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	<title>Health News Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>पंजाब में सांस की बीमारी पर बड़ा अपडेट, 6 महीने में 14 हजार से ज्यादा मरीजों को मिला कैशलेस इलाज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-respiratory-disease-cashless-treatment-14032-patients-chief-minister-health-scheme/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 08:31:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
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		<category><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana : सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खांसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और सीने में घरघराहट को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियां चढ़ना भी कठिन न हो जाए। तब तक अनेक मरीज फेफड़ों की &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhyamantri Sehat Yojana :</strong> सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खांसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और सीने में घरघराहट को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियां चढ़ना भी कठिन न हो जाए। तब तक अनेक मरीज फेफड़ों की गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो चुके होते हैं, जिसके उपचार के लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इलाज कराने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के अंतर्गत पंजाब के ताजा उपचार संबंधी आंकड़े बताते हैं कि फेफड़ों की पुरानी बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने वाले मरीजों का बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से संबंधित है, जो यह दर्शाता है कि श्वसन संबंधी बीमारियां स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ा रही हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दवाओं और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं। जितनी जल्दी इनकी पहचान हो जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतनी ही आसानी से रोका जा सकता है। दवाओं और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है, जबकि गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवनरक्षक साबित हो सकती है। ऐसे मामलों में उपचार में देरी करना कभी भी उचित नहीं होता। दुर्भाग्यवश, उपचार का खर्च वहन न कर पाने के कारण अनेक मरीज इलाज टालते रहते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सर्जरी/श्वसन संबंधी उपचार का लाभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/श्वसन संबंधी उपचार का लाभ प्राप्त किया। इन उपचारों पर 37.30 करोड़ रूपये की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया। इन आंकड़ों के पीछे उन हजारों मरीजों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी। यही इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बच्चों ने भी प्राप्त किया श्वसन संबंधी उपचार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आंकड़ों के अनुसार 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार के मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया। ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के अंतर्गत हुए कुल श्वसन संबंधी उपचारों के 80 प्रतिशत से अधिक मामलों में शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी श्वसन संबंधी उपचार प्राप्त किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;अन्य&#8217; लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थी भी शामिल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लिंग आधारित आंकड़ों के अनुसार 8,345 पुरुषों का 22.79 करोड़ रूपये की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को 14.50 करोड़ रूपये के उपचार का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त &#8216;अन्य&#8217; लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के अंतर्गत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जटिल और महंगे श्वसन संबंधी उपचार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष श्वसन संबंधी सेवाओं की मांग लगातार बनी रही। उपचार के मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों में सर्वाधिक रही। हालांकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार पर कुल 6.73 करोड़ रूपये खर्च किए गए, जो सबसे अधिक था। इससे स्पष्ट होता है कि योजना के अंतर्गत अधिक जटिल और महंगे श्वसन संबंधी उपचार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सांस फूलने की समस्या ना करें नज़रअंदाज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ये आंकड़े श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। लोग लगातार रहने वाली खांसी या सांस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या अथवा बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दुर्भाग्यवश, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती हैं। जब तक अनेक मरीज चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंच चुकी होती है। सांस फूलने की समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से फेफड़े, जीवन और आजीविका- तीनों को बचाया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा श्वसन संबंधी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर भी जोर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">समय पर बीमारी की पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/punjab-jails-free-medical-facility-aam-aadmi-clinic-new-health-model/">जेलों में अब मिलेगी फ्री मेडिकल सुविधा, पंजाब सरकार ने शुरू किया नया हेल्थ मॉडल</a></p>



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		<item>
		<title>मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 2300 Diabetes रोगियों का कैशलेस इलाज, उपचार पर 6.5 करोड़ रुपये खर्च</title>
		<link>https://hindikhabar.com/mukhmantri-sehat-yojana-2300-diabetes-patients-cashless-treatment-6-5-crore-spent/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:43:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Diabetes Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab Government]]></category>
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		<category><![CDATA[Sehat Yojana]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhmantri Sehat Yojana : मधुमेह कभी किसी चिकित्सकीय आपातकाल के रूप में सामने नहीं आती। आम तौर पर इसकी शुरुआत बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—जैसे बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना, बिना किसी कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhmantri Sehat Yojana :</strong> मधुमेह कभी किसी चिकित्सकीय आपातकाल के रूप में सामने नहीं आती। आम तौर पर इसकी शुरुआत बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—जैसे बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना, बिना किसी कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। इन शुरुआती लक्षणों को अक्सर तब तक नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जब तक कि हालत इतनी गंभीर न हो जाए कि अस्पताल में भर्ती होने, आईसीयू में इलाज, सर्जरी या डायलिसिस की आवश्यकता पड़ जाए। </p>



<p class="wp-block-paragraph">समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और उचित प्रबंधन ही मधुमेह की गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के ताज़ा स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि मधुमेह अब सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। यह तेज़ी से कामकाजी वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे परिवारों, नियोक्ताओं और स्वास्थ्य प्रणाली पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे मधुमेह के मामले</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के अनुसार असंतुलित आहार, जंक और प्रोसेस्ड भोजन, मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, मोटापा, तम्बाकू और शराब के सेवन के कारण दुनिया भर में मधुमेह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक काम करना, नींद पूरी न होना और लगातार तनाव ने भी इस बीमारी के खतरे को और बढ़ा दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी…</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही स्वास्थ्य योजना के तहत स्टेट हेल्थ एजेंसी (एस.एच.ए.), पंजाब द्वारा 21 जुलाई 2026 तक साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मधुमेह से संबंधित 2300 उपचार मामलों पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये (6,49,99,151.6 रुपये) खर्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों के सबसे अधिक 1123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 और 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मधुमेह तेज़ी से पंजाब की आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि इसका प्रभाव कम आयु वर्ग के लोगों पर भी नज़र आ रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इलाज के लिए सबसे अधिक दावे दर्ज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उपचार संबंधी आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अधिकांश मरीज़ गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। रक्त में शर्करा का स्तर बहुत अधिक होने के कारण उत्पन्न होने वाली जानलेवा स्थिति डायबिटिक कीटोएसिडोसिस के इलाज के लिए सबसे अधिक दावे दर्ज किए गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर स्थिति</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय तक मधुमेह के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं को होने वाली क्षति से उत्पन्न डायबिटिक फुट उपचार की दूसरी सबसे प्रमुख स्थिति के रूप में सामने आया। कई मरीजों को डायलिसिस, रक्त चढ़ाव, सीटी और एमआरआई जांच, आईसीयू और डायबिटिक फुट सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जो अस्पताल में भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऐसे लोग जो जीवन के अंतिम पड़ाव…</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आंकड़े हर परिवार के लिए एक चेतावनी हैं। उन्होंने कहा, &#8220;ये ऐसे लोग नहीं हैं जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। ये प्रदेश की कामकाजी आबादी है—ऐसे लोग जो अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, व्यवसाय चला रहे हैं, कर्ज (लोन) चुका रहे हैं और अपने वृद्ध माता-पिता का सहारा बने हुए हैं।&#8221; उन्होंने कहा कि जब मधुमेह इस आयु वर्ग के लोगों को अस्पताल तक पहुंचा देती है, तो इसका प्रभाव सिर्फ मरीज़ तक सीमित नहीं रहता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लोगों की जान तो बचा सकते हैं अस्पताल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मधुमेह के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और नियमित रूप से रक्त शर्करा की जांच करवाएं। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, &#8220;मधुमेह की जटिलताओं का इलाज करवाने की तुलना में इसकी रोकथाम कहीं अधिक आसान है। बीमारी के गंभीर होने का इंतज़ार न करें। अस्पताल लोगों की जान तो बचा सकते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण खोए हुए साल वापस नहीं ला सकते।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तम्बाकू और शराब का अत्यधिक सेवन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जहां एक ओर पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार का खर्च उठाकर मरीजों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर जांच, नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तम्बाकू और शराब के अत्यधिक सेवन से बचना मधुमेह और इससे होने वाली गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मधुमेह संबंधी आंकड़े क्या बताते हैं-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में मधुमेह से संबंधित सबसे अधिक 1123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 और 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">21 जुलाई 2026 तक पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मधुमेह से संबंधित 2300 उपचार मामलों पर लगभग 6.5 करोड़ रुपये (6,49,99,151.6) खर्च किए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मधुमेह की गंभीर स्थिति को दर्शाने वाला डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक प्राप्त किया जाने वाला उपचार पैकेज रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय से नसों और रक्त वाहिकाओं को हुई क्षति का संकेत देने वाला डायबिटिक फुट दूसरी सबसे बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अनेक मरीजों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, रक्त चढ़ाव, सीटी/एमआरआई जाँच और डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हुईं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/cjp-protest-33rd-day-sonam-wangchuk-letter-to-government-ready-to-end-hunger-strike/">CJP प्रदर्शन का 33वां दिन, सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी, बच्चों पर कार्रवाई नहीं करने की मांग, वांगचुक अनशन तोड़ने को तैयार</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत युवा वयस्कों ने करवाया सबसे अधिक कैशलेस हृदय उपचार, 135 मरीज़ों को 2.71 करोड़ रुपये के उपचार का लाभ</title>
		<link>https://hindikhabar.com/mukhyamantri-sehat-yojana-cashless-heart-treatment-benefit-135-patients-punjab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 06:58:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Cashless treatment]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[heart health]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab Health]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana : फाज़िल्का ज़िले के 58 वर्षीय मनजीत सिंह कई सप्ताह तक सीने में हो रही तकलीफ़ को सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ करते रहे। लेकिन जब सीने में उठने वाला दर्द बार-बार होने लगा और थोड़ी दूर चलने पर भी बेचैनी महसूस होने लगी, तो उन्होंने चिकित्सकीय जांच करवाई। जांच में पता चला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhyamantri Sehat Yojana :</strong> फाज़िल्का ज़िले के 58 वर्षीय मनजीत सिंह कई सप्ताह तक सीने में हो रही तकलीफ़ को सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ करते रहे। लेकिन जब सीने में उठने वाला दर्द बार-बार होने लगा और थोड़ी दूर चलने पर भी बेचैनी महसूस होने लगी, तो उन्होंने चिकित्सकीय जांच करवाई। जांच में पता चला कि उनके हृदय की एक कोरोनरी धमनी में रुकावट है और तत्काल उपचार की आवश्यकता है। कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें कैथेटराइजेशन लैब में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाला और उनके हृदय में रक्त प्रवाह को सामान्य कर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हृदय चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मनजीत सिंह का मामला समय पर उपचार के महत्त्व को उजागर करता है, वहीं आधिकारिक आंकड़े यह भी बताते हैं कि हृदय संबंधी बीमारियां बड़ी संख्या में युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवा वयस्कों ने कैशलेस हृदय उपचार प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की है। यह युवाओं में समय पर जांच और विशेषज्ञ हृदय चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता के महत्त्व को दर्शाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समय रहते पहचानकर तुरंत उपचार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हृदय रोग प्रायः बिना किसी चेतावनी के नहीं आता। लगातार सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या दर्द का हाथों, जबड़े अथवा पीठ तक फैलना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। लेकिन अक्सर लोग इन लक्षणों को तब तक नज़रअंदाज़ करते रहते हैं, जब तक स्थिति गंभीर चिकित्सा आपातकाल का रूप नहीं ले लेती। चिकित्सकों का कहना है कि इन चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानकर तुरंत उपचार करवाने से जीवन बचाने और हृदय को स्थायी क्षति से बचाने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में हुई प्रगति</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में यह चुनौती लगातार बढ़ रही है। इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, पिछले तीन दशकों में हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग देश में बीमारी और मृत्यु का प्रमुख कारण बन चुके हैं। तेज़ शहरीकरण, निष्क्रिय जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तंबाकू सेवन, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों ने इस समस्या को और गंभीर बनाया है। हालांकि हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में हुई प्रगति से मरीज़ों के बचने की संभावना बढ़ी है, लेकिन उपचार की ऊंची लागत आज भी अनेक परिवारों के लिए जीवनरक्षक उपचार को पहुँच से बाहर कर देती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इलाज टालने के बजाय समय पर उपचार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मनजीत सिंह जैसे मरीज़ों के लिए सबसे बड़ी चुनौती चिकित्सकीय नहीं, बल्कि आर्थिक थी। पंजाब में ऐसे अनेक परिवार, जिन्हें हृदय संबंधी आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर उपचार प्राप्त कर रहे हैं। यह योजना पात्र मरीज़ों के हृदय संबंधी उपचार का पूरा ख़र्च वहन करती है। अस्पताल के भारी-भरकम बिलों का बोझ हटाकर यह योजना मरीज़ों को आर्थिक मज़बूरी के कारण इलाज टालने के बजाय समय पर उपचार करवाने में सक्षम बना रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता</h3>



<p class="wp-block-paragraph">योजना के प्रभाव का आकलन राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा जारी आंकड़ों से भी होता है। 15 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 135 मरीज़ों का कैशलेस हृदय उपचार किया जा चुका है, जिनके उपचार पर 2.71 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। इन उपचारों में जन्मजात हृदय दोष, हृदय वाल्व संबंधी विकारों तथा अन्य जटिल हृदय रोगों की सर्जरी शामिल हैं। ये आंकड़े विशेषज्ञ हृदय चिकित्सा सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाते हैं तथा यह भी स्पष्ट करते हैं कि समय पर जीवनरक्षक उपचार सुनिश्चित करने में आर्थिक सहायता कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समय पर जांच और तुरंत चिकित्सकीय मदद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि हृदय रोग आज सबसे गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है, लेकिन जागरूकता, समय पर जांच और तुरंत चिकित्सकीय मदद के माध्यम से अनेक मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे लगातार सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या अन्य चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना जीवन बचा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लागत की चिंता किए बिना चिकित्सा उपलब्ध</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा, “किसी भी परिवार को आर्थिक तंगी के कारण जीवनरक्षक हृदय उपचार में देरी करने के लिए मज़बूर नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पात्र मरीज़ों को उपचार की लागत की चिंता किए बिना सही समय पर गुणवत्तापूर्ण हृदय चिकित्सा उपलब्ध हो। समय पर जांच और उपचार जीवन बचाते हैं और हमारी प्रतिबद्धता है कि पंजाब के प्रत्येक पात्र परिवार तक ऐसी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">बड़ी संख्या में उपचार की आवश्यकता</h3>



<p class="wp-block-paragraph">माय हॉस्पिटल, मोहाली (इंडस नेटवर्क हॉस्पिटल) के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख एवं कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. करनदीप सिंह सयाल ने कहा, “हृदय रोग आज भी देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। जन्मजात हृदय दोष और अन्य जटिल हृदय रोगों के मामलों में बड़ी संख्या में उपचार की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि समय पर जाँच और उपचार से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">हृदय के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. करनदीप सिंह सयाल ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा मिलने से मरीज़ बिना देरी किए उपचार करवाने के लिए आगे आते हैं, जिससे उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं और मरीज़ जल्दी स्वस्थ होते हैं। उन्होंने कहा, “इसके साथ ही,रोकथाम हमारी सबसे मज़बूत सुरक्षा है। हृदय के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना तथा समय-समय पर हृदय की जांच करवाना गंभीर हृदय रोगों के ख़तरे को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">तसल्ली इस बात की समय पर इलाज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आज मनजीत सिंह अपने परिवार के साथ स्वस्थ जीवन जी रहे हैं और इस बात के लिए आभारी हैं कि उनका चिकित्सकीय संकट आर्थिक संकट में नहीं बदला। उनकी कहानी पंजाब के उन अनेक लोगों की कहानी है, जिन्हें इस योजना के तहत समय पर हृदय संबंधी उपचार मिल सका है। मनजीत सिंह ने कहा, “सबसे बड़ी तसल्ली सिर्फ़ इस बात की नहीं है कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, बल्कि इस बात की है कि समय पर इलाज मिलेगा या नहीं, यह हमारी आर्थिक क्षमता पर निर्भर नहीं करता।”</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/jacqueline-fernandez-jugni-song-controversy-wardrobe-malfunction-issue/">जैकलीन फर्नांडिस के गाने ‘जुगनी’ पर विवाद, वार्डरोब मालफंक्शन को लेकर उठे सवाल, बढ़ा विवाद</a></p>



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		<title>युवाओं के पैरों में दर्द और सूजन क्यों बढ़ रही है? डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले कारण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/youth-leg-pain-swelling-doctor-reveals-shocking-reasons-increase-causes-health-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:29:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Doctor Advice]]></category>
		<category><![CDATA[Fitness Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Knee Pain]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Leg Pain]]></category>
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					<description><![CDATA[Health News : आजकल कई युवाओं में पैरों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने पर पैरों का साथ न देना और कमजोरी महसूस होना आम बात होती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार इसका मुख्य कारण पैरों की मांसपेशियों और &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Health News : </strong>आजकल कई युवाओं में पैरों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने पर पैरों का साथ न देना और कमजोरी महसूस होना आम बात होती जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार इसका मुख्य कारण पैरों की मांसपेशियों और नसों का कमजोर होना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पैरों की नसों को पहुंचाता है नुकसान</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. राजीव परख के अनुसार इसके पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। चाहे सिगरेट हो, बीड़ी, गुटखा या अन्य किसी रूप में तंबाकू, यह पैरों की नसों को नुकसान पहुंचाता है। इससे नसें सख्त और संकरी हो जाती हैं, जिससे खून का प्रवाह कम हो जाता है और पैरों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा, अत्यधिक वजन बढ़ना भी एक बड़ा कारण है। जंक फूड, तला-भुना खाना और अधिक कोलेस्ट्रॉल वाली चीजें शरीर का वजन बढ़ाती हैं, जिससे पैरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और सूजन की समस्या बढ़ जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विटामिन B12 व विटामिन D की कमी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बहुत कम शारीरिक गतिविधि भी पैरों को कमजोर करती है। लंबे समय तक बैठे रहने या कम चलने-फिरने से पैरों की मांसपेशियां सुस्त हो जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है। इससे धीरे-धीरे पैरों में दर्द और कमजोरी बढ़ने लगती है। गलत जूते पहनना और शरीर में विटामिन B12 व विटामिन D की कमी भी हड्डियों और मांसपेशियों को कमजोर कर देती है। इससे पैरों की बनावट और संतुलन पर भी असर पड़ता है, जिससे चलने में परेशानी हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय तक पैरों को नीचे लटकाकर बैठना भी नुकसानदायक होता है, क्योंकि इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और पैरों में भारीपन महसूस होने लगता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कैल्शियम युक्त भोजन पैरों की सेहत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इन समस्याओं से बचने के लिए रोजाना 30 से 40 मिनट टहलना फायदेमंद माना जाता है। नियमित वॉक से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सूजन कम होती है। वजन को नियंत्रित रखना, पौष्टिक आहार लेना और तले हुए भोजन से बचना भी जरूरी है। हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और कैल्शियम युक्त भोजन पैरों की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं। साथ ही आरामदायक जूते पहनना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठना भी पैरों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer :</strong> यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, डाइट बदलाव या फिटनेस शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। यह लेख किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/vaibhav-suryavanshi-entry-team-india-masterplan-after-defeat-15-year-old-debut-ind-vs-eng-t20-series/">वैभव सूर्यवंशी की एंट्री से बदलेगा पूरा खेल, करारी हार के बाद भारत का मास्टरप्लान, 15 साल का लड़का करेगा डेब्यू?</a></p>



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		<item>
		<title>लीची खाने से हो सकता है बड़ा नुकसान! जानिए कौन लोग बिल्कुल न खाएं</title>
		<link>https://hindikhabar.com/lychee-side-effects-who-should-avoid-eating-it-health-warning/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 12:02:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Diet Care]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Eating]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Lychee]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Fruit]]></category>
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					<description><![CDATA[Health News : गर्मियों के मौसम में दो फलों का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं- आम और लीची। खासकर लीची, जो अपने मीठे और रसदार स्वाद के कारण काफी पसंद की जाती है। यह फल मई-जून के दौरान बाजार में खूब मिलता है और लोग इसे बड़े शौक से खाते हैं। हालांकि लीची जितनी &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Health News :</strong> गर्मियों के मौसम में दो फलों का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं- आम और लीची। खासकर लीची, जो अपने मीठे और रसदार स्वाद के कारण काफी पसंद की जाती है। यह फल मई-जून के दौरान बाजार में खूब मिलता है और लोग इसे बड़े शौक से खाते हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि लीची जितनी स्वादिष्ट है, उतनी ही इसके फायदे और कुछ नुकसान भी हैं। कुछ लोगों के लिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी होता है, क्योंकि गलत तरीके से या अधिक मात्रा में खाने पर यह सेहत पर असर डाल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लीची खाने के फायदे</strong></p>



<h3 class="wp-block-heading">शरीर को रखती है हाइड्रेट-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लीची में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे गर्मी के मौसम में यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है और डिहाइड्रेशन से बचाव करती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पाचन में मददगार-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। यह कब्ज की समस्या में राहत देने में सहायक हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इम्युनिटी को मजबूत करती है-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लीची में विटामिन-सी, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">त्वचा के लिए फायदेमंद-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण भी कम दिखाई देते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लीची खाने के नुकसान</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लीची में प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे अधिक खाने से शरीर में शुगर लेवल बढ़ सकता है और वजन बढ़ने का खतरा रहता है। डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सावधानी से या डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अधिक मात्रा में लीची खाने से कुछ लोगों को गले में खराश या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। अस्थमा या सांस की समस्या वाले लोगों को भी इसका सेवन सीमित करना चाहिए। माना जाता है कि ज्यादा लीची खाने से कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए लीची का सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में ही करना बेहतर माना जाता है, ताकि इसके फायदे मिलें और नुकसान से बचा जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/vaibhav-suryavanshi-storm-new-world-record-32-ball-century-challenge/">वैभव सूर्यवंशी का तूफान! क्या आज बनेगा नया वर्ल्ड रिकॉर्ड? 32 गेंद में शतक का चैलेंज</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज के बाद भी नहीं घट रहा वजन? ये 4 आदतें हो सकती हैं वजह</title>
		<link>https://hindikhabar.com/healthy-diet-exercise-but-not-losing-weight-4-hidden-habits-could-be-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:38:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Fitness Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Nutrition]]></category>
		<category><![CDATA[Weight Loss Tips]]></category>
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					<description><![CDATA[Weight Loss Tips : अगर आप संतुलित आहार ले रहे हैं और नियमित रूप से व्यायाम भी कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वजन कम नहीं हो रहा, तो इसकी वजह केवल डाइट या वर्कआउट नहीं हो सकती। कई बार हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें अनजाने में कैलोरी की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिससे वजन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Weight Loss Tips :</strong> अगर आप संतुलित आहार ले रहे हैं और नियमित रूप से व्यायाम भी कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वजन कम नहीं हो रहा, तो इसकी वजह केवल डाइट या वर्कआउट नहीं हो सकती। कई बार हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें अनजाने में कैलोरी की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिससे वजन घटाने की कोशिशों पर असर पड़ता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिटनेस विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सामान्य दिखने वाली आदतें शरीर के वजन को प्रभावित कर सकती हैं और वजन कम करने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं।</p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>पर्याप्त नींद न लेना</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">नींद की कमी का असर सीधे खानपान पर पड़ता है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो अधिक मीठे और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ सकती है। इससे व्यक्ति सामान्य से अधिक भोजन करने लगता है, जो वजन घटाने में बाधा बन सकता है।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li><strong>प्रोटीन और फाइबर की कमी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">यदि भोजन में प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं, तो भूख जल्दी लग सकती है। ऐसे में व्यक्ति बार-बार खाने की ओर आकर्षित होता है और कुल कैलोरी सेवन बढ़ जाता है। प्रोटीन और फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं, इसलिए इन्हें भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li><strong>शरीर में पानी की कमी</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">कई बार प्यास और भूख के संकेत एक जैसे महसूस हो सकते हैं। पर्याप्त पानी न पीने पर व्यक्ति प्यास को भूख समझकर अतिरिक्त स्नैक्स या भोजन ले सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी माना जाता है।</p>



<ol start="4" class="wp-block-list">
<li><strong>जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करना</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">अत्यधिक व्यायाम भी कभी-कभी उल्टा असर डाल सकता है। बहुत ज्यादा शारीरिक गतिविधि शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे भूख बढ़ सकती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति अधिक भोजन कर लेता है और कैलोरी सेवन बढ़ जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का मानना है कि वजन घटाने के लिए केवल डाइट और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि अच्छी नींद, पर्याप्त पानी, संतुलित पोषण और सही मात्रा में वर्कआउट भी उतने ही जरूरी हैं। इन आदतों पर ध्यान देकर वजन प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer : </strong>यह जानकारी सामान्य उद्देश्य के लिए है। किसी भी फिटनेस, डाइट या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/ukraine-major-drone-attack-moscow-russian-capital-smoke-security-system-under-question-war-news/">मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, रूसी राजधानी में धुआं-धुआं, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>Health News : पीठ और गर्दन में इसलिए हो रही जकड़न, ये आदतें बना रही अंदर से कमजोर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/health-news-back-neck-pain-stiffness-causes-lifestyle-habits-spine-weakness/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:18:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[back pain]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle Disease]]></category>
		<category><![CDATA[Neck Pain]]></category>
		<category><![CDATA[Spine Care]]></category>
		<category><![CDATA[Spine Damage Reasons]]></category>
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					<description><![CDATA[Health News : आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल में पीठ दर्द और गर्दन की जकड़न एक आम समस्या बन चुकी है, जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं। पहले इसे उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब स्कूल जाने वाले बच्चे, कॉलेज स्टूडेंट्स और युवा प्रोफेशनल्स भी इस परेशानी का सामना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Health News :</strong> आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल में पीठ दर्द और गर्दन की जकड़न एक आम समस्या बन चुकी है, जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं। पहले इसे उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब स्कूल जाने वाले बच्चे, कॉलेज स्टूडेंट्स और युवा प्रोफेशनल्स भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे किसी बड़ी चोट या एक्सीडेंट के बजाय हमारी रोजमर्रा की गलत आदतें मुख्य कारण हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कमजोर होने लगती हैं मांसपेशियां</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना या पढ़ाई करना रीढ़ की हड्डी पर सबसे ज्यादा दबाव डालता है। लगातार बैठने से लोअर बैक की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे शरीर का पूरा भार रीढ़ पर आ जाता है और धीरे-धीरे दर्द शुरू हो जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मेडिकल भाषा में कहते हैं “टेक्स्ट नेक”</h3>



<p class="wp-block-paragraph">क्लीवलैंड क्लिनिक के विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल या कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल करते समय गर्दन को आगे झुकाकर रखना भी एक बड़ी समस्या है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में “टेक्स्ट नेक” कहा जाता है। लगातार स्क्रीन की ओर झुकने से कंधों और ऊपरी रीढ़ पर दबाव बढ़ता है, जिससे स्पाइन का नैचुरल अलाइनमेंट बिगड़ने लगता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुबह उठते ही अकड़न और दर्द</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गलत तरीके से सोना भी रीढ़ की सेहत को प्रभावित करता है। बहुत ऊंचा तकिया या अत्यधिक नरम गद्दा इस्तेमाल करने से स्पाइन को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता, जिससे सुबह उठते ही अकड़न और दर्द महसूस होता है। इसके अलावा पेट के आसपास बढ़ता वजन भी रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सही पोस्चर और नियमित एक्सरसाइज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारी सामान उठाते समय गलत तकनीक अपनाना, जैसे घुटनों को मोड़े बिना सीधे कमर से झुकना, लोअर बैक इंजरी और स्लिप डिस्क के खतरे को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सही पोस्चर और नियमित एक्सरसाइज अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डिस्क्लेमर- यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है, इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/mamata-banerjee-biggest-setback-tmc-20-mps-support-nda-secret-meeting-political-shift/">ममता बनर्जी को सबसे बड़ा झटका, TMC के 20 सांसदों का NDA को समर्थन, गुप्त बैठक के बाद बदले सियासी समीकरण</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य योजना की प्रगति की समीक्षा, कहा- स्वास्थ्य संभाल योजना पंजाब के लिए वरदान बनकर उभरी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/mukhyamantri-swasthya-yojana-progress-review-swasthya-sambhal-yojana-punjab-boon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Jun 2026 06:16:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
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		<category><![CDATA[Mukhyamantri Swasthya Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab News]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Swasthya Yojana : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज मुख्यमंत्री सेहत योजना (एम.एम.एस.वाई.) की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह प्रमुख स्वास्थ्य संभाल पहल प्रदेश भर के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि इस योजना के तहत 3.79 लाख मरीज पहले ही &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhyamantri Swasthya Yojana :</strong> पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज मुख्यमंत्री सेहत योजना (एम.एम.एस.वाई.) की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह प्रमुख स्वास्थ्य संभाल पहल प्रदेश भर के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उन्होंने साथ ही कहा कि इस योजना के तहत 3.79 लाख मरीज पहले ही 654 करोड़ रुपये का नकदी रहित प्राप्त कर चुके हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार प्रदेश के हर परिवार के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस योजना को लोगों से भरपूर समर्थन मिला है और यह पंजाब भर में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा कवरेज की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में उभर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">48.5 प्रतिशत पुरुष और 51.5 प्रतिशत महिलाएं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम की पहुंच को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, &#8220;अब तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 47.27 लाख स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं, जिसमें पंजाब भर के 23.01 लाख परिवार कवर हैं। इन कार्डधारकों में से 48.5 प्रतिशत पुरुष और 51.5 प्रतिशत महिलाएं हैं। शहरी क्षेत्रों में लगभग 31 प्रतिशत कार्ड जारी किए गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 69 प्रतिशत कार्ड जारी किए गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नई मोबाइल ऐप-आधारित पंजीकरण प्रणाली</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि इस योजना को और अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, लोगों को स्वास्थ्य कार्ड डाउनलोड करने में आ रही कठिनाइयों के मद्देनजर एक समर्पित व्हाट्सएप-आधारित सुविधा और एक वेबसाइट पेज बनाया जा रहा है ताकि लाभार्थी अपने ई-कार्ड आसानी से डाउनलोड कर सकें। इसी तरह, एक नई मोबाइल ऐप-आधारित पंजीकरण प्रणाली पर भी काम चल रहा है और जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">223 सरकारी अस्पताल और 612 निजी अस्पताल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस योजना के तहत दिए जाने वाले उपचार के बारे में विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;अब तक 3.79 लाख मरीजों ने सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में इस योजना के तहत 654 करोड़ रुपए का मुफ्त उपचार प्राप्त किया है। उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के तहत 835 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें 223 सरकारी अस्पताल और 612 निजी अस्पताल शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि लाभार्थियों को प्रदेश भर में मानक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।</p>



<h3 class="wp-block-heading">65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस पहल के पैमाने और महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, &#8220;मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। इस प्रमुख योजना के तहत हर परिवार 10 लाख रुपए तक के नकद रहित इलाज का हकदार है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चिकित्सा उपचार पर बड़ी रकम खर्च</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस योजना को प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा में एक नया मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, यह पहल लोगों के लिए वरदान साबित हुई है क्योंकि पहले उन्हें चिकित्सा उपचार पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती थी। लेकिन यह योजना यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण मानक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/dehradun-gis-technology-drug-network-surveillance/">देहरादून में नशे के खिलाफ हाईटेक रणनीति, GIS तकनीक से होगी ड्रग नेटवर्क की निगरानी</a></p>



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		<item>
		<title>जयपुर एयरपोर्ट पर महिला यात्री में Ebola Virus के लक्षण, अस्पताल में भर्ती</title>
		<link>https://hindikhabar.com/jaipur-airport-woman-passenger-with-suspected-ebola-symptoms-hospitalised/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:20:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ebola Virus Case]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Jaipur]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan Ebola Virus]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan News]]></category>
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					<description><![CDATA[Rajasthan Ebola Virus : राजस्थान में इबोला वायरस का पहला केस सामने आया है। राजस्थान धूमने आई एक महिला में इबोला के लक्षण पाए गए हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। महिला को आइसोलेशन में रखा गया है। जहां उसकी पल-पल की अपडेट ली जा रही है। जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित जांच &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Rajasthan Ebola Virus :</strong> राजस्थान में इबोला वायरस का पहला केस सामने आया है। राजस्थान धूमने आई एक महिला में इबोला के लक्षण पाए गए हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। महिला को आइसोलेशन में रखा गया है। जहां उसकी पल-पल की अपडेट ली जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित जांच</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि महिला युगांडा से राजस्थान (जयपुर) घूमने के लिए आई थी। जानकारी के मुताबिक महिला आज सुबह करीब 4:30 बजे एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह होते हुए जयपुर पहुंची थी। जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें इबोला संक्रमण जैसे लक्षण की आशंका जताई गई। इसके बाद तत्काल उसे एयरपोर्ट से आरयूएचएस अस्पताल भेजा गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि अभी इबोला की पुष्टि नहीं हुई है। महिला के सैंपल जांच के लिए पुणे की विशेष लैब भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल महिला का इलाज जारी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य विभाग की लोगों से अपील</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिकित्सा टीम को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की है। विभाग ने कहा कि लोग केवल आधिकारिक सूचना और जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हैदराबाद हवाई अड्डे पर भी आया था केस</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गुरुवार को एक सूडानी नागरिक हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, जहां जांच के दौरान उसमें इबोला जैसे कुछ शुरुआती लक्षण दिखाई दिए। एहतियात के तौर पर उसे आगे की चिकित्सकीय जांच और निगरानी के लिए आइसोलेशन केंद्र भेजा गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की विशेष स्क्रीनिंग</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यात्री हाल ही में दक्षिण सूडान और युगांडा की यात्रा करके लौटा है। इन क्षेत्रों में इबोला वायरस के मामलों की खबरों को देखते हुए एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की विशेष स्क्रीनिंग की जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संदिग्ध लक्षणों के आधार पर निगरानी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसे इबोला का पुष्टि किया गया मामला नहीं माना जा रहा है। केवल यात्रा इतिहास और कुछ संदिग्ध लक्षणों के आधार पर उसे निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकीय जांच और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि मामला इबोला संक्रमण से जुड़ा है या नहीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है इबोला वायरस के लक्षण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इबोला वायरस के लक्षण फ्लू (Flu) जैसे होते हैं जो संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर अचानक सामने आ सकते हैं। शुरुआती दिनों में फ्लू जैसे सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। तेज बुखार, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गंभीर दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बिना किसी स्पष्ट कारण के त्वचा या अंगों से अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) होना शामिल है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गंभीर लक्षण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पाचन तंत्र प्रभावित होता है और स्थिति गंभीर हो जाती है। उल्टी और दस्त (पानी की तरह), पेट में तेज दर्द, भूख न लगना आदि हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंतिम और जानलेवा चरण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">असामान्य रूप से रक्तस्राव- नाक, मुंह, मसूड़ों या मल-मूत्र में खून आना, त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes) का उभरना, मल्टी-ऑर्गन फेल होना और शॉक की स्थिति हो सकती है।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>Obesity Awareness : “कम खाओ-ज्यादा चलो” की सोच मोटापे के लिए क्यों अधूरी है? जानें क्या है सच</title>
		<link>https://hindikhabar.com/awareness-why-eat-less-move-more-is-incomplete-understanding-of-obesity-truth-explained/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:03:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Living]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle Disease]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Metabolism]]></category>
		<category><![CDATA[Obesity Awareness]]></category>
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					<description><![CDATA[Obesity Awareness : मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है। वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Obesity Awareness :</strong> मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक और सीओओ सलोनी पालीवाल के अनुसार, मोटापे को केवल जीवनशैली की समस्या मानना सही नहीं है, क्योंकि इसमें जेनेटिक कारण, हार्मोन, नींद, तनाव, आंतों के बैक्टीरिया और पर्यावरण जैसे कई कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि एक जैसी डाइट और एक्टिविटी के बावजूद लोगों का वजन अलग-अलग हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हार्मोन भी निभाते हैं अहम भूमिका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि “कम खाओ और ज्यादा चलो” जैसी सलाह मोटापे के समाधान के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है। यह तरीका सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन मोटापे जैसी जटिल स्थिति में भूख और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह यह धारणा भी गलत है कि वजन कम न हो पाने की वजह सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी होती है, जबकि घ्रेलिन, लेप्टिन, इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंगों के आसपास चर्बी हो सकती है जमा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कई मामलों में मोटापा बाहर से स्पष्ट नहीं दिखता, क्योंकि शरीर के अंदर अंगों के आसपास चर्बी जमा हो सकती है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। दक्षिण एशियाई आबादी में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है, इसलिए केवल वजन या बीएमआई के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन पूरी तरह सही नहीं माना जाता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">यह भी देखा गया है कि वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होता, क्योंकि शरीर अक्सर अपने पुराने वजन की ओर लौटने की कोशिश करता है। इसी वजह से कई लोगों को लंबे समय तक मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। जीएलपी-1 दवाओं जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड को लेकर भी कई गलतफहमियां हैं, जबकि क्लीनिकल ट्रायल्स में इन्हें भूख और मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है और इन्हें इलाज का हिस्सा माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">WHO मानती है क्रॉनिक बीमारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रमुख मेडिकल संस्थाएं मोटापे को एक क्रॉनिक बीमारी मानती हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर सहित 200 से अधिक बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में इसे सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या मानना सही नहीं है, बल्कि समय पर सही इलाज और मेडिकल सलाह लेना जरूरी माना जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/ghaziabad-surya-murder-case-bulldozer-action-notice-placed-at-asad-house/">Ghaziabad Surya Murder Case : सूर्या हत्याकांड मामले पर बुलडोजर एक्शन, असद के घर पर चिपका नोटिस</a></p>



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