सीएम ने बलिया को दी मेडिकल कॉलेज व स्मारक की सौगात, एयरपोर्ट जैसा बनेगा बलिया का बस स्टेशन

CM Yogi

बलिया: बलिया (Baliya) के ऐतिहासिक बलिदान दिवस के अवसर पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने जिले के लिए दो बड़ी सौगातों की घोषणा की। उन्होंने बलिया में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और जिला कारागार को बाहरी हिस्से में शिफ्ट कर वर्तमान जिला जेल को सेनानियों का स्मारक बनाने की घोषणा की।

बाहरी हिस्से में शिफ्ट होगा जिला कारागार

शुक्रवार पूर्वाह्न बलिया पुलिस लाइन में आयोजित “बलिया बलिदान दिवस” समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पांच साल से मेडिकल कॉलेज के जमीन मांग रहा हूं लेकिन मिल नहीं रही है। तीन साल पहले ही यह काम हो जाना चाहिए था। जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए प्रतिबद्धता दर्शाते हुए सीएम योगी ने कहा कि मुख्य सचिव यहीं बलिया में पढ़े-बढ़े हैं। आज इसी काम के लिए उन्हें साथ लेकर आया हूं। आज मेडिकल कॉलेज की सौगात देकर जाऊंगा।

बलिदान से मिली बलिया को नई पहचान

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व व बलिया बलिदान दिवस के सुखद संयोग पर बलिया आगमन को खुद का सौभाग्य बताते हुए सीएम योगी ने कहा कि बलिया का अपना इतिहास रहा है। यह ऋषियों, मुनियों व क्रांतिकारियों की भूमि है। देश के स्वतंत्रता संग्राम में यहां के क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से बलिया को नई पहचान दी है।

CM के आत्मीय संवाद से भावुक हुए सेनानी परिजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिया की धरती के लाल अमर सेनानी मंगल पांडेय ने आजादी की लड़ाई की जो चिंगारी बैरकपुर छावनी (मेरठ) में जलाई, वह पूरे देश के लिए प्रेरक बनी। 1942 में महात्मा गांधी ने जब अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था तब महान क्रांतिकारी चित्तू पांडेय की अगुवाई में बलिया ने खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। 50 हजार की संख्या में बलिया के लोगों ने जेल पर धावा बोल दिया। तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन को तमाम क्रांतिकारियों को जेल से रिहा करना पड़ा। चित्तू पांडे जिलाधिकारी और महानंद मिश्र पुलिस अधीक्षक की भूमिका में आए। हालांकि इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने अनेक क्रांतिकारियों को गोलियों से भून दिया था लेकिन बलिया ने कभी बलिदान से संकोच नहीं किया।

पूर्व पीएम स्वर्गीय चंद्रशेखर को याद किया सीएम योगी ने

बलिया बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिया की माटी के लाल और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों के लिए, लोकतंत्र को बचाने की जो लड़ाई लोकनायक जयप्रकाश जी ने शुरू की थी उसमें चंद्रशेखर जी का योगदान अविस्मरणीय है।

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