
Fake Currency Case : अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली नोटों के रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस दौरान पुलिस ने करीब 2.38 करोड़ रुपये की फर्जी करेंसी के साथ सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में एक स्वयंभू योग गुरु और एक महिला सहित अन्य आरोपी शामिल हैं।
योग फाउंडेशन की आड़ में चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट ‘श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ के नाम पर संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि इस फाउंडेशन की आड़ में नकली नोटों की छपाई और वितरण का काम किया जा रहा था। मामले में चीन कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
मुख्य आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, इस रैकेट का मुख्य आरोपी प्रदीप दिलीपभाई जोतांगिया है, जो खुद को ‘प्रदीप गुरुजी’ और ‘योगगुरु’ के रूप में पेश करता था। वह पहले राजकोट में एक हेयर सैलून चलाता था, जहां से उसने अपना करियर शुरू किया था। बाद में उसने योग और आध्यात्मिक गतिविधियों के जरिए अपनी पहचान बनाई।
सोशल मीडिया से बढ़ाई लोकप्रियता
प्रदीप ने सूरत आकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे YouTube, Facebook और Instagram पर योग और ध्यान से जुड़े वीडियो और लाइव सेशन शुरू किए। धीरे-धीरे उसके फॉलोअर्स बढ़े और उसने खुद को ‘सद्गुरु’ और ‘योगसिद्ध गुरु’ के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया।
आश्रम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सवाल
2008 में सूरत के पास स्थापित ‘श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ के तहत एक बड़ा आश्रम बनाया गया था। आरोप है कि यहां ऊंची दीवारों, फेंसिंग और बेसमेंट जैसी संरचनाएं बनाई गईं, जो सुरक्षा के नाम पर किले जैसा परिसर प्रतीत होता था। आश्रम में गौशाला, अस्तबल और लग्जरी वाहनों की भी व्यवस्था बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों के आरोप और विवाद
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आश्रम में संदिग्ध गतिविधियां होती थीं। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि देर रात तक लग्जरी गाड़ियों का आना-जाना लगा रहता था और बाहरी लोगों की आवाजाही पर सवाल उठते थे। इन्हीं विवादों के बीच आरोपी की निजी जिंदगी भी प्रभावित हुई और उसकी पत्नी से अलगाव हो गया।
नकली नोटों का लेन-देन और पुलिस जांच
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बड़े पैमाने पर नकली नोटों का लेन-देन करने की योजना बना रहा था। आश्रम से प्रिंटिंग से जुड़े उपकरण और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। आरोप है कि नकली नोटों को वैध दिखाने के लिए सरकारी बोर्ड लगे वाहनों का उपयोग किया जाता था।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग की है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित सहयोगियों का भी खुलासा हो सकता है। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
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