Crude Oil Price Hike : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. अमेरिका द्वारा ईरान के ‘करज में B1 ब्रिज’ पर हमला किए जाने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है, जिसमें आठ लोगों की मौत और लगभग सौ लोग घायल हुए हैं.
इस घटना के बाद होर्मुज स्ट्रेट से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर आशंकाएं बढ़ गई हैं. इस समय ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि तत्काल डिलीवरी वाले तेल की कीमत 141 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है, जो 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है.
तेल की तेजी से पेट्रोल-डीजल पर असर
पिछले 24 घंटों में तेल की कीमतों में 7-11 प्रतिशत तक उछाल देखा गया. मार्च के महीने में ही तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कई सालों में सबसे तेज गति है.
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं. हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतें लंबे समय तक 110-111 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती हैं, तो घरेलू ईंधन पर इसका असर जल्द ही दिख सकता है.
रूस से तेल सुरक्षा मजबूत
इस बीच, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस से तेल आयात बढ़ा दिया है. मार्च में रूस से तेल की खरीद फरवरी की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत बढ़ गई. ईरान ने भारत को ‘सच्चा मित्र’ बताते हुए भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन भारत जोखिम कम करने के लिए अन्य विकल्पों का भी लाभ उठा रहा है. वहीं, रूस से तेल मंगाना भारत के लिए अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक साबित हो रहा है, खासकर तब जब होर्मुज स्ट्रेट पर संकट की संभावना बनी रहे.
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