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	<title>स्वास्थ्य News, स्वास्थ्य की खबरें, Health Tips, Health Updates - Hindi Khabar</title>
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		<title>बदलते मौसम में बढ़ रही कफ की समस्या, घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, डिटेल में पढ़ें</title>
		<link>https://hindikhabar.com/seasonal-change-cough-problem-home-remedies-relief/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 13:12:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[Cough Remedies : मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। दिन में तेज धूप और शाम को अचानक मौसम बदलकर बारिश और तेज हवाओं का रूप ले रहा है। इसके साथ ही बढ़ते प्रदूषण और धूल-मिट्टी के कारण लोगों में फेफड़ों से जुड़ी परेशानियां भी आम &#8230;]]></description>
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<p><strong>Cough Remedies :</strong> मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। दिन में तेज धूप और शाम को अचानक मौसम बदलकर बारिश और तेज हवाओं का रूप ले रहा है। इसके साथ ही बढ़ते प्रदूषण और धूल-मिट्टी के कारण लोगों में फेफड़ों से जुड़ी परेशानियां भी आम होती जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख समस्या कफ का जमना है, जिसे अक्सर लोग हल्की गले की खराश समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो फेफड़ों में कफ का जमाव बढ़ जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई, सीने में भारीपन और लगातार खांसी जैसी परेशानियां शुरू हो सकती हैं। कई बार यह स्थिति गंभीर रूप भी ले सकती है, खासकर उन लोगों में जो पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या COPD जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्रॉनिक कफ बन रहा बड़ी स्वास्थ्य समस्या</h3>



<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में एक बड़ी आबादी लगातार खांसी यानी क्रॉनिक कफ से प्रभावित है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए तो यह आगे चलकर गंभीर श्वसन रोगों का कारण बन सकता है। कुछ मामलों में बिना किसी पूर्व अस्थमा इतिहास के भी मरीजों में सांस संबंधी समस्याएं विकसित हो जाती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फेफड़ों में कफ का कार्य और समस्या</h3>



<p>डॉक्टरों के अनुसार कफ शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जो धूल, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कणों को फेफड़ों तक पहुंचने से रोकता है। लेकिन जब इसका उत्पादन सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह सांस लेने की प्रक्रिया को बाधित करने लगता है और समस्या पैदा करता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत</h3>



<p>दवाइयों के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए कई लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। ये उपाय न केवल कफ को ढीला करके बाहर निकालने में मदद करते हैं, बल्कि श्वसन तंत्र को भी बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।</p>



<p>भाप लेना सबसे प्रभावी घरेलू उपायों में से एक माना जाता है। गर्म पानी की भाप लेने से श्वसन मार्ग में जमा कफ पतला हो जाता है और आसानी से बाहर निकलता है। इसमें नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें डालने से सीने की जकड़न में भी राहत मिल सकती है।</p>



<p>शरीर को पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड रखना भी बेहद जरूरी है। गुनगुना पानी, हर्बल चाय और शहद-नींबू पानी का सेवन कफ को पतला करने में मदद करता है, जिससे खांसी के जरिए इसे बाहर निकालना आसान हो जाता है। कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग भी लाभकारी माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रसोई में मौजूद प्राकृतिक उपाय</h3>



<p>अदरक और हल्दी में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण फेफड़ों की सूजन और जकड़न को कम करने में मदद करते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन संक्रमण से लड़ने में सहायक होता है। शहद गले को आराम पहुंचाता है और कफ को ढीला करता है।</p>



<p>काली मिर्च और लहसुन भी प्राकृतिक रूप से कफ को कम करने में मदद करते हैं। काली मिर्च में मौजूद तत्व बलगम को तोड़ने में सहायक होते हैं, जबकि लहसुन प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करता है। रात में हल्दी वाला दूध पीने से भी छाती में जमा कफ कम होने में राहत मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हर्बल चाय और गरारे भी प्रभावी</h3>



<p>पुदीना, अजवाइन और मुलेठी की चाय का सेवन श्वसन मार्ग को साफ करने में मदद करता है। वहीं गले में खराश या जलन होने पर गुनगुने नमक पानी से गरारे करना भी लाभकारी माना जाता है। दिन में दो से तीन बार गरारे करने से गले की समस्या में राहत मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">श्वसन व्यायाम से भी सुधार</h3>



<p>विशेषज्ञों के अनुसार गहरी सांस लेने के अभ्यास (डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज) से फेफड़ों में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और जमा कफ धीरे-धीरे कम होने लगता है। नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता भी सुधर सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कब लें डॉक्टर की सलाह</h3>



<p>यदि कफ लंबे समय तक बना रहे और इसके साथ सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, बुखार या लगातार बढ़ती खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।</p>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपाय केवल शुरुआती राहत के लिए हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/dehradun-gis-technology-drug-network-surveillance/">देहरादून में नशे के खिलाफ हाईटेक रणनीति, GIS तकनीक से होगी ड्रग नेटवर्क की निगरानी</a></p>



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		<item>
		<title>जयपुर एयरपोर्ट पर महिला यात्री में Ebola Virus के लक्षण, अस्पताल में भर्ती</title>
		<link>https://hindikhabar.com/jaipur-airport-woman-passenger-with-suspected-ebola-symptoms-hospitalised/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 07:20:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Ebola Virus Case]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
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		<category><![CDATA[Rajasthan Ebola Virus]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan News]]></category>
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					<description><![CDATA[Rajasthan Ebola Virus : राजस्थान में इबोला वायरस का पहला केस सामने आया है। राजस्थान धूमने आई एक महिला में इबोला के लक्षण पाए गए हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। महिला को आइसोलेशन में रखा गया है। जहां उसकी पल-पल की अपडेट ली जा रही है। जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित जांच &#8230;]]></description>
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<p><strong>Rajasthan Ebola Virus :</strong> राजस्थान में इबोला वायरस का पहला केस सामने आया है। राजस्थान धूमने आई एक महिला में इबोला के लक्षण पाए गए हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड पर है। महिला को आइसोलेशन में रखा गया है। जहां उसकी पल-पल की अपडेट ली जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित जांच</h3>



<p>बता दें कि महिला युगांडा से राजस्थान (जयपुर) घूमने के लिए आई थी। जानकारी के मुताबिक महिला आज सुबह करीब 4:30 बजे एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह होते हुए जयपुर पहुंची थी। जयपुर एयरपोर्ट पर नियमित स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें इबोला संक्रमण जैसे लक्षण की आशंका जताई गई। इसके बाद तत्काल उसे एयरपोर्ट से आरयूएचएस अस्पताल भेजा गया।</p>



<p>राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि अभी इबोला की पुष्टि नहीं हुई है। महिला के सैंपल जांच के लिए पुणे की विशेष लैब भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल महिला का इलाज जारी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य विभाग की लोगों से अपील</h3>



<p>स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिकित्सा टीम को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील की है। विभाग ने कहा कि लोग केवल आधिकारिक सूचना और जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हैदराबाद हवाई अड्डे पर भी आया था केस</h3>



<p>गुरुवार को एक सूडानी नागरिक हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, जहां जांच के दौरान उसमें इबोला जैसे कुछ शुरुआती लक्षण दिखाई दिए। एहतियात के तौर पर उसे आगे की चिकित्सकीय जांच और निगरानी के लिए आइसोलेशन केंद्र भेजा गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की विशेष स्क्रीनिंग</h3>



<p>स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यात्री हाल ही में दक्षिण सूडान और युगांडा की यात्रा करके लौटा है। इन क्षेत्रों में इबोला वायरस के मामलों की खबरों को देखते हुए एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की विशेष स्क्रीनिंग की जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">संदिग्ध लक्षणों के आधार पर निगरानी</h3>



<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इसे इबोला का पुष्टि किया गया मामला नहीं माना जा रहा है। केवल यात्रा इतिहास और कुछ संदिग्ध लक्षणों के आधार पर उसे निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकीय जांच और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि मामला इबोला संक्रमण से जुड़ा है या नहीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है इबोला वायरस के लक्षण</h3>



<p>इबोला वायरस के लक्षण फ्लू (Flu) जैसे होते हैं जो संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर अचानक सामने आ सकते हैं। शुरुआती दिनों में फ्लू जैसे सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। तेज बुखार, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, गंभीर दस्त, उल्टी, पेट दर्द और बिना किसी स्पष्ट कारण के त्वचा या अंगों से अत्यधिक रक्तस्राव (हेमरेज) होना शामिल है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गंभीर लक्षण</h3>



<p>जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पाचन तंत्र प्रभावित होता है और स्थिति गंभीर हो जाती है। उल्टी और दस्त (पानी की तरह), पेट में तेज दर्द, भूख न लगना आदि हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंतिम और जानलेवा चरण</h3>



<p>असामान्य रूप से रक्तस्राव- नाक, मुंह, मसूड़ों या मल-मूत्र में खून आना, त्वचा पर लाल चकत्ते (Rashes) का उभरना, मल्टी-ऑर्गन फेल होना और शॉक की स्थिति हो सकती है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/punjab-vigilance-big-action-asi-arrested-red-handed-taking-bribe-130000-rs/">विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, 1,30,000 रुपए रिश्वत लेते ASI रंगे हाथों गिरफ्तार</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>भगवंत मान सरकार ने &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; का किया विस्तार, निजी अस्पतालों में 17 और इलाजों को मंजूरी, अकेले रहने वाले को भी मिलेगा लाभ</title>
		<link>https://hindikhabar.com/bhagwant-mann-government-mukhyamantri-sehat-yojana-expanded-17-new-treatments-approved-cashless-benefits-private-hospitals/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:36:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwant Mann]]></category>
		<category><![CDATA[Cashless treatment]]></category>
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		<category><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab News]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana : लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से पहुंचाने और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भगवंत मान सरकार ने &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 17 और मेडिकल प्रक्रियाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Mukhyamantri Sehat Yojana :</strong> लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर ढंग से पहुंचाने और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भगवंत मान सरकार ने &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में 17 और मेडिकल प्रक्रियाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही योजना का दायरा बढ़ाकर अकेले रहने वाले व्यक्तियों को भी इसमें शामिल किया गया है। यह फैसला राज्य की स्वास्थ्य बीमा योजना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>



<p>पंजाब के अनगिनत परिवारों के लिए अस्पताल जाना अक्सर लंबी कतारों, भीड़-भाड़ वाले वार्डों और इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा करना माना जाता है। इस बोझ को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को और व्यापक बनाते हुए उन 17 मेडिकल प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कराने की अनुमति दे दी है, जो पहले केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित थीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा</h3>



<p>इस फैसले से केवल सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित प्रक्रियाओं की सूची और छोटी हो गई है और अब लाभार्थियों को काफी बड़े स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क से इलाज कराने का अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इससे खासकर उन जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार होगा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं सीमित हैं या सरकारी अस्पतालों पर अधिक मरीजों की निर्भरता है। उन्होंने कहा, &#8220;इससे बड़े सरकारी अस्पतालों पर दबाव घटेगा, प्रतीक्षा समय कम होगा और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बच्चों और दुर्घटना पीड़ितों के लिए जरुरी</h3>



<p>नई स्वीकृत प्रक्रियाएं विभिन्न मेडिकल विशेषताओं से संबंधित हैं, जिससे लोगों को भीड़-भाड़ वाले बड़े अस्पतालों में परेशान होने की बजाय अपने घर के नजदीक ही इलाज मिल सकेगा। कान, नाक और गला (ईएनटी) इलाज के तहत अब सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में नाक की हड्डी के फ्रैक्चर की सेटिंग और एडेनोइडेक्टोमी जैसे ऑपरेशन कराए जा सकेंगे। ये आम ऑपरेशन हैं, जिनमें खास तौर पर बच्चों और दुर्घटना पीड़ितों के लिए समय पर इलाज जरूरी होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">निजी अस्पतालों में होगी उपलब्धता</h3>



<p>जनरल सर्जरी के क्षेत्र में सबसे बड़ा विस्तार किया गया है। हाइड्रोसील ऑपरेशन, फोड़े का इलाज, एपेंडिक्स सर्जरी और ओपन तथा लैप्रोस्कोपिक दोनों तरह की गॉल ब्लैडर सर्जरी अब योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों की प्रतीक्षा घटेगी और घर के नजदीक इलाज का लाभ मिलेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यौन शोषण की पीड़िताओं की…</h3>



<p>महिला स्वास्थ्य सेवाओं को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। विस्तारित सूची में 12 सप्ताह से अधिक समय के गर्भपात संबंधी प्रक्रिया, हिस्टेरोटॉमी, गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए अस्पताल में भर्ती और नाबालिग लड़कियों, अविवाहित यौन रूप से निष्क्रिय महिलाओं और यौन शोषण की पीड़िताओं की एनेस्थीसिया के तहत जांच को शामिल किया गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फ्रैक्चर के ऑपरेशन जैसी सर्जरी का लाभ</h3>



<p>इन सेवाओं के शामिल होने से जरूरतमंद और कमजोर वर्गों को और अधिक आसानी से एवं समय पर इलाज मिल सकेगा। इसी तरह नेत्र रोग और ऑर्थोपेडिक सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। अब पटेरीजियम एक्सीजन और एंट्रोपियन करेक्शन जैसी आंखों से संबंधित प्रक्रियाएं भी निजी अस्पतालों में कराई जा सकेंगी। वहीं ऑर्थोपेडिक मरीजों को टेंडन रिलीज, छोटे जोड़ों की चोटों के इलाज और टखने के फ्रैक्चर के ऑपरेशन जैसी सर्जरी का लाभ मिलेगा। इन नई प्रक्रियाओं के पैकेज रेट 2,000 रुपये से 27,800 रुपये तक निर्धारित किए गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अकेले रहने वाले व्यक्ति उठा सकेंगे लाभ</h3>



<p>इस एलान के साथ योजना के दायरे का एक और महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है। अब अकेले रहने वाले व्यक्ति, जिनमें वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं और स्वतंत्र रूप से रहने वाले अन्य व्यक्ति शामिल हैं, भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जिनके बच्चे विदेशों में रहते हैं…</h3>



<p>सबके लिए उपलब्ध यह स्वास्थ्य बीमा प्रोग्राम पहले केवल दो या अधिक सदस्यों वाले परिवारों तक सीमित था। अब इसका लाभ उन माता-पिता को भी मिलेगा जिनके बच्चे विदेशों में रहते हैं। आवेदन देने के लिए पंजाब का आधार कार्ड और वोटर पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जबकि 18 वर्ष से कम उम्र के आवेदकों को जन्म प्रमाण पत्र देना होगा। अकेले रहने वाले व्यक्तियों को नामांकन के लिए एक घोषणा पत्र जमा करवाना होगा, जिसकी सत्यापन स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा की जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा कवच</h3>



<p>राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में लगभग 65 लाख परिवार इस योजना के तहत कवर किए जा चुके हैं। इस समय 824 अस्पताल, जिनमें सरकारी, केंद्र सरकार के और सूचीबद्ध निजी अस्पताल शामिल हैं, योजना के तहत इलाज प्रदान कर रहे हैं। लगभग 2,300 बीमारियों और मेडिकल प्रक्रियाओं को कवर करने वाली और लगातार विकसित होती हुई मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बन चुकी है, जो पहले से कहीं अधिक लोगों तक कैशलेस इलाज की सुविधा पहुंचा रही है।</p>



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		<title>यौन स्वास्थ्य की समस्या सिर्फ उम्र नहीं, हार्ट से जुड़ा हो सकता है कनेक्शन, कभी न करें नजरअंदाज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/sexual-health-problems-not-just-age-linked-to-heart-connection-never-ignore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:55:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Cardiology]]></category>
		<category><![CDATA[Erectile Dysfunction]]></category>
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					<description><![CDATA[Erectile Dysfunction : उम्र बढ़ने के साथ शरीर कई बदलावों के संकेत देने लगता है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, नींद में गड़बड़ी, खर्राटे या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर बढ़ती उम्र का हिस्सा समझी जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत कई बार दिल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Erectile Dysfunction :</strong> उम्र बढ़ने के साथ शरीर कई बदलावों के संकेत देने लगता है, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, नींद में गड़बड़ी, खर्राटे या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आमतौर पर बढ़ती उम्र का हिस्सा समझी जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये संकेत कई बार दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चार प्रमुख संकेतों का जिक्र</h3>



<p>कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन (25 वर्षों के अनुभव के साथ) ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में ऐसे चार प्रमुख संकेतों का जिक्र किया है, जिन्हें पुरुष अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उनके अनुसार, ये लक्षण भविष्य में हार्ट संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इरेक्टाइल डिस्फंक्शन भी है सकेंत</h3>



<p>पहला संकेत इरेक्टाइल डिस्फंक्शन माना गया है। इसे केवल यौन समस्या समझना गलत हो सकता है, क्योंकि यह शरीर में ब्लड फ्लो की कमी या ब्लड वेसल्स में शुरुआती ब्लॉकेज का संकेत भी हो सकता है। कई मामलों में यह हार्ट की गंभीर समस्या से वर्षों पहले दिखाई दे सकता है, इसलिए अचानक ऐसी परेशानी होने पर हार्ट जांच की सलाह दी जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पेट की चर्बी बढ़ना और शारीरिक गतिविधि</h3>



<p>दूसरा संकेत लो टेस्टोस्टेरोन है, जिसे कई लोग उम्र बढ़ने का सामान्य प्रभाव मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे खराब लाइफस्टाइल, पेट की चर्बी बढ़ना और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी वजहें भी हो सकती हैं, जिन्हें सुधारकर हार्मोनल संतुलन बेहतर किया जा सकता है।</p>



<p><strong>पोस्ट देखें-</strong> <strong>https://www.instagram.com/reel/DZC4d0uop40/?utm_source=ig_web_copy_link</strong></p>



<h3 class="wp-block-heading">पुरुषों को हृदय पर देना चाहिए ध्यान</h3>



<p>तीसरा संकेत पुरुषों में हृदय रोग का जल्दी विकसित होना है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को एस्ट्रोजन हार्मोन से मिलने वाली प्राकृतिक सुरक्षा नहीं होती, जिसके कारण उनमें हार्ट संबंधी समस्याएं अपेक्षाकृत कम उम्र में सामने आ सकती हैं। इसलिए 30 से 40 की उम्र के बीच ही दिल की सेहत पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तेज खर्राटे, नींद के दौरान बार-बार जागना</h3>



<p>चौथा संकेत स्लीप एपनिया है। तेज खर्राटे, नींद के दौरान बार-बार जागना और पर्याप्त आराम के बावजूद थकान महसूस होना इसके लक्षण हो सकते हैं। यह स्थिति आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट रिद्म की गड़बड़ियों का कारण बन सकती है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।</p>



<p><strong>Disclaimer : </strong>यह जानकारी शोध और विशेषज्ञ राय पर आधारित है, इसे चिकित्सकीय सलाह न मानें। किसी भी नई गतिविधि या बदलाव से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।</p>



<p><strong> ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/royal-rajput-danish-instagram-love-story-dark-truth-dehradun-case/">‘रॉयल राजपूत’ निकला दानिश, इंस्टाग्राम की इस ‘लव स्टोरी’ के पीछे का खौफनाक सच जानकर कांप उठेंगे आप!</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>&#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के तहत 45 लाख से अधिक पंजाबियों का रजिस्ट्रेशन, ऑर्थोपेडिक उपचार प्रमुख स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल : डॉ. बलबीर सिंह</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-mukhyamantri-sehat-yojana-45-lakh-registration-orthopedic-services/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 05:37:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Cashless Health Scheme Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Balbir Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Hip Replacement Surgery]]></category>
		<category><![CDATA[Knee Replacement India]]></category>
		<category><![CDATA[Orthopedic Treatment Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Mukhyamantri Sehat Yojana]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006416866</guid>

					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटना से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के आंकड़ों के अनुसार, ऑर्थोपेडिक उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं। इस स्थिति को उजागर करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता चला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab News : </strong>पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटना से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के आंकड़ों के अनुसार, ऑर्थोपेडिक उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं।</p>



<p>इस स्थिति को उजागर करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता चला है कि योजना के तहत अब तक हड्डी, जोड़ और ट्रॉमा से संबंधित उपचारों पर ₹84 करोड़ से अधिक ख़र्च किया जा चुका है। यह बढ़ती सर्जिकल ज़रूरतों और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक विस्तारित पहुँच को दर्शाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नी रिप्लेसमेंट सबसे अधिक किए गए</h3>



<p>आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत सबसे अधिक घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए हैं, इसके बाद कूल्हे की सर्जरी और प्लेट, नेल्स व अन्य इम्प्लांट्स के माध्यम से फ्रैक्चर फिक्सेशन के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं। ये प्रक्रियाएँ अब जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस उपचार के तहत नियमित रूप से की जा रही हैं।</p>



<p>मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में अब तक 45 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है। लुधियाना जिले में 4.8 लाख से अधिक और पटियाला में लगभग 4.1 लाख लाभार्थी योजना के तहत दर्ज किए गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बढ़ती उम्र की आबादी में ये समस्याएं अधिक</h3>



<p>ऑर्थोपेडिक मामलों में बढ़ोतरी, जनस्वास्थ्य में आ रहे व्यापक बदलाव को भी दर्शाती है। विशेष रूप से बढ़ती उम्र की आबादी में जोड़ों के घिसाव, लगातार दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याएँ अधिक देखने को मिल रही हैं। सरकारी अस्पतालों में घुटनों और कूल्हों की ख़राबी, पुराना जोड़ दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई वाले मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है।</p>



<p>ऑर्थोपेडिक उपचारों में अक्सर महँगे इम्प्लांट्स, लंबा इलाज और पुनर्वास की आवश्यकता होती है, जो परिवारों पर परंपरागत रूप से भारी आर्थिक बोझ डालते रहे हैं।</p>



<p>राजपुरा के निकट खेड़ा गज्जू निवासी 43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति व्यक्तिगत रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई।</p>



<p>फैक्ट्री में काम करते समय &#8216;तनेजा&#8217; के साथ एक हादसा हो गया था। इसके बाद चलना उनके लिए मुश्किल होता गया। अचानक उठने वाला दर्द उन्हें बीच कदम पर रोक देता था और दीवार का सहारा लेने पर मजबूर कर देता था। घुटने के आसपास सूजन लगातार बनी रही और जकड़न ने सामान्य गतिविधियों को भी कठिन बना दिया। कई बार खड़े होने से पहले उन्हें रुककर सोचना पड़ता था कि उनका पैर उनका भार सह पाएगा या नहीं।</p>



<p>उन्हें 6 मई को राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती करवाया गया और अगले दिन लिगामेंट टियर का उपचार किया गया। डॉक्टरों ने गंभीर जोड़ दर्द, सूजन, अस्थिरता और वजन सहने में कठिनाई जैसे लक्षण दर्ज किए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">₹86,750 का उपचार पूरी तरह कैशलेस</h3>



<p>मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उन्हें ₹86,750 का उपचार पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध करवाया गया। 12 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली और वे घर लौटे, बिना उस भारी मेडिकल बिल की चिंता के जो उनकी बीमारी के बोझ को और बढ़ा सकता था।</p>



<p>गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूँ। सेहत कार्ड का शुक्रिया कि मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। यह योजना हमारे जैसे परिवारों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम कर रही है और महँगे इलाज को सुलभ बना रही है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऑर्थोपेडिक बीमारियों का तेजी से बढ़ रहा बोझ</h3>



<p>पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे पंजाब में सुलभ और किफायती सर्जिकल देखभाल को और मज़बूत करने की आवश्यकता सामने आई है।&#8221; उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सरकार हज़ारों मरीज़ों को कैशलेस घुटना, कूल्हा और ट्रॉमा उपचार उपलब्ध करवा रही है, जिससे आर्थिक बोझ कम हो रहा है और मरीज़ों की गतिशीलता, रिकवरी तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि महज चार महीनों में ₹84 करोड़ से अधिक का ख़र्च केवल बढ़ते स्वास्थ्य उपयोग को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह राज्य में गतिशीलता बहाल करने, विकलांगता कम करने और मरीज़ों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://अमेरिका की USTR रिपोर्ट से मचा हड़कंप, भारत समेत कई देशों पर टैरिफ का खतरा">अमेरिका की USTR रिपोर्ट से मचा हड़कंप, भारत समेत कई देशों पर टैरिफ का खतरा</a></p>



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		<item>
		<title>Obesity Awareness : “कम खाओ-ज्यादा चलो” की सोच मोटापे के लिए क्यों अधूरी है? जानें क्या है सच</title>
		<link>https://hindikhabar.com/awareness-why-eat-less-move-more-is-incomplete-understanding-of-obesity-truth-explained/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 06:03:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Living]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle Disease]]></category>
		<category><![CDATA[Medical Facts]]></category>
		<category><![CDATA[Metabolism]]></category>
		<category><![CDATA[Obesity Awareness]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006416810</guid>

					<description><![CDATA[Obesity Awareness : मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है। वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Obesity Awareness :</strong> मोटापा आज भी दुनिया की सबसे गलत समझी जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे जानकारी की कमी से ज्यादा वजह पुरानी धारणाएं, अधूरी डाइट सलाह और सामाजिक सोच है, जिसने सही समझ को प्रभावित किया है।</p>



<p>वॉय इंडिया (पूर्व में अर्लीफिट) की सह-संस्थापक और सीओओ सलोनी पालीवाल के अनुसार, मोटापे को केवल जीवनशैली की समस्या मानना सही नहीं है, क्योंकि इसमें जेनेटिक कारण, हार्मोन, नींद, तनाव, आंतों के बैक्टीरिया और पर्यावरण जैसे कई कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि एक जैसी डाइट और एक्टिविटी के बावजूद लोगों का वजन अलग-अलग हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हार्मोन भी निभाते हैं अहम भूमिका</h3>



<p>विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि “कम खाओ और ज्यादा चलो” जैसी सलाह मोटापे के समाधान के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है। यह तरीका सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन मोटापे जैसी जटिल स्थिति में भूख और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह यह धारणा भी गलत है कि वजन कम न हो पाने की वजह सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी होती है, जबकि घ्रेलिन, लेप्टिन, इंसुलिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन भूख और खाने की इच्छा को प्रभावित करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंगों के आसपास चर्बी हो सकती है जमा</h3>



<p>कई मामलों में मोटापा बाहर से स्पष्ट नहीं दिखता, क्योंकि शरीर के अंदर अंगों के आसपास चर्बी जमा हो सकती है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है। दक्षिण एशियाई आबादी में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है, इसलिए केवल वजन या बीएमआई के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन पूरी तरह सही नहीं माना जाता।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं</h3>



<p>यह भी देखा गया है कि वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होता, क्योंकि शरीर अक्सर अपने पुराने वजन की ओर लौटने की कोशिश करता है। इसी वजह से कई लोगों को लंबे समय तक मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। जीएलपी-1 दवाओं जैसे सेमाग्लूटाइड और टिरजेपाटाइड को लेकर भी कई गलतफहमियां हैं, जबकि क्लीनिकल ट्रायल्स में इन्हें भूख और मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करने में प्रभावी पाया गया है और इन्हें इलाज का हिस्सा माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">WHO मानती है क्रॉनिक बीमारी</h3>



<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रमुख मेडिकल संस्थाएं मोटापे को एक क्रॉनिक बीमारी मानती हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्लीप एपनिया और कई प्रकार के कैंसर सहित 200 से अधिक बीमारियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में इसे सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या मानना सही नहीं है, बल्कि समय पर सही इलाज और मेडिकल सलाह लेना जरूरी माना जाता है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/ghaziabad-surya-murder-case-bulldozer-action-notice-placed-at-asad-house/">Ghaziabad Surya Murder Case : सूर्या हत्याकांड मामले पर बुलडोजर एक्शन, असद के घर पर चिपका नोटिस</a></p>



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		<item>
		<title>मसूड़ों की सूजन महिलाओं की फर्टिलिटी को कर सकती है प्रभावित, एग्स की क्वालिटी पर असर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/gum-inflammation-affects-womens-fertility-eggs-quality-impact/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 12:20:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Fertility Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Eggs]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Oral Health]]></category>
		<category><![CDATA[Periodontal Health]]></category>
		<category><![CDATA[Womens Health]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006416712</guid>

					<description><![CDATA[Womens Health : महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर अक्सर हार्मोन, उम्र, लाइफस्टाइल या किसी बीमारी के प्रभाव की बात होती है। लेकिन हाल ही में एक रिसर्च में यह सामने आया है कि मसूड़ों की सेहत भी फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है। हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के रिसर्चर के अध्ययन के अनुसार, मुंह में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Womens Health : </strong>महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर अक्सर हार्मोन, उम्र, लाइफस्टाइल या किसी बीमारी के प्रभाव की बात होती है। लेकिन हाल ही में एक रिसर्च में यह सामने आया है कि मसूड़ों की सेहत भी फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है। हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के रिसर्चर के अध्ययन के अनुसार, मुंह में लंबे समय तक बनी सूजन महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है और कुछ मामलों में बांझपन का खतरा भी बढ़ा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ओवरी तक फैल सकती है सूजन</h3>



<p>स्टडी में पाया गया कि दांतों और मसूड़ों में लंबे समय तक बनी सूजन केवल मुंह तक सीमित नहीं रहती। यह शरीर में इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर अन्य अंगों तक प्रभाव डाल सकती है, जिनमें ओवरी भी शामिल हैं। रिसर्च जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन में यह पाया गया कि मुंह में सूजन से निकलने वाले संकेत पूरे शरीर में फैलते हैं और ओवरी तक पहुंचकर वहां सूजन बढ़ाने वाले रसायन के स्तर को प्रभावित करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रेग्नेंसी पर पड़ सकता है असर</h3>



<p>अध्ययन के दौरान देखा गया कि ओवरी की छोटी थैलियों में एग्स का विकास सामान्य नहीं रहा और एग्स की क्वालिटी कम हो गई। इसके परिणामस्वरूप सफल प्रेग्नेंसी की संभावना घट गई। इसके अलावा, जिन एग्स पर सूजन का प्रभाव पड़ा, उनमें डीएनए को नुकसान और जीन के काम करने के तरीके में बदलाव के संकेत भी मिले। रिसर्चर के अनुसार, यह प्रभाव लगभग वैसे ही था जैसे उम्र बढ़ने पर प्रजनन क्षमता में गिरावट के दौरान देखा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पूरे शरीर पर पड़ता है सूजन का असर</h3>



<p>स्टडी के प्रमुख माइकल क्लटस्टाइन ने कहा कि अक्सर मसूड़ों की सूजन को केवल स्थानीय समस्या माना जाता है, लेकिन हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक बनी सूजन महिलाओं में बांझपन का एक ऐसा कारण हो सकती है, जिस पर अब तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।</p>



<p><strong>Disclaimer:</strong> यह जानकारी रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह न मानें। कोई भी नई गतिविधि या उपाय अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/tanya-mittal-i-dont-want-a-rich-partner-ready-to-give-everything-to-my-love/">मैं अमीर पार्टनर नहीं चाहती, जिससे प्यार करुंगी उसे सब कुछ देने को तैयार- तान्या मित्तल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>पंजाब में ऑर्थोपेडिक इलाज की बढ़ी मांग, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना” के तहत 84 करोड़ से अधिक खर्च</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-orthopedic-treatment-demand-increase-mukhyamantri-swasthya-yojana-84-crore-spent/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 06:19:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[84 crore healthcare spending Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[hip surgery Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[knee replacement Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Mukhyamantri Swasthya Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab orthopedic treatment]]></category>
		<category><![CDATA[trauma treatment Punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और ट्रॉमा (आघात) से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के आंकड़ों के अनुसार ऑर्थोपेडिक उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं। इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab News : </strong>पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और ट्रॉमा (आघात) से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के आंकड़ों के अनुसार ऑर्थोपेडिक उपचार राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं।</p>



<p>इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता चलता है कि योजना के तहत अब तक हड्डियों, जोड़ों और ट्रॉमा से संबंधित उपचारों पर 84 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। यह बढ़ती सर्जिकल आवश्यकताओं और सरकारी अस्पतालों में विशेष ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक बढ़ी पहुंच को दर्शाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">घुटना और कूल्हा सर्जरी सबसे अधिक</h3>



<p>आंकड़े बताते हैं कि इस योजना के अंतर्गत सबसे अधिक घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) के उपचार किए गए हैं। इसके बाद कूल्हे (हिप) की सर्जरी तथा प्लेटों, नेल्स और अन्य इम्प्लांट्स के माध्यम से फ्रैक्चर फिक्सेशन जैसे उपचार किए गए हैं। ये उपचार अब जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस सुविधा के तहत नियमित रूप से किए जा रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">45 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण</h3>



<p>पंजाब में अब तक 45 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं, जो कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है। योजना के तहत लुधियाना में 4.8 लाख से अधिक और पटियाला में लगभग 4.1 लाख लाभार्थी दर्ज किए गए हैं।</p>



<p>ऑर्थोपेडिक मामलों में वृद्धि जनस्वास्थ्य में आ रहे बड़े बदलाव को भी दर्शाती है। विशेष रूप से बढ़ती उम्र की आबादी में जोड़ों की समस्याएं, लगातार दर्द और चलने-फिरने में कठिनाइयां बढ़ रही हैं। घुटने और कूल्हे की समस्याओं, लंबे समय से जोड़ों के दर्द तथा गतिशीलता में कठिनाई वाले मरीजों की संख्या सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ रही है।</p>



<p>ऑर्थोपेडिक उपचारों में अक्सर महंगे इम्प्लांट्स, लंबा उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता होती है, जिससे परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही</h3>



<p>फैक्ट्री में काम करते समय तनेजा एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। इसके बाद उनके लिए चलना-फिरना मुश्किल हो गया। चलते समय अचानक होने वाला दर्द उन्हें रुककर दीवार का सहारा लेने के लिए मजबूर कर देता था। घुटने के आसपास सूजन लगातार बनी रहती थी और जकड़न के कारण सामान्य गतिविधियां करना भी कठिन हो गया था। कई बार वे खड़े होने से पहले ही यह सोचकर रुक जाते थे कि उनका पैर उनके शरीर का भार सहन कर पाएगा या नहीं।</p>



<p>उन्हें 6 मई को राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती कराया गया और अगले दिन लिगामेंट टियर का उपचार किया गया। डॉक्टरों ने गंभीर जोड़ों के दर्द, सूजन, अस्थिरता तथा भार सहन करने में कठिनाई जैसे लक्षण दर्ज किए।</p>



<p>मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत उन्हें 86,750 रुपये का उपचार पूरी तरह कैशलेस मिला। 12 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे भारी चिकित्सा बिल की चिंता के बिना अपने घर लौट आए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">“मैं अब धीरे-धीरे ठीक हो रहा हूं”</h3>



<p>गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे ठीक हो रहा हूं। स्वास्थ्य कार्ड की वजह से मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। यह योजना हमारे जैसे परिवारों का खर्च कम कर रही है और महंगा इलाज आसान बना रही है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है &#8211; बलबीर सिंह</h3>



<p>पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे किफायती और सुलभ सर्जिकल सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो गई है।” उन्होंने आगे कहा कि योजना के तहत हजारों मरीजों को कैशलेस घुटना प्रत्यारोपण, कूल्हे और ट्रॉमा संबंधी उपचार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हो रहा है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आ रहा है।</p>



<p>उन्होंने कहा कि केवल चार महीनों में 84 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह राज्य में मरीजों की चलने-फिरने की क्षमता बहाल करने, दिव्यांगता कम करने और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://पंजाब में मान सरकार ने 65 हजार से अधिक संविदा कर्मियों की नौकरी पक्की कर एतिहासिक काम किया- केजरीवाल">पंजाब में मान सरकार ने 65 हजार से अधिक संविदा कर्मियों की नौकरी पक्की कर एतिहासिक काम किया- केजरीवाल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>महिलाएं इन लक्षणों को नजरअंदाज कर रही हैं, ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है जानलेवा!</title>
		<link>https://hindikhabar.com/women-ignoring-symptoms-deadly-breast-cancer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 11:55:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Breast Cancer Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Cancer Prevention]]></category>
		<category><![CDATA[Early Detection]]></category>
		<category><![CDATA[Health Checkup]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Max Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Women Health]]></category>
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					<description><![CDATA[Breast Cancer Awareness : भारत में अधिकांश महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपनी सेहत को अक्सर अनदेखा कर देती हैं। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत छोटे-छोटे संकेतों के साथ ही होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Breast Cancer Awareness :</strong> भारत में अधिकांश महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त रहती हैं कि अपनी सेहत को अक्सर अनदेखा कर देती हैं। हालांकि, कुछ सामान्य लक्षण समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत छोटे-छोटे संकेतों के साथ ही होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इन लक्षणों को समय पर समझ लिया जाए तो ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही ठीक किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जांच करवाने में हिचकिचाती हैं महिलाएं</h3>



<p>डॉ. मीनू वालिया, चेयरमैन मेडिकल ऑन्क्लॉजी, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के अनुसार, अधिकांश भारतीय महिलाएं ब्रेस्ट से जुड़ी समस्याओं को सार्वजनिक रूप से बताने या समय पर डॉक्टर से जांच करवाने में हिचकिचाती हैं। यही वजह है कि ब्रेस्ट कैंसर का पता अक्सर देर से लगता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">देरी से शादी और पहली प्रेग्नेंसी</h3>



<p>भारतीय महिलाओं में बदलती जीवनशैली, हार्मोनल बदलाव और मानसिक तनाव ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के मुख्य कारण माने जाते हैं। इसके अलावा, देरी से शादी और पहली प्रेग्नेंसी का समय भी जोखिम बढ़ा सकता है। कई महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों और जांच के तरीकों की जानकारी नहीं होती। स्तन में गांठ, निप्पल से डिस्चार्ज या त्वचा में बदलाव जैसी समस्याओं को वे सामान्य मान लेती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लक्षणों को नजरअंदाज करती हैं महिलाएं</h3>



<p>सामाजिक झिझक और शर्म की वजह से कई महिलाएं पुरुष डॉक्टर या अन्य लोगों के साथ अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाती हैं। इसके कारण लक्षणों की पहचान देर से होती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी सेहत को पारिवारिक जिम्मेदारियों के पीछे रख देती हैं और तब तक लक्षणों को नजरअंदाज करती हैं जब तक वे गंभीर रूप न ले लें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की मशीनें उपलब्ध</h3>



<p>ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव भी देरी का कारण है। कई सरकारी अस्पतालों में ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे शुरुआती लक्षणों की जांच नहीं हो पाती। इस वजह से बीमारी अक्सर स्टेज 3 या 4 तक पहुंच जाती है। सरकारी अस्पतालों में भी बायोप्सी और इमेजिंग में होने वाली देरी मरीजों को गंभीर स्थिति में पहुंचा देती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शुरुआती स्टेज में पहचान मुश्किल</h3>



<p>कुछ महिलाएं शुरुआती लक्षणों को सामान्य दर्द या अन्य स्थितियों से जोड़कर खुद दवा ले लेती हैं। लोब्युलर ब्रेस्ट कैंसर जैसे प्रकार की पहचान शुरुआती स्टेज में करना मुश्किल हो जाता है। आर्थिक कमजोरियों की वजह से भी कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करवा पाती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कम शारीरिक सक्रियता और अनहेल्दी फूड</h3>



<p>भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर अक्सर 50 वर्ष से कम उम्र में विकसित होता है। युवतियों में रेगुलर स्क्रीनिंग की आदत नहीं होती, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल होती है। शहरी इलाकों में कम शारीरिक सक्रियता और अनहेल्दी फूड की आदत मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है, जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। देर से संतान होना और कम ब्रेस्टफीडिंग भी जोखिम में योगदान देते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नियमित मैमोग्राम करवाना अत्यंत आवश्यक</h3>



<p>एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर महीने खुद से ब्रेस्ट चेकअप करना चाहिए। 40 वर्ष से कम महिलाओं को हर 1-3 साल में डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, जबकि 40 वर्ष के बाद यह जांच हर साल करनी चाहिए। 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राम करवाना अत्यंत आवश्यक है। समय पर जागरूकता और शुरुआती जांच से ब्रेस्ट कैंसर की पहचान और उपचार में 90% तक सफलता हासिल की जा सकती है।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/israel-expands-military-control-over-gaza-70-percent-crisis-deepens/">इजराइल बढ़ा रहा गाजा पर कब्जा, 70% इलाके पर सैन्य नियंत्रण का आदेश, गाजा में संकट गहराया</a></p>



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		<item>
		<title>मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ बनी जीवनरेखा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/cm-sehat-yojana-relief-seasonal-diseases-punjab-mann-government-health-scheme/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 09:06:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Acute Febrile Illness Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Cashless Treatment Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Mann Government Health Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab CM Sehat Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Government]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Seasonal Diseases Punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab News : पंजाब में बदलते तापमान और उमसभरी गर्मी के आगमन के साथ एक बार फिर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। रोज़मर्रा की बीमारियों से राहत पाने के लिए पहले से ही मरीज़ों की भीड़ झेल रहे सरकारी अस्पतालों में अब बुखार संबंधी बीमारियों, श्वसन संक्रमणों और पेट संबंधी विकारों के मामलों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>Punjab News :</strong> पंजाब में बदलते तापमान और उमसभरी गर्मी के आगमन के साथ एक बार फिर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। रोज़मर्रा की बीमारियों से राहत पाने के लिए पहले से ही मरीज़ों की भीड़ झेल रहे सरकारी अस्पतालों में अब बुखार संबंधी बीमारियों, श्वसन संक्रमणों और पेट संबंधी विकारों के मामलों में एक नई बढ़ोतरी देखी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह मौसमी लहर हर साल चिंताजनक रूप से लौटती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अचानक तेज बुखार कई संक्रमणों का संकेत</h3>



<p>एक्यूट फेब्राइल इलनेस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि अचानक तेज़ बुखार के साथ उत्पन्न होने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसमें कई तरह की बीमारियाँ शामिल हो सकती हैं। यूएस सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, ऐसी स्थितियाँ वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमणों के कारण हो सकती हैं। कई बार मरीज़ बुखार को मुख्य लक्षण के रूप में लेकर अस्पताल पहुँचते हैं, जबकि संक्रमण का मूल कारण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट नहीं हो पाता।</p>



<p>पंजाब की &#8216;मुख्यमंत्री सेहत योजना&#8217; के हालिया आँकड़े बताते हैं कि पिछले चार महीनों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस कैशलेस इलाज दावों की सबसे बड़ी श्रेणियों में शामिल रहीं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, एक्यूट फेब्राइल इलनेस के 5,840 मामले दर्ज किए गए, जिन पर ₹1.31 करोड़ के दावों का भुगतान किया गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एंटरिक फीवर के 1,396 मामले दर्ज</h3>



<p>इसके अलावा, पानी से फैलने वाले और श्वसन संबंधी बीमारियों के भी उल्लेखनीय मामले सामने आए। एंटरिक फीवर के 1,396 मामले दर्ज हुए, जिन पर ₹30.47 लाख के दावे किए गए। निमोनिया के 377 मामलों पर ₹11.06 लाख, जबकि एक्यूट ब्रोंकाइटिस के 326 मामलों पर ₹9.24 लाख ख़र्च हुए। वहीं मानसून के दौरान अक्सर चर्चा में रहने वाली बीमारियों के मामले अपेक्षाकृत सीमित रहे। डेंगू के केवल 12 मामले दर्ज हुए, जिन पर ₹40,880 का दावा हुआ। मलेरिया के सिर्फ 3 मामले, चिकनगुनिया के 6 मामले, और हीट स्ट्रोक के 4 मामले सामने आए, जो अत्यधिक गर्मी से संबंधित अस्पताल भर्ती की तुलनात्मक रूप से कम संख्या को दर्शाते हैं।</p>



<p>हालाँकि, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी तरह की लापरवाही से बचने की सलाह दे रहे हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार बारिश, मच्छरों की बढ़ती संख्या और स्थानीय स्वच्छता स्थितियों के अनुसार मौसमी प्रकोप तेज़ी से बदल सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भीषण गर्मी में बढ़ रहे बुखार और संक्रमण के मामले</h3>



<p>सिविल अस्पताल, पटियाला के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विकास गोयल ने बताया कि यह स्थिति हर वर्ष ओपीडी में दिखाई देने वाले समान्य मौसमी दबाव को दर्शाती है I उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश मामले प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर आसानी से संभाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण एक्यूट फेब्राइल इलनेस, उल्टी,दस्त, सिरदर्द, श्वसन संक्रमण और त्वचा व आँखों से जुड़ी एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। गरम मौसम के कारण लोग अक्सर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।</p>



<p>डॉ. विकास गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीज़ों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है क्योंकि इससे उन्हें बिना आर्थिक बोझ के अस्पताल में भर्ती होकर कैशलेस उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा,“यह योजना सुनिश्चित करती है कि मरीज़ बिना अग्रिम पैसे की चिंता किए समय पर इलाज प्राप्त कर सकें। समय पर जाँच और उपचार से कई जानें बचाई जा सकती हैं, क्योंकि आर्थिक बाधा दूर होने से लोग इलाज में देरी नहीं करते।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">गर्मी में बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ा</h3>



<p>बच्चे अत्यधिक गर्मी और उमस वाले मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील बने रहते हैं। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर ने चेतावनी दी कि शिशु और छोटे बच्चे संक्रमणों की चपेट में जल्दी आते हैं। उन्होंने बताया कि ठीक से आहार न लेना, बार-बार उल्टी होना, तेज साँस चलना, डिहाइड्रेशन, दौरे पड़ना और लगातार बुखार जैसे लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि तीन महीने से कम उम्र के शिशु में किसी भी तरह के बुखार को तत्काल चिकित्सकीय आपात स्थिति माना जाना चाहिए।</p>



<p>डॉ. शशि कांत धीर ने यह भी कहा कि&nbsp; जागरूकता अभियान, स्वच्छता शिक्षा, टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण उपायों के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को रोकने में अभिभावकों, आशा वर्करों, आँगनवाड़ी कर्मियों और स्कूलों की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण है।</p>



<p>फिलहाल, जैसे-जैसे पंजाब एक और लंबी गर्मी की तैयारी कर रहा है, अस्पतालों के भीड़भरे गलियारे यह याद दिला रहे हैं कि मौसमी बीमारियाँ आज भी परिवारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।</p>



<p><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://आईपीएस अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या, पुलिस महकमे में मचा हड़कंपट">आईपीएस अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप</a><strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.hindikhabar">Hindi Khabar App:</a>&nbsp;देश,&nbsp;राजनीति,&nbsp;टेक,&nbsp;बॉलीवुड,&nbsp;राष्ट्र,&nbsp;&nbsp;बिज़नेस,&nbsp;ज्योतिष,&nbsp;धर्म-कर्म,&nbsp;खेल,&nbsp;ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए.<a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.hindikhabar">&nbsp;हिन्दी ख़बर ऐप</a></strong></p>



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