Marco Rubio India Visit : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने भारत में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां के राजनीतिक मुद्दों का फैसला भारतीयों को ही करना चाहिए। मैं भारत के आंतरिक मामलों में दखल नहीं दूंगा। यह एक लोकतांत्रिक देश है।
UN के विशेषज्ञों पर रुबियो ने क्या कहा?
भारत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की चिंता पर रुबियो से सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने ‘UN एक्सपर्ट्स’ शब्द पर तंज कसते हुए सवाल किया कि क्या यह अपने आप में विरोधाभास नहीं है।
रुबियो ने कहा कि वह भारत की घरेलू राजनीति में दखल नहीं देना चाहते। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में चुनाव और राजनीतिक विचारों को व्यक्त करने की आजादी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और तोड़फोड़, आगजनी या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
भारत में प्रदर्शनों को लेकर UN ने जताई थी चिंता
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भारत में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई पर चिंता जताई थी। 20 अक्टूबर को जारी बयान में विशेषज्ञों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच कराने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने की मांग की।
विशेषज्ञों ने लाठीचार्ज, सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख किया। ये आरोप विशेषज्ञों की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं पर आधारित हैं- इन्हें सभी मामलों में साबित हो चुके तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
इससे पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इन टिप्पणियों पर विरोध दर्ज कराया था। भारतीय राजनयिक बरखा ताम्राकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि मानवाधिकारों के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए।
भारत ने कहा कि देश के संवैधानिक प्रावधान नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की सुरक्षा करते हैं। भारतीय पक्ष ने अपुष्ट आरोपों और भारत से संबंधित ठोस जानकारी के अभाव में तैयार रिपोर्टों के आधार पर देश की छवि पेश करने पर भी आपत्ति जताई। भारत का कहना है कि मानवाधिकारों से जुड़े मामलों का आकलन निष्पक्ष और प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
भारत ने दूसरे देशों में प्रदर्शनों पर रवैये का मुद्दा भी उठाया
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र के रुख में कथित अंतर का मुद्दा भी उठाया गया। भारतीय पक्ष ने फ्रांस और यूरोप के अन्य हिस्सों में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क की टिप्पणियों का हवाला देते हुए सवाल किया कि अलग-अलग देशों में ऐसी घटनाओं पर समान मानदंड अपनाए जा रहे हैं या नहीं।
भारत ने दोहराया कि किसी देश में मानवाधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी करते समय तथ्यों, विश्वसनीय साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
लोकतंत्र और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बहस जारी
मार्को रुबियो के बयान में भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की बात प्रमुख रही। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और कथित पुलिस कार्रवाई की जांच पर जोर दिया है। भारत ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित आकलन की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम में भारत की संप्रभुता, लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों को लेकर अलग-अलग पक्षों के विचार सामने आए हैं।
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