Farm Law Repeal Bill: कृषि कानूनों की वापसी के बाद एक्शन में किसान मोर्चा, MSP को लेकर बनाई भावी रणनीति

नई दिल्ली: सोमवार को तीन कृषि कानून वापस हो गए. जिसके चलते किसान आंदोलन का एक साल का लक्ष्य पूरा हो गया है. अब किसान आंदोलन खत्म करने और घर वापसी पर विचार कर रहे है. किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि MSP कानून के बिना किसान घर नहीं लौटेगा. किसान आंदोलन में जो किसान शहीद हुए है उनके परिजनों को आर्थिक मुआवजा मिलना चाहिए साथ ही किसानों के ऊफर दर्ज मुकदमें भी वापस होने चाहिए. उसके बाद ही किसान घर वापसी के बारे में सोचेगा.

सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा की हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि 1 दिसंबर को फिर से बैठक होगी और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा. संसद में कानून वापसी के बीच सिंघु बॉर्डर पर सोमवार को पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक हुई. पंजाब के कुछ किसान संगठन चाहते हैं कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब आंदोलन खत्म करना चाहिए. वहीं कुछ संगठन एमएसपी कानून समेत अन्य बाकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं. आम राय बनाने की कवायद जारी है.

संयुक्त किसान मोर्चा MSP पर कानून के अलावा आंदोलन के दौरान मृत किसानों के परिजनों को मुआवजा और स्मारक बनाने की जगह, प्रदर्शनकारियों पर हुए मुकदमे वापस लेने, बिजली संशोधन बिल वापस लेने और लखीमपुर खीरी कांड के मुख्य आरोपी के पिता अजय मिश्रा को केंद्रीय गृहराज्य मंत्री पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहा है. इन मांगों को लेकर मोर्चा प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिख चुका है.

19 नवंबर को कृषि कानून वापसी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के एलान के बाद ही आंदोलन की जीत हो गई थी, लेकिन तब किसानों ने संसद से वापसी की प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करने की बात कही थी. लेकिन आज कृषि कानूनों को वापस लेने का बिल संसद से पारित होने के बावजूद आंदोलन के मोर्चों पर बड़ा जश्न नजर नहीं आया. इसकी एक वजह तो यह है कि साल भर में आंदोलन के दौरान दिल्ली की सीमाओं पर करीब 700 किसानों का निधन हुआ. वहीं बड़ी वजह यह है कि एमएसपी कानून की मांग अभी पूरी नहीं हुई है. कृषि कानून वापसी के एलान के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी एमएसपी कानून के लिए कमिटी बनाने की बात कह चुके हैं लेकिन एलान भर से किसान संगठन मनाने को तैयार नहीं हैं.

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