अमर जवान ज्योति का इसलिए हुआ राष्ट्रीय समर स्मारक ज्योति में विलय, जानिए

अमर जवान ज्योति

अमर जवान ज्योति (फोटो-एएनआई)

भारत सरकार ने अमर जवान ज्योति का विलय राष्ट्रीय समर स्मारक ज्योति में कर दिया है। इस बात को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। राहुल गांधी ने इसे शहीदों का अपमान बताया है। हालांकि 1971 के वीर सपूत ने इसे एकदम सही कदम बताया है।

कब बनी थी अमर जवान ज्योति?

अमर जवान ज्योति को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिया गांधी ने शहीदों की याद में 1972 में गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडिया गेट पर प्रज्जवलित की थी। इंडिया गेट को अंग्रेजों ने ब्रिटिश भारत की ओर से लड़ते हुए शहीद हुए 90 हजार भारतीय सैनिकों की याद में 1931 में बनाया था। यहां पर 13 हजार शहीद सैनिकों के नामों का उल्लेख है।

अमर जवान ज्योति क्यों बिशेष है?

काले मार्बल के चबूतरे और उसके ऊपर संगीन युक्त एल1ए1 सेल्फ लोडिंग राइफल और उस पर लखे हेलमेट को शहीदों की अंतिम याद की तरह देखा जाता है। यहां पर चार कलश हैं, इसमें चार ज्योतियां जलती हैं। सामान्य दिनों में एक ज्योति और राष्ट्रीय पर्वों पर चार ज्योति जलाई जाती है। ज्योति में पीएनजी का उपयोग किया जाता है। पहले इस ज्योति में लिक्विड पेट्रोलियम गैस का उपयोग होता था।

नया युद्ध स्मारक में 26,466 नाम दर्ज

इंडिया गेट के नजदीक ही 2019 में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय स्मारक का लोकार्पण किया था। यहां पर 26,466 शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं। स्मारक 40 एकड़ में फैला है और इसे चार भागों में बांटा गया है। रक्षा, त्याग, वीरता और अमर चक्र। अमर चक्र में 2019 से अमर ज्योति जलाई जा रही है।

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राहुल गांधी का बयान

बड़े दुख की बात है कि वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, वह आज बुझ जाएगी। कुछ लोग देशभक्ति और बलिदान को नहीं समझ सकते- कोई बात नहीं। हम अपने जवानों के लिए एक बार फिर अमर जवान ज्योति जलाएंगे।

सरकार का तर्क ‘बुझाई नहीं… स्थानांतरित की’

अमर जवान ज्योति का नए राष्ट्रीय समर स्मारक की ज्योति में विलय हुआ है, बुझाया नहीं गया है।

  • इंडिया गेट उपनिवेशवादी दौर की पहचान है। इंडिया गेट पर लिखे शहीदों के नाम स्मारक पर भी दर्ज हैं, इसलिए शहीदों को समर्पित ज्योति स्मारक पर जलनी चाहिए।
  • कई पूर्व सेनाध्यक्ष भी ऐसा चाहते हैं कि शहीदों से जुड़े कार्यक्रम समर स्मारक पर ही हों। सैन्य अधिकारी, भारतीय व विदेशी नेता श्रद्धांजलि देने स्मारक पर आते हैं।

ज्योति बुझाए जाने की बात झूठ है। कांग्रेस बताए कि छह-सात दशक में शहीदों के सम्मान में स्थायी स्मारक क्यों नहीं बनाया गया। इंडिया गेट पर आजाद भारत के लिए लड़ने वाले एक भी सैनिक का नाम नहीं है। – राजीव चंद्रशेखर, केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता राज्य मंत्री

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