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कर्नाटक में बड़ा समझौता! लोकसभा चुनाव में सीट देने पर बनी सहमति

कर्नाटक में बड़ा समझौता! लोकसभा चुनाव में सीट देने पर बनी सहमति

कर्नाटक में बड़ा समझौता! लोकसभा चुनाव में सीट देने पर बनी सहमति

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कर्नाटक में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के बीच बड़े समझौते की खबर सामने आ रही है। पार्टी के नेता और कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा ने एलान किया है कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए जेडीएस को चार सीटें देने पर सहमति जता दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए हामी भर दी है। 

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जेडीएस के विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक से दूर रहने के बाद ही यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि यह पार्टी लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जा सकती है। भाजपा ने कर्नाटक में 2019 के लोकसभा चुनावों में 25 सीट पर जीत हासिल की थी, वहीं, भाजपा समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस और जद(एस) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की थी। भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य और कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा येदियुरप्पा ने कहा कि चुनावी तालमेल के तहत जद(एस) कर्नाटक में 28 संसदीय क्षेत्रों में से चार पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘‘ भाजपा और जेडीएस के बीच तालमेल होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेडीएस को चार लोकसभा सीट देने के लिए राजी हो गए हैं।’’ येदियुरप्पा ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा,‘‘ इसने हमें काफी ताकत दी है और इससे साथ मिल कर हमें 25-26 लोकसभा सीट जीतने में मदद मिलेगी।’’

कर्नाटक में लोकसभा सीटों की स्थिति
फिलहाल राज्य में भाजपा और जेडीएस के सियासी ताकत की बात करें तो जेडीएस के मुकाबले कर्नाटक में भाजपा आगे दिखती है। राज्य में 28 लोकसभा सीटों में 25 सीटें भाजपा की हैं। इसके अलावा एक-एक सांसद कांग्रेस-जेडीएस और एक जेडीएस समर्थक निर्दलीय सांसद है।

भाजपा-जेडीएस गठबंधन से, किसका फायदा?
कर्नाटक की बात करें तो जेडीएस के साथ बीजेपी के रिश्ते को लेकर कई तरह की अटकलें हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि एक साथ जाने से दोनों पार्टियों को मदद मिलेगी, दूसरों का मानना है कि भाजपा के लिए संभावित मामूली लाभ गठबंधन के लायक नहीं हो सकता है। अब भाजपा-जेडीएस गठबंधन पर बातचीत के साथ एक सवाल यह है कि क्या दोनों पार्टियां एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर कर सकती हैं। हाल के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 36 फीसदी और जेडीएस का 14 फीसदी था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में अकेले बीजेपी को 52 फीसदी वोट मिले थे।

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