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	<title>Agriculture Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>Agriculture Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>Farmers ID Card बनेगा किसानों की पहचान, मिलेंगे भरपूर लाभ, बार-बार रजिस्ट्रेशन का झंझट खत्म, ऐसे करें अप्लाई</title>
		<link>https://hindikhabar.com/farmers-id-card-benefits-registration-process-apply-online/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 07:12:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[Farmers ID Card : अगर आप किसान हैं और खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं तो यह जानकारी आप के लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब किसानों के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि बिना आईडी के कोई भी किसान योजना/सरकारी योजना का &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Farmers ID Card :</strong> अगर आप किसान हैं और खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं तो यह जानकारी आप के लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब किसानों के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि बिना आईडी के कोई भी किसान योजना/सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा पाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार हर किसान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रही है, ताकि सहायता असली हकदारों तक पहुंचे और बीच में होने वाले फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगा सके। यदि आपने अभी तक अपनी 12 अंको की डिजिटल आईडी नहीं बनवाई है तो आपकी पीएम सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी अहम सुविधा बंद हो सकती है। इसलिए समय रहते अपनी रजिस्ट्री पूरी कर लें। ताकि योजनाओं का लाभ निरंतर मिलता रहे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है यह फार्मर आईडी?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">फार्मर आईडी असल में किसानों का एक डिजिटल डेटा बेस है, जो लगभग उसी तरह काम करता है जैसे आपका आधार कार्ड। इस 12 अंकों की विशेष पहचान संख्या में किसान का नाम, उसकी जमीन की पूरी जानकारी, खतौनी Khatauni (Record of Rights) और खेत में बोई गई फसल की जानकारी एक ही जगह ऑनलाइन दर्ज होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि कृषि योजनाओं में पूरी तरह से पारदर्शिता लाई जा सके और हर किसान का सही रिकॉर्ड उपलब्ध हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्यों है यह इतनी जरूरी?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जब किसान अपनी फार्मर आईडी बनवा लेते है तो उन्हें हर योजना के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने या वहीं दस्तावेज़ दोबारा जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब चाहे आप खाद, बीज या कोई अन्य सरकारी सहायता लेने जाएं, बस आपकी आईडी स्कैन होगी, और पूरा काम कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इन बड़ी योजनाओं पर लगेगा ब्रेक</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आपके पास यह फार्मर आईडी नहीं होगी, तो सबसे पहले आपकी पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त अटक सकती हैं। इसके अलावा मंडियों में एमएसपी पर फसल बेचने के लिए जो हर बार नया रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था, वह भी इस आईडी के बिना संभव नहीं होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऐसे करें आवेदन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">किसान भाई अपने फार्मर आईडी बनाने के लिए सीधे सरकारी वेबसाइट upagripardarshi.gov.in पर जाकर सीधे आवेदन कर सकते हैं। अगर आप खुद यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं। वहां मात्र 20 से 50 रुपये का सर्विस चार्ज देकर आसानी से E-KYC और आईडी बनवाने का कार्य पूरा करवा सकते है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/iran-us-tensions-rise-iran-claims-drone-attacks-on-american-bases-retaliation-continues/">ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले का किया दावा, जवाबी कार्रवाई जारी</a></p>



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		<item>
		<title>मशरूम उत्पादन इकाई लगाने पर 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी देगी पंजाब सरकार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-government-will-provide-subsidy-of-up-to-rs-80000-for-setting-up-mushroom-production-units/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 10:04:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[000 Subsidy]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[farmers]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
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		<category><![CDATA[punjab farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Government]]></category>
		<category><![CDATA[Subsidy]]></category>
		<category><![CDATA[₹80]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर प्रेरित करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए बड़ी सहृदयता से काम कर रही है. इस उद्देश्य के तहत बागवानी विभाग, पंजाब द्वारा स्टेट प्लान स्कीम के अंतर्गत किसानों को मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab News :</strong> मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को पारंपरिक खेती से बागवानी की ओर प्रेरित करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए बड़ी सहृदयता से काम कर रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस उद्देश्य के तहत बागवानी विभाग, पंजाब द्वारा स्टेट प्लान स्कीम के अंतर्गत किसानों को मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">मशरूम उत्पादन इकाई पर 40 प्रतिशत सब्सिडी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस संबंध में जानकारी देते हुए बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि किसान लगभग 2 लाख रुपये की लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं, जिस पर बागवानी विभाग द्वारा 40 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम 80 हजार रुपये तक दी जाती है, उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम जमीन और पानी के बहुत कम उपयोग से की जा सकती है, उन्होंने कहा कि कम लागत वाली इस काश्तकारी से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि एक छोटी मशरूम इकाई लगभग 1800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित की जा सकती है, इसलिए छोटे किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बागवानी क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">नजदीकी जिला बागवानी अधिकारी से करें संपर्क</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सब्सिडी लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा किसानों को मशरूम उत्पादन संबंधी तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण और हर संभव जानकारी भी उपलब्ध करवाई जा रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें –&nbsp;</strong><a href="http://xn--%20%20isi%20%20%20%20%20%20%204%20%20,%20%20%20%20%20-p99g5a7t05ajadmn7iz3avfgs7dfr3lm9k8dtdyeya8a9fvafjtcx1ga4b3a0vqc7rljiflt1adv5b0b7c1aeh45dlahsg3ag0kuuza1c/">दिल्ली में ISI के निर्देश पर काम करने वाले 4 आतंकी गिरफ्तार, बड़े हमले की थी तैयारी</a></p>



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		<item>
		<title>Agriculture University in India : एग्रीकल्चर में बनाना है करियर? जानिए भारत की टॉप कृषि यूनिवर्सिटीज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/career-in-agriculture-top-agriculture-universities-in-india-education-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:47:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture University]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Top Agriculture University in India]]></category>
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					<description><![CDATA[Agriculture University in India : भारत में कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिक हो रहा है और इसके साथ ही एग्रीकल्चर एजुकेशन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अब कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एग्री-बिजनेस, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, डेयरी, कृषि इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे कई नए क्षेत्र शामिल हो चुके हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Agriculture University in India :</strong> भारत में कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिक हो रहा है और इसके साथ ही एग्रीकल्चर एजुकेशन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अब कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एग्री-बिजनेस, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, डेयरी, कृषि इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे कई नए क्षेत्र शामिल हो चुके हैं। यही वजह है कि देश की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज कृषि शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में छात्रों के लिए बेहतरीन अवसर उपलब्ध करा रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर आप एग्रीकल्चर सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, तो देश के कई संस्थान बेहतर शिक्षा के साथ शानदार प्लेसमेंट और आकर्षक पैकेज भी दे रहे हैं। आइए जानते हैं भारत की कुछ प्रमुख एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज और संस्थानों के बारे में—</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI)</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली स्थित यह संस्थान कृषि शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गिना जाता है। यहां B.Sc, M.Sc और रिसर्च प्रोग्राम्स कराए जाते हैं। आधुनिक लैब और उन्नत शोध सुविधाओं के कारण छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान मिलता है। यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों को अच्छे प्लेसमेंट मिलते हैं और औसतन 6 से 7 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU)</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दक्षिण भारत का यह प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय B.Sc और M.Sc Agriculture जैसे कोर्स के लिए जाना जाता है। यहां की फीस अपेक्षाकृत कम है और प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी बेहतर माना जाता है। स्नातक छात्रों को 3 से 4 लाख रुपये और पोस्टग्रेजुएट छात्रों को इससे अधिक पैकेज मिलने की संभावना रहती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आंध्र प्रदेश स्थित यह विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय है। यहां छात्रों को मजबूत अकादमिक माहौल और आधुनिक रिसर्च सुविधाएं मिलती हैं। कृषि क्षेत्र में रोजगार के अच्छे अवसरों के कारण यह संस्थान छात्रों के बीच लोकप्रिय है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब कृषि विश्वविद्यालय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">यह यूनिवर्सिटी आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि इंजीनियरिंग आधारित पढ़ाई के लिए प्रसिद्ध है। यहां B.Tech Agriculture सहित कई कोर्स उपलब्ध हैं। बेहतर प्लेसमेंट और इंडस्ट्री कनेक्शन के कारण यहां के छात्रों को करियर में अच्छी शुरुआत मिलती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर भारत की पहली कृषि यूनिवर्सिटी मानी जाने वाली यह संस्था कृषि और टेक्नोलॉजी दोनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देती है। यहां B.Sc और B.Tech Agriculture जैसे कोर्स संचालित किए जाते हैं। मजबूत प्लेसमेंट नेटवर्क इसकी बड़ी खासियत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI)</h3>



<p class="wp-block-paragraph">यह संस्थान पशुपालन और पशु चिकित्सा रिसर्च के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां रिसर्च आधारित शिक्षा के साथ सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अच्छे अवसर उपलब्ध होते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग (CIAE)</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि इंजीनियरिंग और आधुनिक मशीनरी तकनीक की पढ़ाई के लिए यह एक प्रमुख संस्थान है। यहां छात्रों को प्रैक्टिकल और रिसर्च आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सेक्टर में करियर के अवसर बढ़ जाते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI)</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डेयरी और पशुपालन से जुड़े कोर्स और रिसर्च के लिए यह संस्थान काफी लोकप्रिय है। यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों की डेयरी इंडस्ट्री और कृषि क्षेत्र में अच्छी मांग रहती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज के समय में एग्रीकल्चर सेक्टर तेजी से बदल रहा है और इसमें करियर की संभावनाएं भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में सही संस्थान का चयन छात्रों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/summer-safety-sugarcane-juice-expert-benefits-risks-health-advice-news/">गर्मी में गन्ने का जूस कितना सुरक्षित? एक्सपर्ट ने बताए फायदे और खतरे</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>कम लागत में ज्यादा मुनाफा, गाजर की खेती बन रही किसानों की पहली पसंद</title>
		<link>https://hindikhabar.com/low-investment-high-profit-carrot-farming-becoming-farmers-first-choice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:58:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[carrot]]></category>
		<category><![CDATA[Carrot Cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[Carrot Farming]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
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					<description><![CDATA[Carrot Farming : आज के समय में खेती में कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फसलों की जगह अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें जोखिम कम और कमाई ज्यादा होती है। इन्हीं फसलों में गाजर की खेती किसानों के लिए एक अच्छा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Carrot Farming : </strong>आज के समय में खेती में कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फसलों की जगह अब किसान नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें जोखिम कम और कमाई ज्यादा होती है। इन्हीं फसलों में गाजर की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर उभर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गाजर की खेती में बहुत ज्यादा निवेश की जरूरत नहीं होती। एक छोटे से खेत में केवल कुछ हजार रुपये की लागत लगाकर किसान अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। यह फसल लगभग 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में अन्य फसलें भी आसानी से ले सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों को मिल जाता है तुरंत लाभ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है, क्योंकि गाजर का उपयोग सलाद, जूस और मिठाइयों में बड़े पैमाने पर होता है। यही कारण है कि फसल तैयार होते ही इसे आसानी से बेच दिया जाता है और किसानों को तुरंत लाभ मिल जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गाजर की खेती के लिए हल्की और उपजाऊ मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सही समय पर सिंचाई और खेत की उचित देखभाल से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। गोबर की खाद का इस्तेमाल फसल को और बेहतर बनाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, गाजर की खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि इसके हर हिस्से का उपयोग किया जा सकता है। इसके पत्तों का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अधिक लाभ मिलने की संभावना</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर किसान सही समय पर बुवाई और कटाई करें तथा खरपतवार पर नियंत्रण रखें तो उत्पादन और मुनाफा दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। ऑफ-सीजन में गाजर की खेती करने पर और भी अधिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/whatsapp-floating-notification-bubbles-chatting-easier-new-feature-update/">चैटिंग होगी और आसान, WhatsApp में आ सकते हैं फ्लोटिंग नोटिफिकेशन बबल्स</a></p>



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<p class="wp-block-paragraph"><br></p>
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			</item>
		<item>
		<title>फालसे की ऑर्गेनिक खेती से बढ़ी किसानों की आय, छोटे सीजन में लाखों की कमाई- जानें पूरी प्रक्रिया</title>
		<link>https://hindikhabar.com/false-ki-organic-kheti-se-birti-ki-ki-ki-income-kami-ki-kami-ki-kote-saison-mein-lakhs-know-the-whole-proce/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:22:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture News]]></category>
		<category><![CDATA[cash crop]]></category>
		<category><![CDATA[crop cultivation]]></category>
		<category><![CDATA[falsa]]></category>
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		<category><![CDATA[India farming]]></category>
		<category><![CDATA[organic farming]]></category>
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					<description><![CDATA[Organic Falsa Farming : मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ किसान ऐसे भी हैं जो अपनी विरासत को संभालते हुए अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. यहां के एक किसान परिवार ने फालसे की खेती को पिछले कई दशकों से संजोकर रखा है और आज यह उनके लिए मजबूत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Organic Falsa Farming :</strong> मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ किसान ऐसे भी हैं जो अपनी विरासत को संभालते हुए अच्छी आमदनी कमा रहे हैं. यहां के एक किसान परिवार ने फालसे की खेती को पिछले कई दशकों से संजोकर रखा है और आज यह उनके लिए मजबूत आय का जरिया बन चुकी है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसान गोपाल पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में इस फालसे की बागवानी की शुरुआत करीब 100 साल पहले उनके दादा मोतीराम पटेल ने की थी. उस समय लगाए गए पौधों को आज भी उनकी तीसरी पीढ़ी संभाल रही है और उन्हीं से नियमित उत्पादन लिया जा रहा है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">गर्मियों में बढ़ती फालसे की मांग</h3>



<p class="wp-block-paragraph">गर्मी के मौसम में फालसा बाजार में काफी मांग में रहता है. इस समय यह फल लगभग 300 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है, जिससे किसानों को कुछ ही हफ्तों के सीजन में अच्छी कमाई हो जाती है. गोपाल पटेल के अनुसार, करीब 40 दिनों के छोटे से सीजन में ही इस खेती से एक से दो लाख रुपये तक की आय आसानी से हो जाती है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह खेती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जाती है. किसान बताते हैं कि इसमें किसी भी तरह के रासायनिक खाद या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाता. पौधे अपने आप गर्मियों में हरे होकर फल देने लगते हैं, जिससे इसे ऑर्गेनिक फसल माना जाता है. इसी वजह से स्थानीय लोग सीधे खेत से आकर इसकी खरीदारी करते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">परंपरागत खेती से रोजगार और आय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि फालसे के औषधीय गुणों के कारण भी इसकी मांग बनी रहती है. इसे पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद और शरीर को ठंडक देने वाला फल माना जाता है, इसलिए डॉक्टर भी इसे सीमित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं.</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोपाल पटेल का कहना है कि उनके खेत में इस खेती से न सिर्फ परिवार की आजीविका चलती है, बल्कि करीब 5 से 8 लोगों को रोजगार भी मिलता है. इस तरह यह परंपरागत खेती आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/virat-kohli-anushka-sharma-visit-vrindavan-meet-premanand-maharaj-darshan/">वृंदावन पहुंचे विराट कोहली और अनुष्का शर्मा, संत प्रेमानंद महाराज के किए दर्शन</a></p>



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		<item>
		<title>Agriculture : छत्तीसगढ़ के युवा किसान कमा रहे तगड़ा मुनाफा, कम समय में खोजा कमाई का रास्ता</title>
		<link>https://hindikhabar.com/young-farmers-in-chhattisgarh-earn-substantial-profits-discovering-a-path-to-income-in-a-short-span-of-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:12:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Green Vegetables]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Young Farmers]]></category>
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					<description><![CDATA[Agriculture : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान ने गर्मी के मौसम में बढ़ती हरी सब्जियों की मांग को पहचानते हुए पालक की खेती को अपनाया और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विकास बताते हैं कि वे ‘किसान केशरी’ किस्म के बीज का उपयोग करते हैं, जो केवल 15-20 दिन में तैयार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Agriculture :</strong> छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान ने गर्मी के मौसम में बढ़ती हरी सब्जियों की मांग को पहचानते हुए पालक की खेती को अपनाया और इससे अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। विकास बताते हैं कि वे ‘किसान केशरी’ किस्म के बीज का उपयोग करते हैं, जो केवल 15-20 दिन में तैयार हो जाती है। इस किस्म की खासियत यह है कि जड़ काली नहीं पड़ती, जिससे इसकी गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जुताई कर बनाई जाती हैं क्यारियां</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खेती की प्रक्रिया में विकास बताते हैं कि सबसे पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी की जाती है। खेत को वीडर से जुताई कर क्यारियां बनाई जाती हैं। बीज बोने के बाद तुरंत सिंचाई की जाती है और गर्मी में फसल को रोजाना पानी देना जरूरी होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बेहतर उत्पादन के बेहतर खाद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पालक की फसल में कैटरपिलर (इल्ली) का खतरा रहता है, इसलिए नियमित निगरानी जरूरी है। बेहतर उत्पादन के लिए नाइट्रोजन युक्त खाद और 100 ग्राम NPK घोल का स्प्रे किया जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उच्च मांग के कारण लाभदायक विकल्प</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कम समय में तैयार होने वाली यह फसल, कम लागत और उच्च मांग के कारण किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है। विकास सोनकर जैसे युवा किसान आधुनिक तकनीकों और मेहनत के जरिए न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/haryana-cabinet-takes-key-decisions-minimum-wage-hiked-to-15220-read-full-details/">हरियाणा मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण फैसले, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 15,220 की गई, डिटेल में पढ़ें</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>पंजाब सरकार ने कृषि सुधार के लिए 1,388 करोड़ रुपये का वार्षिक एक्शन प्लान तैयार किया</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-government-prepares-rs-1388-crore-annual-action-plan-for-agricultural-reforms/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 06:44:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[1388 crore]]></category>
		<category><![CDATA[action plan]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[crops]]></category>
		<category><![CDATA[farmers]]></category>
		<category><![CDATA[Farming]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Government]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab News]]></category>
		<category><![CDATA[reform]]></category>
		<category><![CDATA[Scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : राज्य के कृषि क्षेत्र की स्थिति को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग के विभिन्न प्रोजेक्टों को लागू करने हेतु 1,388 करोड़ रुपये के वार्षिक एक्शन प्लान(कार्य योजना) को अंतिम रूप दे दिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab News :</strong> राज्य के कृषि क्षेत्र की स्थिति को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग के विभिन्न प्रोजेक्टों को लागू करने हेतु 1,388 करोड़ रुपये के वार्षिक एक्शन प्लान(कार्य योजना) को अंतिम रूप दे दिया है. यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने दी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमवार को यहां अपने कार्यालय में परियोजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए खुड्डियां ने कहा कि यह एक्शन प्लान, जिसे पहले ही मंजूरी के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा जा चुका है, में फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दिया गया है.</p>



<h3 class="wp-block-heading">पराली जलाने पर रोक</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि मंत्री ने बताया कि खेतों में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत 600 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बजट रखा गया है, उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य किसानों को सब्सिडी पर इन-सीटू (खेत के भीतर) और एक्स-सीटू (खेत के बाहर) मशीनरी उपलब्ध करवाना है, ताकि पराली जलाने का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके.”</p>



<h3 class="wp-block-heading">जल और कृषि दक्षता पर 180 करोड़ खर्च</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भूमिगत जल के गिरते स्तर को रोकने के लिए ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ घटक के तहत 33.33 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे ड्रिप, स्प्रिंकलर और रेन गन जैसे जल बचत उपकरणों को बढ़ावा मिलेगा. इस दौरान बीज सुधार और कपास प्रदर्शन परियोजनाओं पर 51.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि कृषि मशीनीकरण उप-मिशन के तहत कृषि की दक्षता बढ़ाने के लिए 95 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">फसल विविधीकरण पर 63 करोड़</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को अधिक पानी की खपत वाली धान फसल की बजाय मक्का, दलहन और तिलहन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए फसल विविधीकरण हेतु 50.30 करोड़ रुपये रखे गए हैं. रसायन मुक्त खेती के लिए राष्ट्रीय अभियान के तहत प्राकृतिक खेती हेतु 8.25 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं. इसके अलावा दलहन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए 4.17 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी.</p>



<h3 class="wp-block-heading">मृदा और कृषि विस्तार पर 81 करोड़</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अन्य प्रमुख आवंटनों में मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता प्रबंधन के लिए 20 करोड़ रुपये तथा कृषि विस्तार(एक्सटेक्शन) गतिविधियों के लिए 60.59 करोड़ रुपये शामिल हैं. खुड्डियां ने जोर देकर कहा कि ये समेकित प्रयास न केवल कृषि आय में वृद्धि करेंगे, बल्कि पंजाब के पर्यावरणीय भविष्य को भी सुरक्षित बनाएंगे. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने विभाग के अधिकारियों को आगामी खरीफ सीजन के लिए तैयारियां तेज करने के निर्देश देते हुए योजनाओं को समय पर तैयार करने और लागू करने पर जोर दिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong>&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/mukhyamantri-sehat-yojana-10-lakh-health-cover-emergency-treatment-made-easy/">मुख्यमंत्री सेहत योजना, 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य कवर, आपातकालीन इलाज अब आसान</a></p>



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		<item>
		<title>&#8220;खेतों तो प्लेट तक&#8221;– पंजाब की कृषि को मजबूत करने के लिए एक नवीन पहल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/from-farm-to-plate-an-innovative-initiative-to-strengthen-punjab-agriculture/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 06:48:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[PUNJAB AGRICULTURE]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab News]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab State Food Commission]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006411355</guid>

					<description><![CDATA[Punjab Agriculture : सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने ‘आर ई : जैनरेटिंग पंजाब’ के सहयोग से “मिट्टी से थाली तक” पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य पूरे राज्य में मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करना और कृषि प्रणाली को मजबूत बनाना है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab Agriculture :</strong> सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने ‘आर ई : जैनरेटिंग पंजाब’ के सहयोग से “मिट्टी से थाली तक” पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य पूरे राज्य में मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करना और कृषि प्रणाली को मजबूत बनाना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर दिया जोर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए, आयोग के अध्यक्ष बाल मुकुंद शर्मा ने मिट्टी की घटती उर्वरता, कम होते भूजल और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ‘आर ई : जैनरेटिंग पंजाब’ की संस्थापक और मुख्य संचालक सुमित संधू (दिल्ली) को कार्यक्रम का एजेंडा प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करके इस सेमिनार का उद्घाटन किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">निर्यात जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चाएं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस सेमिनार में पंजाब, अमेरिका और ब्रिटेन के लगभग 15 विशेषज्ञों और चुनिंदा किसानों ने भाग लिया, जिन्होंने सक्रिय रूप से अपने विचार साझा किए। जैविक खेती, वैकल्पिक फसल चक्र, वर्मीकम्पोस्ट-आधारित उर्वरक, मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन, पानी का कुशल उपयोग, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चाएं हुईं। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के अनुरूप रहा, “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत।”</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रतिभागियों में सुमित संधू (दिल्ली), मुक्ति कुमार (जम्पल, इंग्लैंड), ज्योति सरूप (उन्नति कोऑपरेटिव), रजनीश शर्मा (वर्मीकम्पोस्ट उर्वरक विशेषज्ञ), जतिंदर कौर अरोड़ा (पूर्व कार्यकारी निदेशक, पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद), रिपनदीप सिंह (सहायक निदेशक, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, घड़ुआं), तरुण सेन (प्रबंधक, पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड), एन.एस. बराड़ (अध्यक्ष, पैग्रो फ्रोजन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड), के.बी. सिंह (निदेशक, PAMETI, PAU), जसप्रीत सिंह (हल्दी उत्पादक), चमकौर सिंह (मोगा), गुरमुख सिंह (बटाला), धालीवाल साहब (अमेरिका), सरबजीत बाजवा (अमृतसर), श्री सत्त सिंह जी, और कई अन्य प्रगतिशील किसान तथा विद्वान शामिल थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऑर्गेनिक कार्बन के महत्व पर दिया ज़ोर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अतिरिक्त, आयोग के सदस्य सरदार जसवीर सिंह सेखों और श्री चेतन प्रकाश धालीवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने सेमिनार की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और अध्यक्ष बाल मुकुंद शर्मा के नेतृत्व की सराहना की। मुक्ति कुमार (कार्बन सैवी, UK) ने मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन के महत्व पर ज़ोर दिया, जबकि डॉ. बलजिंदर सिंह सैनी (टाटा ट्रस्ट्स पंजाब के प्रमुख) ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सेमिनार के मुख्य बिंदुओं को किया साझा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस पहल के तहत, एक &#8220;थिंक एंड डू टैंक&#8221; बनाने की भी घोषणा की गई, जो पंजाब की खेती-बाड़ी को फिर से बेहतर बनाने की प्रक्रिया को तेज़ करने में अहम भूमिका निभाएगा। आखिर में, चेयरमैन बाल मुकुंद शर्मा ने सेमिनार के मुख्य बिंदुओं को साझा किया और भरोसा दिलाया कि इस कार्यक्रम के दौरान उठाए गए सभी सुझावों और चिंताओं को पंजाब सरकार के संज्ञान में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस सेमिनार की प्रेरणा उन्हें एम.एस. औजला से मिली थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/vigilance-bureau-nabs-naib-court-red-handed-accepting-bribe-of-rs-10000/">विजिलेंस इन एक्शन मोड, लुधियाना में ASI रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>खाद आपूर्ति को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान, 2026 के लिए विस्तृत आपूर्ति रणनीति तैयार, डिटेल में पढ़ें</title>
		<link>https://hindikhabar.com/yogi-government-big-plan-for-fertilizer-supply-2026-strategy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[cm yogi]]></category>
		<category><![CDATA[farmers news]]></category>
		<category><![CDATA[Fertilizer Supply]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006411170</guid>

					<description><![CDATA[UP News : योगी सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 के लिए एक व्यापक और सुव्यवस्थित सप्लाई प्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में किसी भी प्रकार की खाद कमी की स्थिति को रोकना और कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखना है। प्रत्येक जिले में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>UP News : </strong>योगी सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 के लिए एक व्यापक और सुव्यवस्थित सप्लाई प्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में किसी भी प्रकार की खाद कमी की स्थिति को रोकना और कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति</h3>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य सरकार द्वारा जारी इस रणनीति के तहत यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए, ताकि बुवाई और फसल की बढ़वार के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पारदर्शिता के साथ किया वितरण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसके साथ ही प्रदेश के समस्त उर्वरक बिक्री केन्द्रों पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर पारदर्शिता के साथ वितरण किया जाए। उर्वरकों की जमाखोरी कर कृत्रिम अभाव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। गैर कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के डायवर्जन यथा-प्लाईवुड इण्डस्ट्रियल, पशु आहार निर्मित इकाइयों पर सघन निगरानी रखी जाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">फसल में संस्तुति / संतुलित मात्रा में (अधिकतम यूरिया 07 बोरी एवं डी०ए०पी०-05 बोरी प्रति हेक्टेयर) उर्वरकों का प्रयोग करने के साथ-साथ उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण न करने के सम्बन्ध में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाए। अन्तर्राष्ट्रीय / अन्तर्राज्यीय सीमावर्ती जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की सघन निगरानी रखी जाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस योजना में सहकारी समितियों की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार ने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों में सुधार होगा। वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को संतुलित रखते हुए उन्हें लगभग 35 प्रतिशत कोटा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावी बनी रहे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अधिकारियों को दिए गए निर्देश</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खाद वितरण की निगरानी के लिए सरकार ने सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">किसानों के हितों के लिए उठाए गए कदम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस सुनियोजित रणनीति से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/raghav-chadha-why-fear-speaking-against-modi-government-on-public-issues/">राघव चड्ढा बताएं, जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे?- ”आप”</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>देश के किसानों पर कुदरत की मार, गर्मी, युद्ध और बेमौसम बारिश से फसल और आमदनी पर भरी चोट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/farmers-hit-by-heat-war-and-unseasonal-rain-damage-to-crops-income/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 11:34:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेत-खलिहान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[crops]]></category>
		<category><![CDATA[Farmers Update]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[indian farmers]]></category>
		<category><![CDATA[unseasonal rain]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006409524</guid>

					<description><![CDATA[Indian Farmers : देश के किसानों को इस समय तीनों तरफ से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में अचानक बदलाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बेमौसम बारिश ने फसलों पर भारी असर डाला है। अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी- लगभग हर प्रमुख फसल दबाव में है। इस स्थिति ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Indian Farmers :</strong> देश के किसानों को इस समय तीनों तरफ से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में अचानक बदलाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बेमौसम बारिश ने फसलों पर भारी असर डाला है। अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी- लगभग हर प्रमुख फसल दबाव में है। इस स्थिति ने सिर्फ किसानों को नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को भी चिंता में डाल दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल तक नुकसान की संभावना</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सबसे बड़ी चिंता गेहूं की पैदावार को लेकर है। फरवरी-मार्च का समय गेहूं के लिए बेहद अहम माना जाता है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं के दानों को कमजोर किया और हरजिंदर सिंह जैसे किसानों ने प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल तक नुकसान की संभावना जताई। हरियाणा में हालांकि अचानक हुई बारिश से कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन तापमान का असर कम रहा। बिहार और उत्तर प्रदेश में भी कुछ क्षेत्रों में गर्मी और बारिश का मिश्रित प्रभाव देखने को मिला है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बाजार तक पहुंचने में होगी समस्या</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम एशिया की जंग से भारत के कृषि निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। बासमती चावल, प्याज, केला, अंगूर जैसे उत्पाद जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों में जाते हैं, अब बंदरगाहों पर फंसे हैं। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। खासकर रमजान और ईद के मौके पर मांग बढ़ने वाली उपज अब बाजार तक नहीं पहुंच पा रही।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फसल गिरने से उत्पादन घटेगा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तैयार फसलों को बर्बाद कर दिया। हरियाणा में गेहूं, सरसों और चना, महाराष्ट्र में गेहूं, तरबूज और प्याज सहित कई फसलें प्रभावित हुई हैं। कटाई के दौरान फसल गिरने से उत्पादन घटेगा और मजदूरी की लागत भी बढ़ जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संकट से उबरने के लिए मदद की जरूरत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुल मिलाकर इस महीने की गर्मी, युद्ध और बारिश ने किसानों की आय पर सीधा असर डाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति गंभीर है और किसानों को इस संकट से उबरने के लिए मदद की जरूरत है, वरना उत्पादन और आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है।</p>



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