SC ने बुलडोजर एक्शन पर अनुच्छेद 142 के तहत सुनाया फैसला “राज्य सरकार नहीं कर सकती मनमानी …”

SC Bulldozer Action
SC Bulldozer Action: बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों को आगे बढ़ाने और वैधानिक अधिकारों को साकार करने के लिए कार्यपालिका को निर्देश जारी किए जा सकते हैं। जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना संपत्तियां नहीं तोड़ी जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों को बुलडोजर एक्शन को लेकर अब अपनी चाल बदलनी पड़ेगी। जस्टिस गवई ने फैसला पढ़ते हुए कहा, “राज्य सरकार क्या न्यायिक कार्य कर सकती है? क्या किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार राज्य प्रशासन या कार्यपालिका के पास है? मुझे लगता है, नहीं है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इस तरह के एक्शन पर रोक लगाया जाए।”
मुआवजा देने की व्यवस्था
जस्टिस बीआर गवई ने आगे कहा, “राज्य बुलडोजर एक्शन को लेकर मनमानी नहीं कर सकता। हमने जो गाइडलाइन तय की हैं, वो सभी राज्यों पर लागू होती हैं। यदि, गलत तरीके से किसी व्यक्ति का घर तोड़ा जाता है, तो उसे मुआवजा देने की व्यवस्था होनी चाहिए।”
अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को संपूर्ण न्याय के लिए पूरे भारत में प्रवर्तनीय आदेश पारित करने की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यूपी सरकार को फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर 17 सितंबर को अंतरिम रोक लगाई थी, जिसमें कहा गया था कि हम इसको लेकर गाइडलाइन जारी करेंगे।
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