बाबा बैद्यनाथ धाम के पेड़े को जीआई टैग से जोड़ने की प्रक्रिया जारी, उत्पाद की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम

देवघर: देवघर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देशानुसार विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथधाम के पेड़ा (प्रसाद) को जीआई टैगिंग से जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही हैं। साथ ही देवघर में निर्मित पेड़ा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार के उद्देश्य से पेड़ा निर्माण से संबंधित उद्यमियों का जिला प्रशासन द्वारा भौगोलिक सांकेतन ( Geographical Indication ) किया जाना है, ताकि बाबा बैद्यनाथधाम के पेड़ा को जीआई टैग से जोड़ा जा सके।

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख़

इसके अलावे पेड़ा उद्योग के छोटे-बड़े व्यवसायियों को जीआई टैगिंग के फायदों से अवगत कराते हुए उनका निबंधन होना आवश्यक हैं, ताकि निबंधित उद्यमी अपने उत्पाद में जीआई टैग (Logo) का प्रयोग करते हुए देश एवं विदेशों में भी अपने सामानों की बिक्री कर सकें। वहीं पेड़ा व्यापारियों के सुविधा हेतु एसोसिएशन से ज्यादा-ज्यादा लोग निबंधित हो, ताकि बाबाधाम के पेड़ा को जीआई टैग से जोड़ा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में निर्मित उत्पाद की गुणवत्ता को बढ़ाना है। ऐसे में जिले के पेड़ा उद्यमी अपना रजिस्ट्रेशन दिनांक 30 सितम्बर 2021 करा सकते है। इसके साथ ही किसी प्रकार की जानकारी को लेकर आवेदक जिला उद्योग केन्द्र कार्यालय से संपर्क कर सकते है।

प्रतिदिन लगभग 50 से 100 किलो पेड़ा बेचते हैं व्यापारी

जिला लघु कुटीर उद्योग बोर्ड (डीएसएससीआईबी) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, देवघर जिले के बाबाधाम और घोरमारा में 100 स्थायी बड़े और छोटे पेड़े की दुकानें हैं। प्रत्येक व्यापारी प्रतिदिन लगभग 50 से 100 किलो पेड़ा बेचते हैं।

डीएसएससीआईबी के समन्वयक नीरज कुमार ने कहा कि जीआई टैग से पेड़ा की बिक्री काफी हद तक बढ़ जाएगी। देवघर के पेड़ा प्रसाद के बारे में वर्तमान में मुश्किल से चार से पांच राज्यों के लोग जानते हैं। लेकिन जीआई टैग मिलने के बाद यह देश-विदेश में मशहूर हो जाएगी।

उन्होंने आगे कहा, बाबा बैद्यनाथ मंदिर भक्तों के लिए बंद रहने से पिछले दो वर्षों में पेड़े की बिक्री में कमी आई है। लेकिन जीआई टैगिंग के बाद देश भर में पेड़ा की ऑनलाइन बिक्री महामारी की स्थिति में भी जारी रहेगी और बिक्री को बढ़ाने में मदद करेगी।

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