महाराष्ट्र में शिंदे-बीजेपी सरकार आने से बुलेट ट्रेन को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ी

Bullet Train In India: महाराष्ट्र में नई सरकार के बनते ही अब तेजी से कड़े फैसले लेने का दौर जारी हो गया है। बता दें अब महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और भाजपा की नई सरकार बनते ही अब ये खबर सामने आ रही है कि जल्द ही बुलेट ट्रेन को लेकर हलचल शुरू हो गई है। बता दें पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन को लेकर ये उम्मीदें फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बुलेट ट्रेन के संभावित किराये का ज़िक्र भी किया है। महाराष्ट्र में पिछली सरकार ने पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर पानी फेर दिया था।

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बता दें उद्धव सरकार कभी भी बुलेट ट्रेन को महाराष्ट्र के अंदर समर्थन नहीं किया। ऐसे में अब उद्धव सरकार की विदाई के साथ पिछले 2.5 सालों से बुलेट ट्रेन के अटके काम को फिर से रफ्तार जल्द ही दिया जा सकता है। इसी कारण से बुलेट ट्रेन शुरू करने की कोई समयसीमा तय नहीं हो पाई जबकि इसकी आधारशीला रखते वक्त कहा गया था कि बुलेट ट्रेन को भारत की आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर यानि 15 अगस्त 2022 को शुरू कर दिया जाएगा।

उद्धव सरकार ने बुलेट ट्रेन पर लगा रखी थी ब्रेक

बता दें महाराष्ट्र की पिछली सरकार ने भारत में बुलेट ट्रेन चलाने की योजना को लेकर बड़ा रोड़ा बनी हुई थी। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने कभी बुलेट ट्रेन चलाने को सपोर्ट नहीं किया है। हालांकि महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन को लेकर सबसे बड़ी समस्या ज़मीन अधिग्रहण को लेकर बनी हुई थी। लेकिन अब महाराष्ट्र में सत्ता की उलट फेर होने के बाद अब दोबारा से कयास ये लगाया जा रहा है कि जल्द ही बुलेट ट्रेन अब अपनी रफ्तार पकड़ती हुई नजर आएगी। एक तरफ जहां 99 फ़ीसदी ज़मीन का अधिग्रहण हो चुका है। तो वहीं दादरा व नागर हवेली में ज़रूरी सारी ज़मीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। वहीं महाराष्ट्र में यह अब तक क़रीब 70% तक हो पाया है।

बता दें भारत में बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट 508 किलोमीटर लंबा है। इसके तहत मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन दौड़ाने की बात कही गई है। इसमें 384 किलोमीटर का रूट गुजरात में होगा। वहीं महाराष्ट्र में 155 किलोमीटर और दादरा व नागर हवेली में 5 किलोमीटर का रूट तैयार किया जाना है। इस प्रोजेक्ट पर 1 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का ख़र्च होना है, जिसके लिए जापान भारत को बड़ा कर्ज़ दे रहा है।

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