टोक्यो ओलंपिक: 2-3 से हारे दीपक पुनिया, हाथ से फिसला कांस्य लेकिन जीता दिला

टोक्यो: भारतीय पहलवान दीपक पुनिया गुरूवार को कांस्य के लिए हो रहे मुकाबले में हार गए हैं। 86 किलोग्राम वर्ग में दीपक 3-2 से हार गए हैं। सेन मेरिनो के खिलाड़ी माइल्स एमिने के खिलाफ मैच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।

इस हार के बाद ब्रॉन्ज उनके हाथ से फिसल गया है।

लेकिन मैच के बाद हौसला बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने ट्विटर पर उनके नाम संदेश भेजा है। PM ने लिखा है, ‘दीपक पुनिया बेहद ही कम मार्जिन से ब्रॉन्ज मैडल हारे हैं। वो प्रतिभा और धैर्य का पॉवर हाउस हैं। दीपक को भविष्य के लिए शुभकामनाएं।’

माइल्स एमिने

मात्र 61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के छोटे से यूरोपीय देश सेन मेरिनो के माइल्स ने टोक्यो ओलंपिक में कदम रखने से पहले ही इतिहास रच दिया था।

माइल्स अपने देश से ओलंपिक में क्वालिफाई करने वाले पहले खिलाड़ी हैं।

माइल्स इससे पहले 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सेमी-फाइनल तक पहुंचे थे। उन्होंने साल 2020 में यूरोपियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। इस साल ब्रॉन्ज मेडल जीतकर नया इतिहास रचा है। 2019 के यूरोपिय खेलों में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

दीपक पूनिया

वहीं दीपक पूनिया अपने परिवार में पहले पहलवान हैं।

माइल्स एमिने का ताल्लुक पहलवानों के परिवार से है। उनके दादा ने साल 1960 में रोम में ओलंपिक खेलों में लेबनान का प्रतिनिधित्व किया था। उनके भाई मलिक भी एक पहलवान हैं।

हरियाणा के झज्जर ज़िले के छारा गांव में एक दूध बेचने का कारोबार करने वाले परिवार में जन्मे दीपक पूनिया ने ओलंपिक तक का सफ़र केवल 7 सालों में तय किया है।

उनके पिता सुभाष, 2015 से 2020 तक लगातार हर रोज़ अपने घर से 60 किलोमीटर दूर छत्रसाल स्टेडियम में दीपक को घर का दूध, मेवे और फल खुद पहुंचाते थे। चाहे बारिश, गर्मी या सर्दी हो, ये सिलसिला कभी नहीं टूटा।

उनके परिवार वाले चाहते थे कि दीपक को डाइट की कमी कभी न हो।

कॉपी- आरती अग्रावत

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