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	<title>environment news Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>दिल्ली के प्रदूषण पर AAP का हमला, एलजी पर लगाए गंभीर आरोप</title>
		<link>https://hindikhabar.com/aap-attacks-delhis-pollution-levels-serious-allegations-against-lg/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 05:16:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[AAP Attack on LG]]></category>
		<category><![CDATA[AAP vs LG]]></category>
		<category><![CDATA[air pollution]]></category>
		<category><![CDATA[delhi politics]]></category>
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		<category><![CDATA[serious allegations]]></category>
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					<description><![CDATA[फटाफट पढ़ें: दिल्ली में प्रदूषण पर AAP का हमला संजय सिंह ने एलजी पर सवाल उठाए अनुराग ढांडा ने सरकार को घेरा AAP ने भाजपा को जिम्मेदार बताया ठोस फैसलों की मांग तेज हुई। Air Pollution Impact : दिल्ली को प्रदूषण में छोड़कर गुजरात जाने वाले एलजी साहब वापस आ गए हैं क्या? यही सवाल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<h3 class="wp-block-heading">फटाफट पढ़ें:</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>दिल्ली में प्रदूषण पर AAP का हमला</li>



<li>संजय सिंह ने एलजी पर सवाल उठाए</li>



<li>अनुराग ढांडा ने सरकार को घेरा</li>



<li>AAP ने भाजपा को जिम्मेदार बताया</li>



<li>ठोस फैसलों की मांग तेज हुई।</li>
</ul>



<p><strong>Air Pollution Impact : </strong>दिल्ली को प्रदूषण में छोड़कर गुजरात जाने वाले एलजी साहब वापस आ गए हैं क्या? यही सवाल आज दिल्ली की जहरीली हवा में तैर रहा है. राजधानी दम घोंटू प्रदूषण से जूझ रही है, लेकिन उपराज्यपाल का फोकस समाधान पर नहीं, बल्कि पत्रों और कैमरों पर दिखाई देता है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने साफ कहा कि एलजी का एक ही काम रह गया है, अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई करना और पत्र लिखना. जब केजरीवाल सत्ता में थे, तब भी वही रट थी, और आज जब वे मुख्यमंत्री नहीं हैं, तब भी अरविंद केजरीवाल को लेकर वहीं फोबिया नजर आ रहा है. यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक तयशुदा भूमिका का निर्वहन है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">दिल्ली में प्रदूषण पर AAP ने सवाल उठाए</h3>



<p>इस पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने तीखा कटाक्ष करते हुए सवाल उठाया, क्या एलजी साहब को याद है कि आज दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हैं? अगर प्रदूषण पर सवाल पूछने ही थे, तो मौजूदा सरकार से पूछे जाते. मगर यहां तो ग्रेप-4 आज लगाया जाता है, कल हटा लिया जाता है, और दिल्ली धीरे-धीरे प्रदूषण की गर्त में धकेली जा रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">ढांडा ने एलजी साहब की याददाश्त पर कसा तंज</h3>



<p>ढांडा ने कहा कि राजधानी की हवा फेफड़ों पर असर कर रही है, लेकिन लगता है एलजी साहब की याददाश्त पर भी असर पड़ गया है. योगी आदित्यनाथ द्वारा &#8220;दो नमूनों&#8221; की तलाश की टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने तंज कसा कि एक नमूना तो पहले ही खुद को साबित कर चुका है, अब दूसरा नमूना भी कैमरे के सामने हाथ उठाकर कह रहा है, मैं भी हूं. कैमरे के प्रति यह आकर्षण, पर जमीन पर काम का अभाव, आज दिल्ली की सच्चाई बन गया है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">दिल्ली की बदहाली के लिए भाजपा जिम्मेदार</h3>



<p>हकीकत यह है कि दिल्ली की मौजूदा बदहाली के लिए उस सरकार को दोषी ठहराया जा रहा है जो सत्ता में है ही नहीं. यह या तो तथ्यों से अनभिज्ञता है या जानबूझकर सच्चाई से मुंह मोड़ना. उपराज्यपाल रहते हुए भूमिका समाधान देने की होनी चाहिए थी, न कि बीजेपी सरकार की तरह राजनीतिक टिप्पणी करने की. प्रदूषण, सड़कें, महंगाई और अव्यवस्था इन सब पर जवाबदेही आज भाजपा की सरकार और उनके लापरवाह प्रशासन की बनती है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">जवाबदेही से बचने की एक और कवायद</h3>



<p>बीते कार्यकाल को कोसकर वर्तमान की विफलताओं को ढका नहीं जा सकता. दिल्ली की जनता देख भी रही है और समझ भी रही है, काम किसने किया और सत्ता में आते ही बहाने किसने बनाए. जब अपनी ही सरकार एलजी को गंभीरता से नहीं ले रही, तो जनता क्यों ले? यही वजह है कि आज असल सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिशें बेनकाब हो रही हैं. एलजी विनय कुमार सक्सेना द्वारा प्रदूषण पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लिखी चिट्ठी, दरअसल, जवाबदेही से बचने की एक और कवायद बनकर रह गई है. दिल्ली को जरूरत है ठोस फैसलों की, निरंतर नीति की और जिम्मेदार शासन की, पत्रों और कैमरों की राजनीति से नहीं, साफ हवा और साफ नीयत से ही राजधानी बचेगी.</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/sikhs-religious-procession-was-stopped-in-new-zealand-slogans-of-jesus-jesus-were-chanted/">न्यूजीलैंड में सिखों का धार्मिक जुलूस रोका गया, जीसस-जीसस के लगाए नारे</a></p>



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		<title>Forest Act: जंगल की परिभाषा से छेड़छाड़ करने का नहीं है इरादा, कोर्ट को सरकार का जवाब</title>
		<link>https://hindikhabar.com/forest-act-no-intention-to-tamper-with-the-definition-of-forest-governments-reply-to-the-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Dec 2023 11:29:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi News]]></category>
		<category><![CDATA[environment news]]></category>
		<category><![CDATA[forest act]]></category>
		<category><![CDATA[Forest Department]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court of india]]></category>
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					<description><![CDATA[Forest Act: केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में हालिया संशोधन &#8220;जंगल&#8221; के अर्थ को कमजोर नहीं करते हैं, जैसा कि 1996 के शीर्ष अदालत के फैसले में चर्चा की गई थी। टीएन गोदावर्मन मामले में अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Forest Act: </strong>केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में हालिया संशोधन &#8220;जंगल&#8221; के अर्थ को कमजोर नहीं करते हैं, जैसा कि 1996 के शीर्ष अदालत के फैसले में चर्चा की गई थी। टीएन गोदावर्मन मामले में अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वन भूमि की पहचान एक विशेषज्ञ समिति द्वारा की जानी है, जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ को केंद्र सरकार के वकील ने सूचित किया कि नए संशोधनों को लागू करने के लिए कोई भी त्वरित कार्रवाई तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि इसे नियंत्रित करने वाले दिशानिर्देश अधिसूचित नहीं हो जाते।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Forest Act: </strong>नहीं की जाएगी कोई सतत कार्रवाई</h3>



<p>कोर्ट ने आदेश में कहा, &#8220;भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल श्री बलबीर सिंह ने निर्देश पर बयान दिया है कि टी.एन. गोदावर्मन मामले में इस न्यायालय के फैसले में परिभाषित जंगल के दायरे को कम करने का कोई इरादा नहीं है&#8230; उनका कहना है कि दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा&#8230; उन्होंने एक बयान दिया कि जंगल के संबंध में अगले आदेश तक भारत संघ द्वारा कोई सतत कार्रवाई नहीं की जाएगी, जैसा कि शब्दकोश अर्थ के अनुसार समझा जाता है &#8220;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Forest Act: </strong>सेवानिवृत अधिकारियों ने किया था कोर्ट का रूख</h3>



<p>बता दें कि सेवानिवृत्त सिविल सेवकों के एक समूह ने वन संरक्षण अधिनियम में हाल के संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जंगलों में मेगाप्रोजेक्ट्स को अनुमति देने से जटिल पारिस्थितिक तंत्र बाधित हो सकता है और लुप्तप्राय जीवन रूपों के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। इसपर कोर्ट ने अक्टूबर में इस मामले पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/cyclone-pressure-builds-over-bay-of-bengal-wind-speed-can-reach-100-km-hour-warning-of-heavy-rain/">Cyclone: Bay Of Bengal पर बना दवाब, पहुंच सकती है हवा की गति 100 किमी/घंटे, भारी बारिश की चेतावनी</a></p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश पर लगाई रोक, ₹12,000 करोड़ जुर्माने का है मामला</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-stays-ngt-order-case-of-%e2%82%b912000-crore-fine/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Nov 2023 13:11:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[environment news]]></category>
		<category><![CDATA[fine of 12 thousand crore]]></category>
		<category><![CDATA[MAHARASHTRA GOVT]]></category>
		<category><![CDATA[national green tribunal]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[NGT]]></category>
		<category><![CDATA[waste management]]></category>
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					<description><![CDATA[New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें महाराष्ट्र राज्य को अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में ₹12,000 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने जुर्माने की राशि का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>New Delhi:</strong> सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें महाराष्ट्र राज्य को अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में ₹12,000 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने जुर्माने की राशि का विरोध किया और अदालत को सूचित किया कि एनजीटी के समक्ष समीक्षा लंबित है। उन्होंने कहा, &#8220;इतने सारे शून्य हैं कि मैं जुर्माने गिन भी नहीं सकता।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>New Delhi:</strong> जुर्माने पर कोर्ट ने लगाई रोक</h3>



<p>पक्ष को सुनने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के साथ-साथ न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और एनजीटी के आदेश पर रोक लगा दी। 10 सितंबर, 2022 को एनजीटी ने महाराष्ट्र सरकार को ठोस और तरल कचरे के अनुचित प्रबंधन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में ₹12,000 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">धारा 15 के तहत मुआवजा आवश्यक</h3>



<p>चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य प्रोफेसर ए सेंथिल वेल की खंडपीठ ने कहा था कि अपशिष्ट प्रबंधन में कमियों के कारण पर्यावरण को हो रहे लगातार नुकसान के समाधान के लिए एनजीटी अधिनियम की धारा 15 के तहत मुआवजा आवश्यक था। यह आदेश अल्मित्रा एच पटेल बनाम भारत संघ एवं अन्य और पर्यावरण सुरक्षा बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पारित किया गया था, जिसमें ट्रिब्यूनल को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों के प्रवर्तन की निगरानी करने की आवश्यकता थी।</p>



<p>ये भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/state/delhi-ncr/situation-of-chaos-in-chief-secretary-appointment-case-court-asked-questions/">Chief Secretary नियुक्ति मामले में ऊहापोह की स्थिति, कोर्ट ने पूछा सवाल</a></p>
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