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	<title>सुप्रीम कोर्ट Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>सुप्रीम कोर्ट Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<item>
		<title>&#8216;वक्फ एक धार्मिक दान है, जो अल्लाह को किया जाता है&#8217; SC में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने CJI के सामने दी दलील</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-waqf-is-a-religious-donation-which-is-made-to-allah-kapil-sibal-argued-before-cji-during-the-hearing-in-sc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 May 2025 11:04:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi : वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं। कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नए कानून में वक्फ संपत्तियों पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi : </strong>वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं।</p>



<p>कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नए कानून में वक्फ संपत्तियों पर आपत्ति जताने का अधिकार किसी को भी दे दिया गया है, जिससे संपत्ति पर विवाद की स्थिति में वक्फ का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि &#8220;वक्फ एक धार्मिक दान है जो अल्लाह को किया जाता है। एक बार वक्फ की गई संपत्ति हमेशा वक्फ ही रहती है, इसे किसी अन्य को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।&#8221;</p>



<p>उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि 100-200 साल पुराने वक्फ दस्तावेजों को आज की तारीख में कहां से लाया जाएगा, और इस आधार पर संपत्तियों की वैधता कैसे सिद्ध की जाएगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से उन्होंने कहा, &#8220;यह हमारी पहचान और डीएनए से जुड़ा मसला है।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की बहुसंख्या पर भी उठे सवाल</h3>



<p>सिब्बल ने यह भी आपत्ति जताई कि नए प्रावधानों के तहत वक्फ काउंसिल और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों का बहुमत हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य वक्फ बोर्ड में 12 गैर मुस्लिम और 10 मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं, जबकि पहले वक्फ से संबंधित पदों पर केवल मुस्लिम ही नियुक्त किए जाते थे।</p>



<p>कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ करने के लिए कम से कम 5 साल मुस्लिम होना जरूरी कर दिया गया, संपत्ति पर विवाद का निपटारा कलेक्टर करेगा। यह सभी प्रावधान अगर लागू हो गए तो अपूरणीय नुकसान करेंगे। सभी प्रावधानों पर रोक जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विवाद निपटारा और संपत्ति का सरकारी नियंत्रण</h3>



<p>मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच के सामने कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर वक्फ संपत्ति को लेकर कोई विवाद होता है तो उसका फैसला करने वाला भी सरकार का अधिकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि नए कानून के अनुसार कोई भी वक्फ संपत्ति पर आपत्ति जता सकता है। उन्होंने कोर्ट को वक्फ का मतलब समझाते हुए कहा, &#8216;वक्फ क्या है, यह अल्लाह को किया गया दान है, जिसे किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। एक बार वक्फ की गई संपत्ति वक्फ ही रहती है।&#8217;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>CJI गवई ने पूछा- जांच के दौरान संपत्ति सरकार के पास रहेगी?</strong></h3>



<p>इस पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने सवाल किया कि जब किसी संपत्ति की जांच शुरू होती है, तो क्या वह संपत्ति सरकार के नियंत्रण में चली जाएगी? इस पर सिब्बल ने उत्तर दिया, &#8216;जी, हां। बिना किसी सुनवाई के ऐसा होगा और संपत्ति को विवादित कोई भी व्यक्ति बता सकता है। जांच होते ही वक्फ बोर्ड का कब्जा खत्म हो जाएगा।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/delhi-big-decision-of-the-supreme-court-all-high-court-judges-will-be-entitled-to-full-pension/">सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट के सभी जज फुल पेंशन के होंगे हकदार</a></p>



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		<title>&#8216;उन्होंने हमें आजादी दिलाई और आप&#8230;&#8217;,  राहुल गांधी को वीर सावरकर केस में सुप्रीम कोर्ट की फटकार</title>
		<link>https://hindikhabar.com/rahul-gandhi-he-gave-us-freedom-and-you-supreme-court-reprimands-rahul-gandhi-in-veer-savarkar-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Apr 2025 09:07:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[rahul gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi Remarks on Savarkar]]></category>
		<category><![CDATA[SC Rebukes Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[vd savarkar]]></category>
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		<category><![CDATA[राहुल गांधी]]></category>
		<category><![CDATA[विनायक दामोदर सावरकर को फटकारा]]></category>
		<category><![CDATA[वीडी सावरकर]]></category>
		<category><![CDATA[सावरकर पर राहुल गांधी की टिप्पणी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[Rahul Gandhi : सुप्रीम कोर्ट ने वीर सावरकर पर आपत्तिजनक बयानबाजी करने के मामले में राहुल गांधी को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ गैर-जिम्मेदाराना बयानों की इजाजत नहीं देंगे। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने की। अदालत ने फटकार के साथ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>Rahul Gandhi : सुप्रीम कोर्ट ने वीर सावरकर पर आपत्तिजनक बयानबाजी करने के मामले में राहुल गांधी को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ गैर-जिम्मेदाराना बयानों की इजाजत नहीं देंगे। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने की।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अदालत ने फटकार के साथ दी राहत</h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8216;इस बार सावरकर हैं अगली बार कोई कहेगा कि महात्मा गांधी अंग्रेजों के नौकर थे। अगली बार ऐसी बयानबाजी की तो हम स्वत: संज्ञान लेंगे।&#8217; हालांकि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फटकार के साथ राहत भी दी और निचली अदालत में चल रहे इस मुकदमे में कार्रवाई पर रोक लगाई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को चेताया</h3>



<p>जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राहुल गांधी को चेताते हुए कहा, &#8216;आप एक राजनीतिक पार्टी के नेता हैं। आप क्यों ऐसी टिप्पणी करेंगे? आप महाराष्ट्र जाकर सावरकर पर बयान देते हैं, जहां उनकी पूजा होती है। आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।&#8217; सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी से पूछा, &#8216;क्या राहुल गांधी को पता है कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों से पत्राचार में आपका वफादार सेवक शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या उन्हें पता है कि उनकी दादी ने भी स्वतंत्रता सेनानी को पत्र भेजा था? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए।&#8217;</p>



<h3 class="wp-block-heading">राहुल गांधी को हाईकोर्ट ने लगा था झटका</h3>



<p>इस मामले में चार अप्रैल को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से झटका लगा था। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ समन आदेश रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अदालत में लंबित सावरकर मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत देने से इनकार कर दिया था</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या था पूरा मामला ?</h3>



<p>मानहानि का ये मामला 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी के महाराष्ट्र में दिए गए विवादित बयान से जुड़ा है। जिसमें राहुल गांधी ने सावरकर को &#8216;अंग्रेजों का नौकर&#8217; बताया था। साथ ही कहा था कि सावरकर &#8216;अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।</p>



<p>वकील नृपेंद्र पांडे ने इसको लेकर निकली अदालत के शिकायत दर्ज कराई थी। निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ पहली नजर में आईपीसी 153(A) और 505 के तहत केस मानते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। </p>



<p>ये भी पढ़ें: <a href="https://hindikhabar.com/up-board-result-out-yash-topped-in-10th-and-mehak-topped-in-12th-check-the-result-like-this/">10वीं में यश और 12वीं में महक ने किया टॉप, ऐसे करें रिजल्ट चेक</a></p>



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		<item>
		<title>&#8216;देश में धार्मिक युद्धों को भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार&#8217;, वक्फ कानून पर SC में सुनवाई पर बोले निशिकांत दुबे</title>
		<link>https://hindikhabar.com/nishikant-dubey-on-waqf-law-hearing-supreme-court-is-responsible-for-inciting-religious-wars-in-the-country-said-nishikant-dubey-on-hearing-on-waqf-law-in-sc/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:07:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[CJI संजय खन्ना]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञानवापी]]></category>
		<category><![CDATA[धारा 377]]></category>
		<category><![CDATA[निशिकांत दुबे]]></category>
		<category><![CDATA[राम मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[वक्फ अधिनियम 2025]]></category>
		<category><![CDATA[संसद बनाम न्यायपालिका]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Nishikant Dubey On Waqf Law Hearing : संसद से पारित वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामला संवेदनशील होते हुए अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट और देश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Nishikant Dubey On Waqf Law Hearing :</strong> संसद से पारित वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। मामला संवेदनशील होते हुए अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट और देश के मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना पर तीखे सवाल उठाए हैं।</p>



<p id="tw-target-text">बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने शनिवार (19 अप्रैल) को आरोप लगाया कि देश में धार्मिक युद्धों को भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ता है तो संसद और विधानसभा बंद कर देनी चाहिए।&#8221; </p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Delhi: &quot;&#8230;Supreme Court is responsible for inciting religious wars in the country. The Supreme Court is going beyond its limits. If one has to go to the Supreme Court for everything, then Parliament and State Assembly should be shut&#8230;&quot; says BJP MP Nishikant Dubey <a href="https://t.co/ObnVcpDYQf">pic.twitter.com/ObnVcpDYQf</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1913564323546386452?ref_src=twsrc%5Etfw">April 19, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
</div></figure>



<h3 class="wp-block-heading">सुप्रीम कोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को कैसे निर्देश दे सकता है- निशिकांत दुबे</h3>



<p>उन्होंने कहा, &#8220;आप (SC) नियुक्ति प्राधिकारी को कैसे निर्देश दे सकते हैं? राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं। संसद इस देश का कानून बनाती है। आप उस संसद को निर्देश देंगे? आपने नया कानून कैसे बना दिया? किस कानून में लिखा है कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर फैसला लेना है? इसका मतलब है कि आप इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहते हैं। जब संसद बैठेगी तो इस पर विस्तृत चर्चा होगी।&#8221; बीजेपी सांसद दुबे ने कहा, &#8220;भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना इस देश में हो रहे सभी गृहयुद्धों के लिए जिम्मेदार हैं।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मस्जिदों के लिए कागज मांगते हैं, मंदिरों पर संदेह</strong></h3>



<p>विवादित धार्मिक स्थलों के संदर्भ में निशिकांत दुबे ने कहा, “जब बात आती है राम मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि या ज्ञानवापी की, तो सुप्रीम कोर्ट सबूत मांगता है। लेकिन मुगलों के समय में बनी मस्जिदों के लिए वही अदालत पूछती है कि उनके कागज कहां से लाओगे?”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>धारा 377 और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल</strong></h3>



<p>निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 377 को असंवैधानिक घोषित किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, &#8220;धारा 368 के तहत संविधान में संशोधन का अधिकार संसद को है, जबकि सुप्रीम कोर्ट केवल व्याख्या कर सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट फैसलों से नए कानून की तरह व्यवहार कर रहा है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।&#8221;</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/gorakhpur-congress-did-not-want-baba-saheb-to-go-to-the-constituent-assembly-cm-yogi-said-during-the-public-meeting-in-gorakhpur/">‘कांग्रेस नहीं चाहती थी कि बाबा साहेब संविधान सभा में जाएं…’ गोरखपुर में जनसभा के दौरान बोले सीएम योगी</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>सुपर संसद की तरह काम कर रहे जज, राष्ट्रपति को नहीं दे सकते आदेश, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर भड़के उपराष्ट्रपति</title>
		<link>https://hindikhabar.com/vice-president-jagdeep-dhankhar-judges-are-acting-like-super-parliament-cannot-give-orders-to-the-president-vice-president-got-angry-at-the-comment-of-supreme-court/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:41:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[उपराष्ट्रपति धनखड़]]></category>
		<category><![CDATA[कानून]]></category>
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		<category><![CDATA[न्यायपालिका का हस्तक्षेप]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[शक्तियों का पृथक्करण]]></category>
		<category><![CDATA[संविधान]]></category>
		<category><![CDATA[संविधान अनुच्छेद 142]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Vice President Jagdeep Dhankhar : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को निर्देशित करने वाले हालिया आदेश की तीखी आलोचना की। यह आदेश राज्यपालों द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजे गए विधेयकों पर समयसीमा में निर्णय लेने से संबंधित था। धनखड़ ने इसे न्यायपालिका द्वारा लोकतांत्रिक प्रणाली में अनुचित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Vice President Jagdeep Dhankhar : </strong>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार  (17 अप्रैल 2025) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को निर्देशित करने वाले हालिया आदेश की तीखी आलोचना की। यह आदेश राज्यपालों द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजे गए विधेयकों पर समयसीमा में निर्णय लेने से संबंधित था। धनखड़ ने इसे न्यायपालिका द्वारा लोकतांत्रिक प्रणाली में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया। इसे लेकर उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में कभी भी ऐसा लोकतंत्र नहीं रहा, जहां न्यायाधीश किसी लॉ मेकर, कार्यपालिका और यहां तक कि &#8216;सुपर संसद&#8221; के रूप में काम करें।</p>



<p>राज्यसभा के 6वें बैच के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक ताकतों पर परमाणु मिसाइल नहीं दाग सकता।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>&#8216;सुपर संसद की तरह काम कर रहे जज&#8217;</strong></h3>



<p>धनकड़ ने कहा, ‘‘हमारे पास ऐसे जस्टिस हैं जो कानून बनाएंगे, कार्यपालिका के कार्य करेंगे, जो सुपर संसद के रूप में कार्य करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है।’’</p>



<h3 class="wp-block-heading">धनकड़ ने अनुच्छेद 142 को परमाणु मिलाइल करार दिया</h3>



<p>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 142 को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसे न्यायपालिका को पूरी शक्तियां देने वाला प्रावधान माना जाता है। उन्होंने इसे &#8220;लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक परमाणु मिसाइल&#8221; करार दिया, जो न्यायपालिका के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध है। उनका कहना था, &#8220;अनुच्छेद 142 अब लोकतांत्रिक प्रणाली के खिलाफ एक परमाणु मिसाइल बन चुका है, जिसे न्यायपालिका कभी भी इस्तेमाल कर सकती है।&#8221; संविधान का यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण शक्ति भी कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>देश में क्या हो रहा है- उपराष्ट्रपति ने पूछा</strong></h3>



<p>उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, ‘‘हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. हम किस दिशा में जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए। यह सवाल नहीं है कि कोई पुनर्विचार याचिका दायर करता है या नहीं। हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी। राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह कानून बन जाता है।’’</p>



<p>उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी चिंताएं बहुत बड़े स्तर पर थीं और उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा देखने को मिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को याद दिलाया कि भारत के राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति संविधान के संरक्षण, सुरक्षा और बचाव की शपथ लेते हैं। मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसद और न्यायाधीश सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं।’’</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>&#8216;राष्ट्रपति को नहीं दे सकते निर्देश&#8217;</strong></h3>



<p>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में कहा, &#8220;हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जहां भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दिया जाए, और वह भी किस आधार पर?&#8221; उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 145(3) का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायालय के पास संविधान की व्याख्या करने का अधिकार है, और इसके लिए कम से कम पांच न्यायाधीशों का पैनल होना चाहिए।</p>



<p>शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, तो वह संसद और चुनावों में जनता के प्रति जवाबदेह होती है। &#8220;जवाबदेही का सिद्धांत काम करता है, संसद में सवाल पूछे जा सकते हैं, लेकिन अगर कार्यपालिका शासन न्यायपालिका से संचालित हो, तो आप सवाल किससे पूछेंगे?&#8221; उपराष्ट्रपति ने यह भी जोड़ा।</p>



<p>धनखड़ ने यह चेतावनी दी कि अब समय आ गया है जब विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका तीनों संस्थाओं को अपने-अपने क्षेत्र में काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, &#8220;किसी एक संस्था का दूसरी संस्था के क्षेत्र में हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जो कि एक अच्छी बात नहीं है।&#8221;</p>



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		<title>सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर आज अहम सुनवाई, विरोध में 70 से ज्यादा याचिकाएं&#8230;एक्ट को रद करने की मांग</title>
		<link>https://hindikhabar.com/waqf-law-2025-important-hearing-on-wakf-act-in-supreme-court-today-more-than-70-petitions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Apr 2025 03:27:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[supreme court hearing]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme court hearing waqf act]]></category>
		<category><![CDATA[Waqf Act]]></category>
		<category><![CDATA[Waqf Amendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[waqf amendment act hearing]]></category>
		<category><![CDATA[waqf amendment act hearing in SC]]></category>
		<category><![CDATA[Waqf Law 2025]]></category>
		<category><![CDATA[वक्फ कानून]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Waqf Law 2025: सुप्रीम कोर्ट में आज वक्फ कानून को लेकर अहम सुनवाई होगी। विपक्ष के लगातार विरोध के बीच संसद में पारित होकर कानून बन चुके वक्फ एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, पीवी संजय कुमार और केवी विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ याचिकाओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>Waqf Law 2025: सुप्रीम कोर्ट में आज वक्फ कानून को लेकर अहम सुनवाई होगी। विपक्ष के लगातार विरोध के बीच संसद में पारित होकर कानून बन चुके वक्फ एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, पीवी संजय कुमार और केवी विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।</p>



<p>संसोधित वक्फ कानून के खिलाफ करीब 73 याचिकाएं दायर की गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख ओवैसी,&nbsp; एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के अरशद मदनी समेत कई लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब तक 10 याचिकाओं को सूचीबद्ध किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अहम है आज होने वाली सुनवाई</h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट में 20 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हुई हैं जिनमें वक्फ संशोधन कानून-2025 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। ज्यादातर याचिकाएं कानून के विरोध में हैं, हालांकि कुछ याचिकाओं में कानून का समर्थन भी किया गया है। दो याचिकाएं ऐसी भी हैं जिनमें वक्फ के मूल कानून वक्फ एक्ट 1995 को ही चुनौती देते हुए रद करने की मांग की गई है।</p>



<p>बुधवार यानी आज होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ याचिकाओं में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है लेकिन केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है ताकि सुप्रीम कोर्ट एकतरफा सुनवाई करके कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं करे। कोर्ट कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसका पक्ष भी सुने।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कपिल सिब्बल होंगे जमीयत उलमा-ए-हिंद के अधिवक्ता</h3>



<p>जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ से अधिवक्ता कपिल सिब्बल होने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने कोर्ट से अपील की थी इस याचिका की अरजेंट लिस्टिंग की जाए। जिसके बाद इस मामले में आज सुनवाई है। मौलाना अरशद मदनी ने इसको लेकर ट्वीट किया है और उम्मीद जताई है कि उन्हें अदालत से न्याय मिलेगा। </p>



<p>ये भी पढ़ें: <a href="https://hindikhabar.com/afghanistan-earthquake-of-5-9-magnitude-hits-afghanistan-tremors-felt-in-this-state-of-india/">अफगानिस्तान में 5.9 की तीव्रता का भूकंप, भारत के इस राज्य में महसूस हुए झटके</a></p>



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		<item>
		<title>बच्चों की तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा ‘जिस हॉस्पिटल से बच्चा चोरी हों, तुरंत लाइसेंस रद्द होने चाहिए&#8230;’</title>
		<link>https://hindikhabar.com/supreme-court-takes-strict-action-on-child-trafficking-says-the-hospital-from-which-a-child-is-stolen/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 08:27:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[Child Trafficking]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[UP]]></category>
		<category><![CDATA[UP Govt]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चा तस्करी]]></category>
		<category><![CDATA[बच्चों की तस्करी]]></category>
		<category><![CDATA[बाल तस्करी]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी मामले में सुनवाई करते हुए राज्यों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी नवजात बच्चे को हॉस्पिटल से चुराया जाता है तो सबसे पहले उस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड होना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली- एनसीआर में नवजात बच्चों की तस्करी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी मामले में सुनवाई करते हुए राज्यों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी नवजात बच्चे को हॉस्पिटल से चुराया जाता है तो सबसे पहले उस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड होना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली- एनसीआर में नवजात बच्चों की तस्करी के गैंग के पर्दाफाश से जुड़ी खबर पर संज्ञान लेते हुए की है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">6 महीने में सुनवाई पूरा करने का आदेश</h3>



<p>जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सख्त निर्देश देते हुए निचली अदालतों को बाल तस्करी के मामलों की सुनवाई 6 महीने में पूरी करने का आदेश दिया।</p>



<p>कोर्ट ने कहा, &#8220;देश भर के उच्च न्यायालयों को बाल तस्करी के मामलों में लंबित मुकदमों की स्थिति जानने का निर्देश दिया जाता है। इसके बाद 6 महीने में मुकदमे को पूरा करने और दिन-प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्देश दिया जाएगा।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोर्ट ने यूपी सरकार को लगाई फटकार</h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें तस्करी करके लाए गए एक बच्चे को उत्तर प्रदेश के एक दंपत्ति को सौंप दिया गया था जो बेटा चाहते थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी थी।</p>



<p>आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले से निपटने के तरीके को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों को फटकार लगाई।</p>



<p>बेंच ने कहा, आरोपी को बेटे की चाहत थी और उसने 4 लाख रुपये में बेटा खरीद लिया। अगर आप बेटे की चाहत रखते हैं तो आप तस्करी किए गए बच्चे को नहीं खरीद सकते, वो जानता था कि बच्चा चोरी हुआ है।</p>



<p>शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने जमानत आवेदनों पर ऐसी&nbsp;कार्रवाई की, जिसके कारण कई आरोपी फरार हो गए।</p>



<p>अदालत ने कहा, ये आरोपी समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। जमानत देते समय हाई कोर्ट से कम से कम यह अपेक्षित था कि वो हर सप्ताह पुलिस थाने में उपस्थिति दर्ज कराने की शर्त लगाता। पुलिस सभी आरोपियों का पता लगाने में विफल रही। </p>



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<p></p>
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		<title>चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में 137 नए न्यायिक अधिकारियों ने कठोर प्रशिक्षण पूरा किया</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chandigarh-137-new-judicial-officers-complete-rigorous-training-at-chandigarh-judicial-academy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Apr 2025 15:23:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[PCS JB]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्रीय कानून मंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायाधीश]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायिक अधिकारी]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायिक सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[प्रशिक्षण कार्यक्रम]]></category>
		<category><![CDATA[भारत दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[महिला अधिकारी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Chandigarh : 9 अप्रैल 2025 को चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में एक महत्वपूर्ण अवसर पर 137 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने, जो पंजाब राज्य के 2024-25 बैच के हैं, अपने एक साल के आवासीय इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम को सफलता के साथ पूरा किया। समापन समारोह की अध्यक्षता माननीय राजेश बिंदल, न्यायधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने की, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p id="tw-target-text"><strong>Chandigarh : </strong>9 अप्रैल 2025 को चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में एक महत्वपूर्ण अवसर पर 137 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों ने, जो पंजाब राज्य के 2024-25 बैच के हैं, अपने एक साल के आवासीय इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम को सफलता के साथ पूरा किया।</p>



<p>समापन समारोह की अध्यक्षता माननीय राजेश बिंदल, न्यायधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने की, जबकि माननीय अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री, सम्मानित अतिथि के रूप में समारोह में उपस्थित रहे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समारोह में ये लोग रहे मौजूद</h3>



<p>इस समारोह में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के माननीय शील नागू, मुख्य न्यायधीश, और चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के संरक्षक, माननीय संजीव प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी, माननीय गुरविंदर सिंह गिल, माननीय अनिल क्षेत्रपाल, माननीय महाबीर सिंह सिंधु, और माननीय विनोद भारद्वाज, सदस्य, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी भी उपस्थित रहे।</p>



<p>इस अवसर पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के अन्य माननीय न्यायधीशों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की और नए प्रशिक्षु अधिकारियों को न्यायिक सेवा में उनके भविष्य के लिए आशीर्वाद प्रदान किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="348" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.54-PM-1024x348.jpeg" alt="" class="wp-image-213006368974" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.54-PM-1024x348.jpeg 1024w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.54-PM-300x102.jpeg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.54-PM-768x261.jpeg 768w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.54-PM.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading">PCS (JB) अधिकारियों का 13वां बैच एक साल का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर चुके हैं</h3>



<p>आज जिन अधिकारियों को सम्मानित किया गया, वे PCS (JB) अधिकारियों का 13वां बैच है जो अपना एक साल का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि यह अब तक का सबसे बड़ा बैच था, जिसमें कुल 150 प्रशिक्षु अधिकारी थे—107 महिला अधिकारी और 43 पुरुष अधिकारी। इनमें से 137 अधिकारी—96 महिला अधिकारी और 41 पुरुष अधिकारी—अपने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं और आज उन्हें प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। बाकी अधिकारियों को प्रमाणपत्र उस समय दिया जाएगा जब वे अपनी आवश्यक प्रशिक्षण अवधि पूरी कर लेंगे।</p>



<p>नवीनतम PCS (Judicial Branch) अधिकारी ने चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में आयोजित 52 सप्ताह के इस प्रशिक्षण को सफलता से पूरा किया। यह कार्यक्रम अधिकारीयों को आवश्यक न्यायिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, और संस्थागत अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार किया गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">26 सप्ताह की संस्थागत ट्रेनिंग</h3>



<p>इस कार्यक्रम में 26 सप्ताह की संस्थागत ट्रेनिंग, एक सप्ताह का क्षेत्रीय दौरा, तीन सप्ताह की पुलिस ट्रेनिंग, 16 सप्ताह का कोर्ट अटैचमेंट, और दो सप्ताह का भारत दर्शन अध्ययन दौरा भी शामिल था। प्रशिक्षु अधिकारियों ने न्यायिक कार्यवाही, निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में गहरी समझ और विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त किया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="575" src="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.55-PM-1024x575.jpeg" alt="" class="wp-image-213006368975" srcset="https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.55-PM-1024x575.jpeg 1024w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.55-PM-300x169.jpeg 300w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.55-PM-768x431.jpeg 768w, https://hindikhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/WhatsApp-Image-2025-04-09-at-9.02.55-PM.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>समारोह की शुरुआत माननीय संजीव प्रकाश शर्मा के उद्घाटन संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने न्यायिक प्रशासन में माननीय श्री राजेश बिंदल के योगदान का उल्लेख किया। न्यायमूर्ति बिंदल ने भारत के न्यायिक ढांचे में कई महत्वपूर्ण निर्णय और योजनाओं का समर्थन किया था, जिनमें परिवार कल्याण और बाल न्याय से जुड़े कई मामलों की महत्वपूर्ण सुनवाई शामिल थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शैक्षिक सुधारों की सराहना की गई</h3>



<p>समारोह में चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के प्रमुख, माननीय शील नागू का भी योगदान सराहा गया। उन्होंने अकादमी में किए गए शैक्षिक सुधारों और संरचनात्मक विकास की सराहना की।</p>



<p>समापन समारोह में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने अपने भाषण में न्यायिक सेवा की अहमियत पर प्रकाश डाला और न्यायिक अधिकारियों से न्याय, पारदर्शिता और संवेदनशीलता से कार्य करने की अपील की।</p>



<h3 class="wp-block-heading">न्याय का मतलब समानता की भावना होना चाहिए</h3>



<p>अंत में, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, माननीय राजेश बिंदल ने अपने उद्घाटन भाषण में न्यायिक अधिकारियों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए कहा कि न्याय का मतलब केवल कानून का पालन करना नहीं है, बल्कि हर निर्णय के पीछे मानवता और समानता की भावना होना चाहिए।</p>



<p>संपूर्ण समापन समारोह एक प्रेरणादायक अवसर रहा, जो नए न्यायिक अधिकारियों के लिए न्यायिक सेवा में उत्कृष्टता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/ipl-points-table-2025-gujarat-dominates-the-ipl-points-table-reaches-the-top-with-victory-in-4-matches/">IPL प्वाइंट्स टेबल में गुजरात का जलवा, 4 मैचों की जीत के साथ पहुंचा टॉप पर</a></p>



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		<item>
		<title>2016 में हुई पूरी नियुक्ति प्रक्रिया जोड़-तोड़ और धोखे से भरी…बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में बोले CJI संजीव खन्ना</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-the-entire-recruitment-process-in-2016-was-full-of-manipulation-and-fraud-cji-sanjeev-khanna-said-in-the-bengal-teacher-recruitment-scam-case/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Apr 2025 08:30:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[2016 भर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[उच्च न्यायालय]]></category>
		<category><![CDATA[नौकरी रद्द]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[भर्ती घोटाला]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षक भर्ती]]></category>
		<category><![CDATA[सरकारी नौकरी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट फैसला]]></category>
		<category><![CDATA[स्टेट स्कूल सर्विस कमीशन]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi : सुप्रीम कोर्ट आज एक अहम फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल के 25 हजार से ज्यादा शिक्षकों/स्कूल कर्मचारियों की नौकरी रद्द कर दी है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने इस बारे में पिछले साल आए हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। बता दें कि हाईकोर्ट के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi : </strong>सुप्रीम कोर्ट आज एक अहम फैसला लेते हुए पश्चिम बंगाल के 25 हजार से ज्यादा शिक्षकों/स्कूल कर्मचारियों की नौकरी रद्द कर दी है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने इस बारे में पिछले साल आए हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। इसके अलावा भी इस मसले पर 120 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हुई थीं।</p>



<p>अप्रैल 2024 में हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सभी नौकरियों को रद्द करने के साथ-साथ संबंधित कर्मचारियों से ब्याज सहित पूरा वेतन वसूलने का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि जो लोग नौकरी कर रहे थे, उन्हें वेतन वापस करने की आवश्यकता नहीं होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 2016 में हुई पूरी नियुक्ति प्रक्रिया जोड़-तोड़ और धोखे से भरी थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भर्ती घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख</strong></h3>



<p>2016 में स्टेट स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के माध्यम से हुई भर्ती परीक्षा में 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया था। इस प्रक्रिया के तहत 25,000 से अधिक भर्तियां की गई थीं, लेकिन बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे जोड़-तोड़ और धोखाधड़ी से भरी प्रक्रिया करार देते हुए तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।</p>



<p>कोर्ट ने कहा है कि पिछली भर्ती में शामिल उन उम्मीदवारों को, जिन पर कोई आरोप नहीं था, नई प्रक्रिया में कुछ रियायत दी जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रावधान</strong></h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मानवीय आधार पर एक दिव्यांग कर्मचारी को नौकरी जारी रखने की अनुमति दी है, जबकि अन्य दिव्यांग उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया में कुछ रियायत देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, हाई कोर्ट द्वारा पूरे भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच को चुनौती दी गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट 4 अप्रैल को सुनवाई करेगा।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/ashwani-kumar-debut-match-ipl-mumbai-indians-got-a-new-fast-bowler-ashwini-kumar-made-a-brilliant-debut-in-ipl/">मुंबई इंडियंस को मिला नया तेज गेंदबाज, अश्वनी कुमार ने आईपीएल में किया धमाकेदार डेब्यू</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>नाबालिग के साथ यौन हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-supreme-court-stays-allahabad-high-courts-decision-in-case-of-sexual-violence-against-a-minor/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Mar 2025 07:56:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[इलाहाबाद हाई कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[कानूनी फैसला]]></category>
		<category><![CDATA[नाबालिग पीड़िता]]></category>
		<category><![CDATA[पॉक्सो एक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय न्यायपालिका]]></category>
		<category><![CDATA[यौन हिंसा]]></category>
		<category><![CDATA[रेप का प्रयास]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi : नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इस फैसले को असंवेदनशील बताते हुए स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Delhi :</strong> नाबालिग लड़की के साथ यौन हिंसा के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इस फैसले को असंवेदनशील बताते हुए स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>हाई कोर्ट के फैसले पर विवाद</strong></h3>



<p>17 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने अपने फैसले में कहा था कि पीड़िता को खींचकर पुलिया के नीचे ले जाना, उसके ब्रेस्ट को पकड़ना और पजामे की डोरी तोड़ना &#8220;रेप की कोशिश&#8221; नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी 11 साल की नाबालिग के मामले में की गई थी। जज ने इसे &#8220;महिला की गरिमा पर आघात&#8221; तो माना, लेकिन इसे रेप या रेप का प्रयास मानने से इनकार कर दिया।</p>



<p>हाई कोर्ट ने इस आधार पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 18 (अपराध की कोशिश) और पॉक्सो एक्ट की धाराएं हटा दी थीं। इसके बजाय, कोर्ट ने 354-B (महिला को निर्वस्त्र करने के मकसद से बलप्रयोग) और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी</strong></h3>



<p>हाई कोर्ट के इस फैसले के दूरगामी प्रभाव को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। &#8216;वी द वीमेन&#8217; नामक संस्था ने इस संबंध में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को पत्र भी लिखा था।</p>



<p>इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि आमतौर पर वे हाई कोर्ट के किसी जज पर टिप्पणी नहीं करते, लेकिन इस मामले में अत्यधिक पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि यह फैसला असंवेदनशील है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सरकार और न्यायपालिका की प्रतिक्रिया</strong></h3>



<p>सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ मामलों में कोर्ट को तत्काल दखल देना जरूरी होता है। उन्होंने खासतौर पर फैसले के पैराग्राफ 21, 24 और 26 को लेकर चिंता जताई, जिनमें आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। मेहता ने सुझाव दिया कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे जज संवेदनशील मामलों की सुनवाई न करें।</p>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हाई कोर्ट ने यह फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि चार महीने तक सुरक्षित रखने के बाद सुनाया था। इसके बावजूद, फैसले की भाषा और निष्कर्ष कानूनी दृष्टि से गलत और अमानवीय प्रतीत होते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अगली कार्रवाई</strong></h3>



<p>सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर तत्काल रोक लगाते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई जल्द की जाएगी।</p>



<p>यह भी पढ़ें :&nbsp;<a href="https://hindikhabar.com/gate-2025-result-out-gate-2025-result-released-know-what-was-the-cutoff/">GATE 2025 का रिजल्ट जारी, जानें क्या रही कटऑफ</a></p>



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		<title>NDPS Case : हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से SC का इनकार, खारिज की पंजाब सरकार की याचिका</title>
		<link>https://hindikhabar.com/ndps-case-supreme-court-refuses-to-interfere-in-high-court-order-rejects-punjab-governments-petition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ankur Pratap Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jan 2024 10:31:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[congress mla sukhpal khaira]]></category>
		<category><![CDATA[India News In Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[Latest India News Updates]]></category>
		<category><![CDATA[NDPS Act]]></category>
		<category><![CDATA[NDPS Case]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab And Haryana High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Government]]></category>
		<category><![CDATA[Sukhpal Khaira]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[सुखपाल खैरा]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[NDPS Case : शीर्ष न्यायालय ने पंजाब सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पंजाब सरकार ने कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा को एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) मामले में जमानत देने की मांग की थी। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने चार जनवरी के पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>NDPS Case :</strong><strong> </strong>शीर्ष न्यायालय ने पंजाब सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पंजाब सरकार ने कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा को एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) मामले में जमानत देने की मांग की थी। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने चार जनवरी के पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खैरा पर लगे आरोप गंभीर हैं</h3>



<p>पंजाब सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। पीठ ने वकील सिद्धार्थ लूथरा से कहा कि खैरा पर लगे आरोप गंभीर हैं और मामले की परिस्थिति को देखते हुए वह हाईकोर्ट के आदेश में कोई दखल नहीं देंगे। सुखपाल खैरा को पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया गया था। एसआईटी एनडीपीएस मामले (NDPS Case<strong>)</strong> की जांच कर रही है। इस मामले में 9 लोग दोषी ठहराए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर सुखपाल खैरा का करीबी गुरुदेव सिंह भी शामिल है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खैरा को मिल गई थी जमानत</h3>



<p>15 जनवरी को कपूरथला की अदालत ने खैरा को जमानत दे दी थी। सुखपाल खैरा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। खैरा आम आदमी पार्टी की तरफ से पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। साल 2019 में खैरा ने आम आदमी पार्टी को भी अलविदा कह दिया और पंजाब एकता पार्टी के नाम से अपनी पार्टी बनाई। हालांकि, जून 2021 में खैरा फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एनडीपीएस मामला ड्रग्स से जुड़ा है</h3>



<p>एनडीपीएस मामला ड्रग्स से जुड़ा है। पंजाब पुलिस ने मार्च 2015 में इस मामले में जलालाबाद सदर थाने में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में फाजिल्का की कोर्ट ने 9 लोगों को दोषी ठहराया था। कुछ अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान सुखपाल खैरा का नाम सामने आया था।</p>



<p><strong>यह भी पढ़ें &#8211;</strong> <a href="https://hindikhabar.com/big-news/udhayanidhi-stalin-on-ram-mandir-udhayanidhi-stalin-gave-controversial-statement-on-ram-mandir-in-hindi/">उदयनिधि स्टालिन का विवादित बयान, राम मंदिर के विरोध में की टिप्पणी</a></p>



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