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Stubble Burning: बढ़ रही प्रदूषण के बीच पंजाब सरकार की पहल से राहत भरी ख़बर

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Stubble Burning: दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रदूषण को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजहों में से एक पराली जलने की घटना को माना जाता है। लेकिन इस बीच पंजाब से थोड़ी राहत भरी ख़बर सामने आई है। पंजाब सरकार की कोशिश से प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं की संख्या में कमी आई है। सरकार ने बताया कि पराली जलाने की घटना 5798 से घटकर 2704 हो गई। 15 सितंबर 2023 से 25 अक्टूबर 2023 के बीच पराली जलाने की घटनाओं की संख्या, सितंबर 2022 से 25 अक्टूबर 2022 की तुलना में 53% की कमी आई है।

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Stubble Burning: विकल्प को अपनाया जा रहा

सरकार ने बताया है कि आंकड़ों में कमी आने की मुख्य वजह यह है कि मशीनों का समय पर वितरण, बेकार पड़ी मशीनों का उपयोग, विभिन्न उद्योगों में पराली का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा इन-सीटू और एक्स-सीटू तरीकों को बढ़ावा देने के लिए अभियान और किसानों से अपील की जा रही है ताकि एय क्वालिटी को बेहतर किया जा सके।

पराली न जलाने के लिए किया जा रहा है प्रेरित

पंजाब सरकार ने बताया कि पिछली सरकारों के विपरीत पराली जलाने पर अंकुश लगाया जा रहा है और किसानों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़े सरकार इसका भी ख्याल रख रही है। बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने प्रदेश में पराली जलाने की गंभीर समस्या के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके निरंतर प्रयासों से प्रभावशाली परिणाम मिले हैं।  तो वहीं आग लगने की घटना में भी कमी आई है। इसकी संख्या 2022 में 5798 से घटकर 2023 में 2704 हो गई है, जो 25 अक्टूबर 2022 की तुलना में 25 अक्टूबर 2023 तक 53% की कमी दर्ज की गई।

इन-सीटू और एक्स-सीटू पहल किया लागू

बता दें कि 31 लाख हेक्टेयर में धान की खेती वाला राज्य पंजाब 20 मिलियन टन धान का भूसा पैदा करता है। इस चुनौती से निपटने के लिए, सरकार ने एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया, इन-सीटू (ऑन-फील्ड) और एक्स-सीटू (ऑफ-फील्ड) धान के भूसे प्रबंधन में पहल को लागू किया। इस पहल से किसानों के व्यवहार में बदलाव और किसानों से संचार किया गया और कड़े कदमों के माध्यम से पहल के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी की गई।

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