बिजली की गति से क्लियर हुई चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की फाइल : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि 1985 बैच के आईएएस अधिकारी अरुण गोयल की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति से संबंधित फाइल को ‘बिजली की गति’ से मंजूरी दे दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह रिक्ति 15 मई को उपलब्ध हो गई। क्या आप हमें मई से नवंबर तक दिखा सकते हैं, सरकार ने कुछ जल्दबाजी, उसी दिन मंजूरी, उसी दिन अधिसूचना, उसी दिन स्वीकृति क्यों दिखाई। फ़ाइल 24 घंटे तक भी नहीं चली है। यह एक प्रकाश की गति से लिया गया कदम है। आपको हमें उचित ठहराना होगा।

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र तंत्र की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की हालिया नियुक्ति से संबंधित फाइलें मांगी थीं।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह यह जानना चाहती है कि क्या नियुक्ति में कोई ‘लचीलापन’ था। शीर्ष अदालत का विचार था कि केंद्र में कोई भी सत्तारूढ़ दल “खुद को सत्ता में बनाए रखना पसंद करता है” और मौजूदा व्यवस्था के तहत पद पर एक ‘यस मैन’ नियुक्त कर सकता है।

लेकिन केंद्र ने तर्क दिया कि 1991 के अधिनियम ने सुनिश्चित किया कि चुनाव आयोग अपने सदस्यों के वेतन और कार्यकाल के मामले में स्वतंत्र रहे और कोई “ट्रिगर पॉइंट” नहीं है जो अदालत के हस्तक्षेप का वारंट करता है।

गुरुवार को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष अरुण गोयल की नियुक्ति की मूल फाइल रखी और केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने शीर्ष अदालत से मामले को पूरी तरह से देखने का अनुरोध किया।

अदालत ने कहा, “यह किस तरह का मूल्यांकन है? हम चुनाव आयोग अरुण गोयल की साख की योग्यता पर नहीं बल्कि उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।”

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