Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई, लेकिन इससे पहले सदन ने लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. खास बात यह रही कि विपक्ष ने भी इस विधेयक का समर्थन किया.
नए कानून के तहत परीक्षा में किसी भी तरह की नकल, पेपर लीक, उत्तर पुस्तिका में हेराफेरी या परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को गंभीर अपराध माना जाएगा.
1 से 5 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना
बता दें कि अगर कोई व्यक्ति नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे 1 से 5 साल तक जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है. संगठित रूप से पेपर लीक या नकल कराने पर 3 से 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपए का जुर्माना हो सकता है. दोषी पाए जाने पर उम्मीदवार को 1 से 3 साल तक किसी भी सरकारी परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित किया जा सकता है.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कानून पर दृष्टिकोण
वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह कानून राज्य में ईमानदार प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और व्यवस्था को सुधारने के लिए अहम साबित होगा, उन्होंने यह भी कहा कि अब परीक्षा में नकल करने वाले गिरोह, फर्जी अभ्यर्थी और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग करने वाले किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
संगठित अपराध में कार्रवाई
संगठित अपराध की स्थिति में दोषियों की संपत्ति कुर्की की जा सकेगी. जांच पुलिस उप-निरीक्षक स्तर से नीचे के अधिकारियों द्वारा नहीं की जाएगी. नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि इस विधेयक का सीधा लाभ प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल विद्यार्थियों को मिलेगा. विपक्ष ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसे बच्चों के हित में लागू किया जाना चाहिए और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से इसे अलग रखा जाना चाहिए.
इस नए कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार और घोटाले रोकने में मदद मिलेगी.
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