है। हालांकि, सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
फंड की वार्षिक कमाई पर निर्भर
सरकार ने संसद में लिखित उत्तर देते हुए कहा कि EPF की ब्याज दरें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज द्वारा तय की जाती हैं। यह दर फंड की वार्षिक कमाई पर निर्भर करती है। मौजूदा ब्याज दरें अभी भी बाजार की अन्य बचत योजनाओं की तुलना में सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी हैं।
पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक
वित्त वर्ष 2023-24 में EPF पर ब्याज दर 8.25% तय की गई थी, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है। पिछले वर्षों में ब्याज दरें इस प्रकार रही हैं- 2022-23 में 8.15%, 2021-22 में 8.10%, और 2020-21 में 8.50%।
आय और देनदारियों के बीच संतुलन
ब्याज दर को 10% तक बढ़ाने की मांग बढ़ती महंगाई और बेहतर रिटर्न की उम्मीद के कारण उठी थी। कई कर्मचारी संगठन चाहते थे कि EPF निवेशकों को अधिक लाभ दे, लेकिन सरकार ने कहा कि फंड की आय और देनदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
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