6 महीने में आ सकता है नया टेलीकॉम बिल : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने आगे कहा कि परामर्श प्रक्रिया के बाद, बिल का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा, जो संसदीय समिति की प्रक्रिया से गुजरेगा और अंत में संसद में जाएगा।

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दूरसंचार विधेयक 2022 का ड्राफ्ट संस्करण जारी करने के दो दिन बाद, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि विधेयक अगले साल मई तक लागू होने की उम्मीद है।

मंत्री ने कहा, “मुझे 6-10 महीने की समय-सीमा दिखाई दे रही है, लेकिन हमें कोई जल्दी नहीं है।”

दूरसंचार विभाग (DoT) ने मसौदा विधेयक पर 20 अक्टूबर की समय सीमा तय की है। कानून बनने पर यह बिल तीन कानूनों की जगह लेगा: इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885, इंडियन वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट 1933 और टेलीग्राफ वायर्स (गैरकानूनी कब्जा) एक्ट, 1950।

यह बिल राइट ऑफ वेज़ कार्यों को कानूनी समर्थन प्रदान करेगा, क्षतिग्रस्त टावरों और फाइबर के लिए तेजी से अनुमोदन और समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा।

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने शुक्रवार को कहा, “स्पेक्ट्रम के प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसे अब कानूनी समर्थन दिया गया है। मौजूदा नियमों और विनियमों को जारी रखने के लिए, कुछ महत्वपूर्ण सुधार लाए गए हैं।

मसौदा विधेयक में ओटीटी संचार सेवाओं, इंटरनेट आधारित संचार सेवाओं और प्रसारण सेवाओं को शामिल करने के लिए दूरसंचार की परिभाषा को व्यापक बनाने का प्रयास किया गया है।

वैष्णव ने कहा, ‘दूरसंचार सेवाओं’ शब्द को प्रसारण सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक मेल, वॉयस मेल, वॉयस, वीडियो और डेटा संचार सेवाओं, ऑडियोटेक्स सेवाओं, वीडियोटेक्स सेवाओं, फिक्स्ड और मोबाइल सेवाओं, इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं, उपग्रह-आधारित संचार सेवाओं को शामिल करने के लिए परिभाषित किया गया है।

ये (दूरसंचार) विधेयक यूजर्स की सुरक्षा पर केंद्रित है क्योंकि सेवा प्रदाताओं और उपयोगकर्ताओं दोनों को कॉलर की पहचान पता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज नई टेक्नोलॉजी के कारण वॉयस और डेटा कॉल में अंतर गायब हो गया है इसलिए कॉल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी प्लेटफॉर्म को एक ही नियम के तहत लाया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने आगे कहा कि परामर्श प्रक्रिया के बाद, बिल का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा, जो संसदीय समिति की प्रक्रिया से गुजरेगा और अंत में संसद में जाएगा।

उन्होंने आगे कहा, “भारत दूरसंचार क्षेत्र में अग्रणी होने में सक्षम है। इसे ध्यान में रखते हुए यूएसओएफ (यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड) के दायरे का विस्तार किया गया है। पीएम मोदी ने साफ तौर पर कहा है कि हमें वैश्विक मानकों के समानांतर 5G सेवाओं का निर्माण करना है और 6G तकनीक में दुनिया का नेतृत्व करना है।

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