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दिल्ली के छात्रों के लिए बड़ी खबर, यूनिवर्सिटी में 25% सीटें आरक्षित और 50% फीस माफ

Delhi Private Universty Bill 2026 : दिल्ली सरकार ने राजधानी के छात्रों को उच्च शिक्षा में अधिक अवसर देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल 2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली के निवासी छात्रों के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में हर कोर्स की 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान रखा गया है। अब इस बिल को दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा।

कोटा नीति के आधार पर आरक्षण का लाभ

इस बिल का उद्देश्य दिल्ली में प्राइवेट हायर एजुकेशन संस्थानों की स्थापना और संचालन के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना है। प्रस्ताव के अनुसार, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में दाखिले के दौरान दिल्ली के छात्रों को तय कोटा नीति के आधार पर आरक्षण का लाभ मिलेगा।

10 प्रतिशत छात्रों को 25 प्रतिशत फीस

ड्राफ्ट में दिल्ली के छात्रों के लिए मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन योग्य छात्रों को फीस में राहत देने की योजना है। प्रस्ताव के मुताबिक, 5 प्रतिशत छात्रों को पूरी फीस माफी, 10 प्रतिशत छात्रों को 50 प्रतिशत फीस में छूट और अन्य 10 प्रतिशत छात्रों को 25 प्रतिशत फीस में राहत देने का प्रावधान है।

नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन

प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली सरकार को नोटिफिकेशन जारी कर प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, इन संस्थानों को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और अन्य नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना होगा।

नियुक्ति UGC के मानकों के अनुसार

नई प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को यूनिटरी मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये संस्थान अपने निर्धारित कैंपस से काम करेंगे और इन्हें अन्य कॉलेजों को संबद्ध करने की अनुमति नहीं होगी। शिक्षकों और अन्य अकादमिक स्टाफ की नियुक्ति भी UGC के मानकों के अनुसार करनी होगी।

प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय जांच

बिल में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की निगरानी के लिए एक नियामक व्यवस्था का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके तहत उच्च शिक्षा मंत्री को हर निजी विश्वविद्यालय का विजिटर बनाया जाएगा। यदि कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है, तो विजिटर जांच, निरीक्षण और जरूरी निर्देश जारी कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय जांच भी कराई जा सकेगी।

इन राज्यों में पहले से मिलता है स्थानीय छात्रों को आरक्षण

दिल्ली से पहले कई राज्यों में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षण या प्राथमिकता का प्रावधान मौजूद है।

उत्तराखंड: निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।

हिमाचल प्रदेश: डोमिसाइल रखने वाले छात्रों के लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में कम से कम 25 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है।

हरियाणा: राज्य के स्थायी निवासियों को 25 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, जिसमें कुछ सीटें अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के लिए निर्धारित हैं।

राजस्थान: निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय छात्रों के लिए 15 से 25 प्रतिशत तक सीट आरक्षण का प्रावधान है।

मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, पंजाब और कर्नाटक में भी स्थानीय छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण या प्राथमिकता दी जाती है।

स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित

फिलहाल दिल्ली में ज्यादातर प्राइवेट सेल्फ-फाइनेंसिंग संस्थान गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों के रूप में काम करते हैं। प्रस्तावित कानून के बाद योग्य संस्थानों को स्वतंत्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होने का रास्ता मिल सकता है।

डीम्ड यूनिवर्सिटी पहले से संचालित

दिल्ली में कुछ संस्थान डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के रूप में भी काम कर रहे हैं। इनमें TERI स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, NCERT और जामिया हमदर्द जैसे संस्थान शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में UGC द्वारा मान्यता प्राप्त कई विश्वविद्यालय और डीम्ड यूनिवर्सिटी पहले से संचालित हैं।

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