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	<title>स्वास्थ्य News, स्वास्थ्य की खबरें, Health Tips, Health Updates - Hindi Khabar</title>
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	<description>Hindi Khabar: Latest News Breaking News, हिंदी खबर चैनल, Hindi Khabar Live,Hindi News</description>
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		<title>लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें, हेपेटाइटिस और फैटी लिवर से बचाव में मिलेगी मदद</title>
		<link>https://hindikhabar.com/liver-health-tips-healthy-habits-to-prevent-hepatitis-and-fatty-liver/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:23:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Fatty liver disease]]></category>
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					<description><![CDATA[Hepatitis Prevention : आज के समय में बदलती जीवनशैली का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासतौर पर लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत के बड़े शहरों में फैटी लिवर की समस्या लगातार सामने आ रही है। आम धारणा है कि लिवर की बीमारी केवल शराब पीने &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Hepatitis Prevention :</strong> आज के समय में बदलती जीवनशैली का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासतौर पर लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत के बड़े शहरों में फैटी लिवर की समस्या लगातार सामने आ रही है। आम धारणा है कि लिवर की बीमारी केवल शराब पीने वालों को होती है, लेकिन ऐसा नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खराब खानपान, बढ़ता वजन, डायबिटीज, शारीरिक गतिविधि की कमी और हेपेटाइटिस वायरस भी लिवर की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकते हैं। हालांकि समय पर जांच, सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के सीनियर डायरेक्टर और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. रमेश गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस से बचाव और लिवर को मजबूत रखने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हेपेटाइटिस से बचने के लिए जरूरी सावधानियां</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हेपेटाइटिस A और B से बचाव के लिए वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। यह संक्रमण से बचने का प्रभावी तरीका है।<br>साफ और सुरक्षित भोजन के साथ शुद्ध पानी का सेवन करें। दूषित खाना और पानी संक्रमण का कारण बन सकते हैं।<br>हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। खाना खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रेजर, टूथब्रश, नेल कटर और सुई जैसी निजी चीजें किसी के साथ साझा न करें।<br>हेपेटाइटिस B संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षित यौन संबंध बनाना जरूरी है।<br>शराब और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों के सेवन से बचें, क्योंकि इससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।<br>किन लोगों को करानी चाहिए हेपेटाइटिस की जांच</p>



<p class="wp-block-paragraph">हर व्यक्ति के लिए नियमित हेपेटाइटिस जांच जरूरी नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों को विशेष रूप से जांच करानी चाहिए। इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनका कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो, जो डायलिसिस पर हों, स्वास्थ्यकर्मी हों, गर्भवती महिलाएं हों, संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्य हों या जिनके लिवर टेस्ट पहले से खराब आए हों।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बीमारी की पहचान और इलाज शुरू</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर लंबे समय से थकान महसूस हो रही है, पीलिया की शिकायत है, भूख कम लग रही है, बार-बार उल्टी जैसा महसूस होता है या लिवर एंजाइम बढ़े हुए हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर जांच जरूर करानी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, हेपेटाइटिस B और C कई बार लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के शरीर में मौजूद रह सकते हैं। ऐसे में जोखिम वाले लोगों में समय पर जांच बीमारी की पहचान और इलाज शुरू करने में मदद कर सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">फैटी लिवर का बढ़ता खतरा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आजकल फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह केवल शराब पीने वालों में ही नहीं होती, बल्कि शराब न पीने वाले लोगों में भी देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण ज्यादा तला-भुना भोजन, जंक फूड, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन, मोटापा, पेट की चर्बी बढ़ना, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो फैटी लिवर आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय</h3>



<p class="wp-block-paragraph">संतुलित और पौष्टिक भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें।<br>फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन करें।<br>रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें।<br>वजन और कमर के आकार को नियंत्रण में रखें।<br>शराब और तंबाकू से दूरी बनाएं।<br>पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।<br>बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाइयां, एंटीबायोटिक या हर्बल सप्लीमेंट लंबे समय तक न लें।<br>डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं की नियमित जांच कराकर उन्हें नियंत्रित रखें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर जरूरी जांच के जरिए लिवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer :</strong> इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिंदी ख़बर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/satyam-pandit-arrest-demand-saurabh-bhardwaj-jantar-mantar-protest-case/">जंतर मंतर के प्रदर्शन से घर लौट रहे दो बच्चों के साथ मारपीट करने वाले सत्यम पंडित को गिरफ्तार करे पुलिस- सौरभ भारद्वाज</a></p>



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		<title>पंजाब में 6 महीनों में 14 हजार से ज्यादा मरीजों को मिला सांस संबंधी बीमारियों का कैशलेस इलाज</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-14000-patients-cashless-treatment-respiratory-diseases-6-months/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:35:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[bhagwant mann government]]></category>
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					<description><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana : सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खाँसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और घरघराहट (व्हीज़िंग) को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियाँ चढ़ना भी मुश्किल न हो जाए। तब तक कई मरीज़ गंभीर फेफड़ों की &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhyamantri Sehat Yojana :</strong> सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। लगातार रहने वाली खाँसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और घरघराहट (व्हीज़िंग) को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियाँ चढ़ना भी मुश्किल न हो जाए। तब तक कई मरीज़ गंभीर फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके होते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या फिर बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कामकाजी आयु वर्ग में भी बढ़ रहा फेफड़ों की बीमारी का बोझ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पंजाब के ताज़ा उपचार आँकड़े बताते हैं कि क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियाँ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं हैं। अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाने वाले मरीज़ों का एक बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से है, जो यह दर्शाता है कि साँस संबंधी बीमारियाँ स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेज़ी से बढ़ा रही हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>जल्द पहचान और इलाज से गंभीर स्थिति से बचाव संभव</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियाँ धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं। जितनी जल्दी इनका पता चल जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतना ही अधिक आसानी से रोका जा सकता है। दवाइयाँ और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है। गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवन बचा सकती है। ऐसे में इलाज में देरी करना कभी भी सही विकल्प नहीं होता। दुर्भाग्य से इलाज का ख़र्च वहन न कर पाने के कारण कई मरीज़ इलाज में देरी करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>14 </strong><strong>हजार से अधिक मरीजों को मिला कैशलेस उपचार</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाई जा रही स्वास्थ्य योजना ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के अंतर्गत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/साँस संबंधी उपचार का लाभ उठाया। इन उपचारों पर ₹37.30 करोड़ की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया। इन आँकड़ों के पीछे उन हज़ारों मरीज़ों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी। यही इस योजना की सबसे बड़ी ताक़त है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>36 </strong><strong>से 60 </strong><strong>वर्ष आयु वर्ग में सामने आए 5,559 </strong><strong>मामले</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आँकड़ों के अनुसार, 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया। ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के तहत हुए कुल साँस संबंधी उपचार मामलों के 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं। इसके अलावा 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी साँस संबंधी उपचार प्राप्त किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पुरुषों और महिलाओं दोनों को मिला योजना का लाभ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लिंग आधारित आँकड़ों के अनुसार, 8,345 पुरुषों का ₹22.79 करोड़ की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को ₹14.50 करोड़ के उपचार का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त अन्य (Other) लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के तहत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अप्रैल में सबसे ज्यादा उपचार मामले दर्ज</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मासिक आँकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष साँस संबंधी सेवाओं की माँग लगातार बनी रही। उपचार मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों की अवधि में सबसे अधिक रही। हालाँकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार मूल्य ₹6.73 करोड़ रहा, जो सबसे अधिक था। यह दर्शाता है कि योजना के तहत अधिक जटिल और महँगे साँस उपचार भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>साँस फूलने की समस्या को नजरअंदाज न करें: डॉ. बलबीर सिंह</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ये आँकड़े साँस संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों को अधिक जागरूक करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं। लोग लगातार रहने वाली खाँसी या साँस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या या बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। दुर्भाग्यवश, दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारियाँ धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट संकेतों के बढ़ती रहती हैं। जब तक कई मरीज़ चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँच चुका होता है। साँस फूलने की समस्या को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से फेफड़ों, जीवन और आजीविका—तीनों को बचाया जा सकता है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>धूम्रपान और प्रदूषण से बचाव की अपील</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा साँस के पुराने रोगों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच करवाने पर भी ज़ोर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>समय पर जांच और उपचार से बीमारी पर नियंत्रण संभव</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बीमारी की समय पर पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता को टालने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर CJP का अल्टीमेटम, “मांगें नहीं मानीं तो फिर शुरू होगा आंदोलन”">प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर CJP का अल्टीमेटम, “मांगें नहीं मानीं तो फिर शुरू होगा आंदोलन”</a></p>



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		<item>
		<title>तनाव बना रहा है दिमाग को कमजोर? भूलने की आदत और चिंता के पीछे हो सकती है ये वजह</title>
		<link>https://hindikhabar.com/stress-impact-on-brain-memory-loss-anxiety-health-effects/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 13:57:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Brain Health]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Mental Health]]></category>
		<category><![CDATA[stress management]]></category>
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					<description><![CDATA[Mental Health : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। नौकरी का दबाव, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां, रिश्तों की उलझन और भविष्य को लेकर चिंता मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव केवल मूड को प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिमाग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mental Health :</strong> आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। नौकरी का दबाव, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां, रिश्तों की उलझन और भविष्य को लेकर चिंता मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव केवल मूड को प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीनियर मनोचिकित्सक डॉ. गौरव गुप्ता (तुलसी हेल्थकेयर, गुरुग्राम) के अनुसार, तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। थोड़े समय के लिए ये हार्मोन शरीर को मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनका स्तर बढ़ा रहने से दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">याददाश्त और एकाग्रता पर पड़ता है असर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लगातार तनाव का सबसे ज्यादा प्रभाव सोचने, समझने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर पड़ सकता है। तनाव में रहने वाला व्यक्ति छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है, किसी काम पर फोकस करने में परेशानी महसूस कर सकता है और सही निर्णय लेने में कठिनाई आ सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बढ़ सकता है चिंता और अवसाद का खतरा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय तक तनाव रहने से एंग्जायटी, डिप्रेशन, पैनिक अटैक और भावनात्मक परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा हो सकता है, बार-बार गुस्सा आ सकता है या लोगों से दूरी बनाने लग सकता है। इसका असर निजी जीवन और कामकाज दोनों पर पड़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नींद को भी प्रभावित करता है तनाव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">तनाव का सीधा संबंध नींद से है। कई लोगों को तनाव के कारण रात में ठीक से नींद नहीं आती, बार-बार नींद खुलती है या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होती है। पर्याप्त नींद न मिलने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और तनाव की समस्या और बढ़ सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शरीर पर भी पड़ता है नकारात्मक प्रभाव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर पर भी असर पड़ सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी समस्याएं, पाचन से जुड़ी परेशानियां, सिरदर्द, माइग्रेन और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कब लेनी चाहिए विशेषज्ञ की सलाह</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक लगातार उदासी, जरूरत से ज्यादा चिंता, किसी काम में रुचि न रहना, नींद या भूख में बदलाव, गुस्सा बढ़ना या रोजमर्रा के कामों को करने में परेशानी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तनाव कम करने के लिए अपनाएं ये आदतें</h3>



<p class="wp-block-paragraph">रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।<br>नियमित रूप से पैदल चलने की आदत डालें।<br>7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।<br>योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।<br>परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।<br>अपनी भावनाओं को भरोसेमंद लोगों से साझा करें।<br>मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल करें।<br>संतुलित आहार लें और कैफीन, शराब व नशे से दूरी बनाएं।<br>काम और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखें।<br>जरूरत पड़ने पर अपनी सीमाएं तय करना और ‘ना’ कहना सीखें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तनाव को समय रहते पहचानकर और सही आदतों को अपनाकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/iran-us-tension-100-american-soldiers-injured-us-airstrikes-on-9-iranian-cities/">ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, हमलों में 100 अमेरिकी सैनिक घायल, कई देशों में बढ़ी चिंता, अमेरिका ने किए 9 शहरों पर हमले</a></p>



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		<item>
		<title>पाकिस्तान में 78 बच्चों समेत 120 लोग HIV पॉजिटिव, 6 की मौत, अस्पताल में लापरवाही की खुली पोल</title>
		<link>https://hindikhabar.com/pakistan-hiv-outbreak-78-children-120-positive-6-deaths-hospital-negligence/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 10:25:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[Medical Negligence]]></category>
		<category><![CDATA[Pakistan Health Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[pakistan news]]></category>
		<category><![CDATA[SESSI Walika Hospital Case]]></category>
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					<description><![CDATA[Karachi Hospital HIV Case : पाकिस्तान के कराची शहर से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी अस्पताल में कथित लापरवाही के कारण कम से कम 78 बच्चे HIV संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। जांच में सामने आया है कि अस्पताल में इस्तेमाल की गई सुइयों और &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Karachi Hospital HIV Case :</strong> पाकिस्तान के कराची शहर से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी अस्पताल में कथित लापरवाही के कारण कम से कम 78 बच्चे HIV संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। जांच में सामने आया है कि अस्पताल में इस्तेमाल की गई सुइयों और मेडिकल कचरे के निपटारे में गंभीर खामियां थीं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह मामला कराची के साइट इलाके में स्थित सिंध एम्प्लॉइज सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन (SESSI) के तहत चलने वाले वालिका अस्पताल से जुड़ा है। बच्चों में HIV संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।</p>



<h3 class="wp-block-heading">10 हजार से ज्यादा लोगों की हुई जांच</h3>



<p class="wp-block-paragraph">संक्रमण फैलने की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल और आसपास के इलाकों में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान 10,500 से ज्यादा लोगों की जांच की गई, जिसमें बच्चों के अलावा करीब 120 अन्य लोग भी HIV पॉजिटिव पाए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जांच में सामने आईं गंभीर लापरवाहियां</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सिंध हेल्थकेयर कमीशन की जांच टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया तो संक्रमण रोकने के नियमों में कई बड़ी कमियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि कुछ जगहों पर इस्तेमाल की जा चुकी सिंगल-यूज सुइयों और सीरिंज के दोबारा इस्तेमाल की आशंका थी। इसके अलावा इस्तेमाल की गई सुइयों के सुरक्षित निपटारे की प्रक्रिया भी ठीक से नहीं अपनाई जा रही थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अस्पताल में मेडिकल कचरे को संभालने के लिए कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। संक्रमण फैलाने वाले कचरे के प्रबंधन में लापरवाही बरती गई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मेडिकल सुविधाओं पर भी उठे सवाल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जांच के दौरान अस्पताल के कुछ विभागों में स्टाफ की अनुपस्थिति और व्यवस्थाओं की कमी भी सामने आई। ऑपरेशन थिएटर और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, मेडिकल उपकरणों को संक्रमण मुक्त करने वाली ऑटोक्लेव मशीन की स्थिति को लेकर भी जांच टीम ने चिंता जताई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">37 कर्मचारियों पर कार्रवाई</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मामले के बाद सिंध सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल के प्रशासकों, लैब कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ समेत 37 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण समिति मौजूद थी, लेकिन कर्मचारियों के बीच आपसी विवाद और सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही के कारण यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सिंध प्रांत में HIV संक्रमण का यह पहला बड़ा मामला नहीं है। इससे पहले साल 2019 में रतोदेरो इलाके में भी HIV संक्रमण फैलने की घटना सामने आई थी। उस समय भी असुरक्षित इंजेक्शन और चिकित्सा व्यवस्था में लापरवाही को इसका कारण बताया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिलहाल सिंध सरकार ने प्रभावित बच्चों के इलाज का खर्च उठाने और उनके लिए लंबे समय तक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। हालांकि, इस घटना ने पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>



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			</item>
		<item>
		<title>गर्मी और बारिश में थाई रैश से हैं परेशान, जानिए रैशेज से बचने के आसान तरीके</title>
		<link>https://hindikhabar.com/summer-rain-thigh-rash-prevention-tips-easy-skin-care-methods/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:19:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Skin Care]]></category>
		<category><![CDATA[skin care tips]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Problems]]></category>
		<category><![CDATA[Women Health]]></category>
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					<description><![CDATA[Skin Care Tips : गर्मी और बारिश के मौसम में पसीना, नमी और उमस के कारण त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां बढ़ जाती हैं। इनमें जांघों के बीच रगड़ लगने से होने वाले रैशेज, खुजली और जलन की समस्या काफी आम है। खासकर ज्यादा वजन वाले लोगों में यह परेशानी अधिक देखने को मिलती है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Skin Care Tips :</strong> गर्मी और बारिश के मौसम में पसीना, नमी और उमस के कारण त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां बढ़ जाती हैं। इनमें जांघों के बीच रगड़ लगने से होने वाले रैशेज, खुजली और जलन की समस्या काफी आम है। खासकर ज्यादा वजन वाले लोगों में यह परेशानी अधिक देखने को मिलती है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है, लेकिन कई बार वे इसके बारे में खुलकर बात नहीं कर पातीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जांघों के अंदरूनी हिस्से में लगातार रगड़ लगने से त्वचा लाल हो सकती है, जलन होने लगती है और कई बार दर्दनाक घाव भी बन सकते हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या बढ़ सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक, सही देखभाल और कुछ आसान उपायों को अपनाकर इस परेशानी से बचा जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जांघों में रगड़ क्यों लगती है?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जांघों के अंदरूनी हिस्से की त्वचा जब बार-बार आपस में रगड़ खाती है या कपड़ों से घर्षण होता है, तो वहां जलन और रैश की समस्या शुरू हो जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गर्मी और बारिश के मौसम में पसीना ज्यादा आने से त्वचा नम हो जाती है। इससे त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो जाती है और रगड़ लगने पर परेशानी बढ़ जाती है। तंग या सिंथेटिक कपड़े भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जांघों में रैश के मुख्य लक्षण</strong></p>



<h3 class="wp-block-heading">जांघों में रगड़ लगने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:</h3>



<p class="wp-block-paragraph">त्वचा का लाल होना<br>जलन और खुजली होना<br>त्वचा का छिल जाना<br>लगातार परेशानी महसूस होना<br>प्रभावित हिस्से से अजीब गंध आना</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर खुजली, दर्द या जलन लंबे समय तक बनी रहती है तो यह संक्रमण का संकेत भी हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जांघों की रगड़ से बचने के आसान उपाय</p>



<ol class="wp-block-list">
<li><strong>आरामदायक कपड़े पहनें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">हल्के, ढीले और पसीना सोखने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें। बहुत टाइट कपड़ों से बचें।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li><strong>लंबे इनरवियर का इस्तेमाल करें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">गर्मी के मौसम में ऐसे इनरवियर पहन सकते हैं जो जांघों के बीच सीधी रगड़ को कम करें।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li><strong>त्वचा को सूखा रखें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">पसीना आने के बाद प्रभावित हिस्से को साफ और सूखा रखना जरूरी है।</p>



<ol start="4" class="wp-block-list">
<li><strong>तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट से बचें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">परफ्यूम वाले पाउडर या मॉइस्चराइजर कई बार जलन को बढ़ा सकते हैं।</p>



<ol start="5" class="wp-block-list">
<li><strong>बैरियर क्रीम का इस्तेमाल करें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">घर्षण कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से जिंक ऑक्साइड जैसी बैरियर क्रीम का उपयोग किया जा सकता है।</p>



<ol start="6" class="wp-block-list">
<li><strong>जलन होने पर ठंडी सिकाई करें</strong></li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">रगड़ के कारण होने वाली जलन को कम करने के लिए प्रभावित जगह पर थोड़ी देर ठंडी पट्टी या बर्फ की सिकाई मददगार हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही स्किन केयर रूटीन अपनाकर गर्मी और बारिश के मौसम में जांघों की रगड़ और रैशेज की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer:</strong> यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी डाइट, फिटनेस प्रोग्राम या स्वास्थ्य उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/gujarat-ats-action-jaish-e-mohammed-linked-five-suspects-arrested-investigation-reveals-details/">गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 5 संदिग्ध गिरफ्तार, जांच में कई खुलासे</a></p>



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		<item>
		<title>पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 914 मरीज़ों को ₹4.15 करोड़ का कैशलेस स्ट्रोक उपचार प्रदान किया गया</title>
		<link>https://hindikhabar.com/punjab-mukhyamantri-sehat-yojana-914-stroke-patients-cashless-treatment-4-15-crore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 06:56:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Cashless treatment]]></category>
		<category><![CDATA[dr. balbir singh]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Harman Sobti]]></category>
		<category><![CDATA[healthcare Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Government Health Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health Department]]></category>
		<category><![CDATA[Stroke Patients]]></category>
		<category><![CDATA[Stroke Treatment]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006420667</guid>

					<description><![CDATA[Mukhyamantri Sehat Yojana : स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता। एक पल पहले व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Mukhyamantri Sehat Yojana : </strong>स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता। एक पल पहले व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है। पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग , इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मरीज़ों की सहायता कर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>स्ट्रोक के कारण और जोखिम कारक</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है। ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसकी प्रमुख ज़ोखिम कारकों में शामिल हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विश्व स्तर पर स्ट्रोक से जुड़ी स्थिति और बचाव</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे ज़ोखिम कारकों से जुड़ी है जिन्हें रोका जा सकता है। वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का भी कहना है कि समय पर उपचार से मरीज़ की रिकवरी बेहतर हो सकती है, जबकि ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़े ज़ोखिमों पर बेहतर नियंत्रण से स्ट्रोक की संभावना को कम किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मुख्यमंत्री सेहत योजना से आर्थिक सहायता</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्ट्रोक का इलाज काफी महँगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीज़ों का ₹4.15 करोड़ की लागत से उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए, जिन पर ₹14.27 लाख का सबसे अधिक ख़र्च आया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>स्ट्रोक उपचार में जाँच और चिकित्सा प्रक्रियाओं की भूमिका</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीज़ों का इलाज हुआ, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले अपेक्षाकृत कम थे, लेकिन प्रति मरीज़ उपचार लागत अधिक रही। कुल ख़र्च का बड़ा हिस्सा सीटी/एमआरआई जाँच तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं वाले मामलों पर हुआ।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इलाज में देरी रोकना सरकार की प्राथमिकता : डॉ. बलबीर सिंह</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज़ों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले। स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्त्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता इलाज में होने वाली देरी और जीवन बचाने के बीच का अंतर साबित हो सकती है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आधुनिक इमेजिंग और समय पर उपचार से बेहतर परिणाम : डॉ. हरमन सोबती</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तथा मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा, “स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें समय पर जाँच और उपचार मरीज़ के भविष्य का फैसला कर सकते हैं। आधुनिक इमेजिंग, गहन निगरानी और समय पर इलाज से उपचार के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।” उन्होंने कहा कि जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। डॉ. सोबती ने आगे कहा, “लोगों को अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी, चेहरे का एक ओर झुक जाना, बोलने में कठिनाई जैसे चेतावनी संकेतों को पहचानकर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>स्ट्रोक प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों का महत्व</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. हरमन सोबती के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और सीटी स्कैन तथा एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा, “जटिल स्ट्रोक के मामलों में परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सेहत योजना एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करती है।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, डायबिटीज मैनेजमेंट तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक के ज़ोख़िम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>स्ट्रोक के आंकड़ों से सामने आई अहम बातें-</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्ट्रोक तेज़ी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है, जिसके लिए तुरंत आपातकालीन उपचार की आवश्यकता है।</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।</li>



<li>सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का प्रमुख आधार बन रही हैं।</li>



<li>जटिल स्ट्रोक के मामलों से परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।</li>



<li>स्वास्थ्य योजनाएँ अचानक आने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों में परिवारों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर सकती हैं।</li>



<li>ब्लड प्रेशर नियंत्रण, डायबिटीज का उचित प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना स्ट्रोक से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="http://बागवानी को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को बीज से बाजार तक पूरा सहयोग दिया जा रहा है: मोहिंदर भगत">बागवानी को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को बीज से बाजार तक पूरा सहयोग दिया जा रहा है: मोहिंदर भगत</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>14 दिन चीनी छोड़कर देखें, शरीर में दिखेंगे ये बड़े बदलाव! डॉक्टर ने बताया पूरा असर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/14-days-no-sugar-challenge-body-changes-doctor-explains-health-benefits/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 14:04:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Diabetes Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[Health Tips]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[No Sugar Challenge]]></category>
		<category><![CDATA[Sugar Free Diet]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006420637</guid>

					<description><![CDATA[No Sugar Challenge : चीनी का स्वाद भले ही लोगों को पसंद आता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। सुबह की चाय से लेकर पैकेट वाले फूड्स और मीठी चीजों तक, कई लोग रोजाना जरूरत से ज्यादा शुगर ले लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा चीनी का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>No Sugar Challenge :</strong> चीनी का स्वाद भले ही लोगों को पसंद आता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। सुबह की चाय से लेकर पैकेट वाले फूड्स और मीठी चीजों तक, कई लोग रोजाना जरूरत से ज्यादा शुगर ले लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा चीनी का सेवन मोटापा, डायबिटीज, फैटी लिवर और लगातार कम ऊर्जा जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वात्स्य के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 14 दिनों तक चीनी का सेवन बंद कर देता है तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, शुरुआत के कुछ दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सिरदर्द, थकान, मूड में बदलाव और ऊर्जा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉक्टर के मुताबिक, शुगर छोड़ने के शुरुआती 2-3 दिनों में शरीर को इसकी आदत से बाहर निकलने में समय लगता है। इस दौरान मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है, सिरदर्द, थकान, मूड में बदलाव और ऊर्जा की कमी जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों का वाटर वेट भी कम हो सकता है, जिससे उन्हें हल्कापन महसूस होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान शुगर की क्रेविंग को नियंत्रित करने के लिए डाइट में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना और जूस की जगह पूरे फल खाना बेहतर विकल्प माना जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मीठा खाने की इच्छा भी हो सकती है कम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अगर कोई व्यक्ति शुरुआती तीन दिन बिना चीनी के निकाल लेता है तो चौथे और पांचवें दिन से शरीर में बदलाव महसूस होने लगते हैं। शुगर की कमी से ब्लड ग्लूकोज और इंसुलिन के बार-बार बढ़ने-घटने की प्रक्रिया कम होने लगती है। धीरे-धीरे मीठा खाने की इच्छा भी कम हो सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरे सप्ताह तक शरीर शुगर की आदत से काफी हद तक बाहर आने लगता है। ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर ज्यादा संतुलित रहने लगता है और दिमाग में मीठे की इच्छा से जुड़े संकेतों में भी बदलाव आ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बेहतर खानपान की ओर बढ़ने का प्रयास</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि, शुगर छोड़ने का मतलब सिर्फ सफेद चीनी से दूरी बनाना नहीं है। इस दौरान कोल्ड ड्रिंक, फ्रूट जूस, बिस्किट, केक, मिठाई और पैकेट वाले स्नैक्स से भी बचना जरूरी है। फल खाए जा सकते हैं क्योंकि इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। डॉ. शुभम वात्स्य के अनुसार, 14 दिन का यह चैलेंज वजन घटाने का नहीं बल्कि शरीर को अतिरिक्त चीनी की आदत से बाहर निकालने और बेहतर खानपान की ओर बढ़ने का प्रयास है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer :</strong> यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। डाइट या स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/upsssc-launches-free-otr-facility-for-future-recruitment-applications/">UPSSSC ने शुरू की फ्री OTR सुविधा, जानिए कैसे मिलेगा भविष्य की सभी भर्तियों में फायदा</a></p>



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		<item>
		<title>क्या आपके बच्चे की हाइट रुक गई है? रोज की ये 5 गलतियां बन सकती हैं बड़ी वजह</title>
		<link>https://hindikhabar.com/is-your-child-height-growth-stopped-these-5-daily-mistakes-could-be-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 13:08:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Child Health]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Lifestyle]]></category>
		<category><![CDATA[Height Growth]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Kids Health]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Parenting Tips]]></category>
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					<description><![CDATA[Height Growth : अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की लंबाई को लेकर चिंता करते हैं। कई बार उन्हें लगता है कि बच्चे की उम्र बढ़ रही है, लेकिन उसकी हाइट उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे केवल आनुवंशिक कारण ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की कुछ आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Height Growth :</strong> अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की लंबाई को लेकर चिंता करते हैं। कई बार उन्हें लगता है कि बच्चे की उम्र बढ़ रही है, लेकिन उसकी हाइट उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे केवल आनुवंशिक कारण ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की कुछ आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों की अच्छी ग्रोथ के लिए पर्याप्त और समय पर नींद बेहद जरूरी है। देर रात तक जागने या कम सोने से शरीर में ग्रोथ हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर लंबाई पर पड़ता है। इसलिए बच्चों को समय पर सोने और पर्याप्त नींद लेने की आदत डालनी चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हार्मोन संतुलन हो सकता है प्रभावित</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा, जरूरत से ज्यादा मीठी और प्रोसेस्ड चीजें खाना भी बच्चों की ग्रोथ के लिए अच्छा नहीं माना जाता। पैकेट वाले जूस, मीठे पेय और अधिक शक्कर वाले खाद्य पदार्थ शरीर के हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। बच्चों की डाइट में ताजे और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शरीर में विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कई माता-पिता यह मानते हैं कि सिर्फ अधिक दूध पिलाने से बच्चे की हड्डियां मजबूत होंगी और उसकी लंबाई तेजी से बढ़ेगी। हालांकि, शरीर में विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि इसके बिना कैल्शियम का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन-डी की जांच और पूर्ति करानी चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Video देखने के लिए क्लिक करें-</strong> <a href="https://www.instagram.com/reel/DaQAu49zqTk/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=NTc4MTIwNjQ2YQ=="><strong>https://www.instagram.com/reel/DaQAu49zqTk/?utm_source=ig_web_copy_link&amp;igsh=NTc4MTIwNjQ2YQ==</strong></a></p>



<h3 class="wp-block-heading">ग्रोथ और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">बच्चों के शारीरिक विकास के लिए नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। आजकल कई बच्चे अपना अधिक समय मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन के सामने बिताते हैं, जिससे उनकी एक्टिविटी कम हो जाती है। रोजाना दौड़ना, खेलना और आउटडोर गतिविधियों में हिस्सा लेना उनकी ग्रोथ और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास और लंबाई बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer :</strong> यह जानकारी सामान्य जागरूकता और विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई सलाह पर आधारित है। बच्चों की लंबाई और शारीरिक विकास कई कारकों जैसे आनुवंशिकता, पोषण, हार्मोनल संतुलन और स्वास्थ्य स्थितियों पर निर्भर करता है। यदि आपके बच्चे की ग्रोथ को लेकर कोई चिंता है, तो किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। किसी भी उपचार, दवा या सप्लीमेंट की शुरुआत डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/what-is-hazard-light-know-when-and-how-to-use-it-correctly-most-people-dont-know-the-right-way/">जानिए Hazard Light का क्या काम है, कब और कैसे करें इसका इस्तेमाल, ज्यादातर लोग नहीं जानते सही तरीका</a></p>



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		<title>10 मिनट में तैयार करें प्रोटीन से भरपूर पनीर भुर्जी सैंडविच, जानें आसान रेसिपी</title>
		<link>https://hindikhabar.com/protein-rich-paneer-bhurji-sandwich-recipe-ready-in-10-minutes/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:25:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफ़स्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Easy Recipe]]></category>
		<category><![CDATA[Food Recipes]]></category>
		<category><![CDATA[healthy breakfast]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Paneer Bhurji]]></category>
		<category><![CDATA[Paneer Bhurji Sandwich]]></category>
		<category><![CDATA[Sandwich Recipe]]></category>
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					<description><![CDATA[Paneer Bhurji Sandwich : अगर सुबह जल्दी ऑफिस या स्कूल के लिए निकलना हो और कम समय में कुछ स्वादिष्ट और हेल्दी बनाना हो, तो पनीर भुर्जी सैंडविच एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह रेसिपी कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाती है और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण लंबे समय तक पेट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Paneer Bhurji Sandwich :</strong> अगर सुबह जल्दी ऑफिस या स्कूल के लिए निकलना हो और कम समय में कुछ स्वादिष्ट और हेल्दी बनाना हो, तो पनीर भुर्जी सैंडविच एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह रेसिपी कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाती है और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करती है। इसे बच्चों के टिफिन या ऑफिस लंच के लिए भी आसानी से बनाया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आवश्यक सामग्री</h3>



<p class="wp-block-paragraph">200 ग्राम पनीर (मैश किया हुआ या कद्दूकस किया हुआ)<br>4 से 6 ब्रेड स्लाइस<br>1 बारीक कटा प्याज<br>1 बारीक कटा टमाटर<br>1 बारीक कटी हरी मिर्च<br>बारीक कटा हरा धनिया<br>आधा-आधा छोटा चम्मच हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और गरम मसाला<br>नमक स्वादानुसार<br>मक्खन या बटर<br>हरी चटनी या टोमैटो केचप<br>बनाने की विधि</p>



<h3 class="wp-block-heading">पहला चरण-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एक पैन में थोड़ा सा बटर या तेल गर्म करें। इसमें हरी मिर्च और प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद टमाटर डालें और नरम होने तक पकाएं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दूसरा चरण-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अब हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और नमक डालकर मसालों को कुछ सेकंड तक भून लें। फिर इसमें मैश किया हुआ पनीर डालें और अच्छी तरह मिलाते हुए करीब दो मिनट तक पकाएं। आखिर में हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तीसरा चरण-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">ब्रेड की दो स्लाइस लें। चाहें तो एक स्लाइस पर हरी चटनी और दूसरी पर टोमैटो केचप लगाएं। अब तैयार पनीर भुर्जी को ब्रेड पर समान रूप से फैलाएं और दूसरी स्लाइस से ढक दें।</p>



<h3 class="wp-block-heading">चौथा चरण-</h3>



<p class="wp-block-paragraph">तवा या सैंडविच मेकर गर्म करें और उस पर थोड़ा बटर लगाएं। सैंडविच को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेकें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब आपका स्वादिष्ट, क्रिस्पी और प्रोटीन से भरपूर पनीर भुर्जी सैंडविच तैयार है। इसे बीच से काटकर गरमा-गरम चाय, कॉफी या अपनी पसंद की किसी भी डिप के साथ परोस सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/trump-death-threat-at-khamenei-funeral-in-iran/">ईरान में ट्रंप को लेकर भड़की भीड़, अंतिम संस्कार में खुलेआम दी गई जान से मारने की धमकी</a></p>



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		<title>महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी एनर्जी ड्रिंक पर बैन की मांग तेज, जानिए पूरा मामला</title>
		<link>https://hindikhabar.com/after-maharashtra-karnataka-too-is-demanding-a-ban-on-energy-drinks-know-the-full-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ajay Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 05:43:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Beverage Rules]]></category>
		<category><![CDATA[Energy Drink Ban]]></category>
		<category><![CDATA[Food Safety]]></category>
		<category><![CDATA[Health Concerns]]></category>
		<category><![CDATA[HindiKhabar]]></category>
		<category><![CDATA[India News]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka News]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra News]]></category>
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					<description><![CDATA[Energy Drink Ban : स्कूलों और कॉलेजों के पास हाई कैफीन वाले एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री को लेकर बहस तेज हो गई है. महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक में भी ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने की मांग सामने आई है. कर्नाटक राज्य बाल अधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष शशीधर कोसम्बे ने राज्य सरकार से अपील &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Energy Drink Ban :</strong> स्कूलों और कॉलेजों के पास हाई कैफीन वाले एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री को लेकर बहस तेज हो गई है. महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक में भी ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने की मांग सामने आई है. कर्नाटक राज्य बाल अधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष शशीधर कोसम्बे ने राज्य सरकार से अपील की है कि शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में इन पेयों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए.</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोसम्बे ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को लिखे पत्र में महाराष्ट्र सरकार के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कर्नाटक में भी इसी तरह का नियम लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि इन ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन और अन्य रासायनिक तत्व बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">FSSAI ने कई बड़े ब्रांड्स को भेजा नोटिस</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसी बीच एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर विवाद बढ़ने के बाद FSSAI ने कई बड़े ब्रांड्स को नोटिस जारी किया है. इनमें रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, स्टिंग, एड्रेनालिने रश, कैंपा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट और हैल एनर्जी ड्रिंक जैसे नाम शामिल हैं. प्राधिकरण का कहना है कि भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम की कोई अलग श्रेणी या मानक तय नहीं है, इसलिए इस तरह की ब्रांडिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावे नियमों के अनुरूप नहीं हैं.</p>



<h3 class="wp-block-heading">नियमों के तहत ऐसे दावे स्वीकार्य नहीं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि उत्पादों पर ऊर्जा बढ़ाने, ध्यान केंद्रित करने या तुरंत सक्रिय करने जैसे दावे भ्रामक हो सकते हैं और कानून के तहत स्वीकार्य नहीं हैं. अगर कंपनियां नियमों में बदलाव नहीं करतीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं महाराष्ट्र सरकार पहले ही स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में ऐसे हाई एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला कर चुकी है. राज्य सरकार का मानना है कि युवाओं में बढ़ते कैफीन सेवन को नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित खतरों को कम किया जा सके.</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें –&nbsp;</strong><a href="http://xn--%20%20isi%20%20%20%20%20%20%204%20%20,%20%20%20%20%20-p99g5a7t05ajadmn7iz3avfgs7dfr3lm9k8dtdyeya8a9fvafjtcx1ga4b3a0vqc7rljiflt1adv5b0b7c1aeh45dlahsg3ag0kuuza1c/">दिल्ली में ISI के निर्देश पर काम करने वाले 4 आतंकी गिरफ्तार, बड़े हमले की थी तैयारी</a></p>



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