क्रूज ड्रग्स मामले में सेशन कोर्ट से आर्यन खान को कोई राहत नही, 13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

मुंबई: सोमवार को भी आर्यन खान को जमानत नही मिली। सेशन कोर्ट अब अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को करेगा।  इससे पहले भी किला कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी थी कि आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि केवल विशेष सत्र अदालत ही जमानत याचिका पर सुनवाई करने का हकदार है।

किला कोर्ट के आदेश के आलोक में आर्यन खान ने जमानत के लिए एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष अदालत का रुख किया। बता दें अपनी याचिका में आर्यन ने कई आधारों पर जमानत मांगी है।

सतीश मानशिंदे ने याचिका में कई आधारों पर मांगी जमानत

याचिका में वकील सतीश मानसिंदे ने लिखा है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा आर्यन खान से पास से न तो कोई सबूत बरामद किया गया है और न ही उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है।

उनके खिलाफ कोई बरामदगी नहीं हुई थी, लेकिन अगर यह मान भी लें उनके खिलाफ सारे आरोप सही हैं, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) की धारा 20 (बी) के तहत अधिकतम सजा 1 वर्ष तक है। आर्यन खान के खिलाफ अपराध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 (सी), 20 (बी), 27, 28, 29, 35 शामिल है।

लेकिन चूंकि उनके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ है, इसलिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत देने पर रोक लागू नहीं होगी। उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की पूर्व में दिए फैसलों  के आलोक में अन्य अभियुक्तों की बरामदगी आर्यन के खिलाफ नहीं हो सकती और न ही उसके खिलाफ जब्त सामाग्री का आरोप लगाया जा सकता है। चैट की सटीकता की पुष्टि किए बिना एनसीबी पूरी तरह से व्हाट्सएप चैट पर निर्भर है।

बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को बनाया आधार

मानशिंदे ने जमानत याचिका में आगे कहा, बंबई उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक युवा आरोपी को इस आधार पर जमानत दी थी कि कोई पूर्ववृत्त नहीं था जो वर्तमान मामले के तथ्यों के समान है। आर्यन के संबंध में कोई विश्वसनीय या स्वीकार्य सामग्री नहीं है जिसे एनसीबी रिमांड आवेदनों में भी दिखाने में कामयाब रहा है। यह सुझाव देने के लिए कुछ भी नहीं है कि खान किसी भी तरह से पदार्थों के निर्माण, कब्जे, खरीद या परिवहन से जुड़ा हुआ है और इसलिए एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराधों के लिए सामग्री नहीं बनाई गई है। जैसा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा रिया चक्रवर्ती के मामले में किया गया था कि केवल किसी विशेष लेनदेन के लिए धन प्रदान करने से यह धारा 27 ए के दायरे में नहीं आएगा।

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