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	<title>स्वास्थ्य News, स्वास्थ्य की खबरें, Health Tips, Health Updates - Hindi Khabar</title>
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		<title>बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन, जांच के बाद CMO ने किया खंडन</title>
		<link>https://hindikhabar.com/flood-victims-expired-syrup-allegation-factless-cmo-denies/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 09:18:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[Kanpur Flood Relief Camp : बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोपों को कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने तथ्यहीन बताया है। जांच के बाद सीएमओ ने स्पष्ट किया कि 02 सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैम्प में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप का वितरण नहीं किया गया था। उन्होंने &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Kanpur Flood Relief Camp :</strong> बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोपों को कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने तथ्यहीन बताया है। जांच के बाद सीएमओ ने स्पष्ट किया कि 02 सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैम्प में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप का वितरण नहीं किया गया था। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन करते हुए विभागीय रिकॉर्ड और दवा के स्टॉक की स्थिति को आरोपों के विपरीत बताया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य केंद्रों को मार्च 2025 तक वितरित हो चुका था सीरप</h3>



<p class="wp-block-paragraph">रिकॉर्ड के मुताबिक उक्त सीरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस कानपुर नगर में प्राप्त हुआ था। इसके बाद मार्च 2025 तक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीरप वितरित किया जा चुका था। वर्तमान में किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा उपलब्ध नहीं है। जांच के दौरान बाढ़ राहत के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा गया। रजिस्टर में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप की एक भी प्रविष्टि नहीं मिली। ऐसे में 02 सितंबर को बाढ़ कैंप में उक्त सीरप बांटे जाने की बात विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीएमओ ने खबर का किया खंडन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने जांच के आधार पर कहा कि बाढ़ कैंप में उक्त सीरप का वितरण नहीं हुआ था और एक्सपायर्ड दवा बांटे जाने के आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन किया है। विभागीय रिकॉर्ड में दवा के वर्ष 2025 में प्राप्त होने और मार्च 2025 तक स्वास्थ्य केंद्रों को वितरित किए जाने का उल्लेख है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="https://hindikhabar.com/rani-mukerji-raj-kapoor-special-contribution-award-emotional/" data-type="post" data-id="213006426243">रानी मुखर्जी को राज कपूर विशेष योगदान पुरस्कार, सम्मान पाकर हुईं भावुक</a></p>



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		<title>पी.डी.एस. लाभार्थियों से सीधा संपर्क, कमांड सेंटर पर मंथन; पोषण सुरक्षा पर भी जोर</title>
		<link>https://hindikhabar.com/pds-beneficiaries-command-center-nutrition-security-punjab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 09:46:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[यूटिलिटी न्यूज]]></category>
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		<category><![CDATA[Punjab State Food Commission]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab PDS Beneficiaries : सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के महत्व पर जोर देने और इसे और अधिक सुचारू बनाने के उद्देश्य से सोमवार को यहां सेक्टर 26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एम.जी.एस.आई.पी.ए.) में एक सेमिनार आयोजित किया गया। पी.डी.एस. सुधार और पारदर्शिता पर चर्चा पी.डी.एस. सुधार, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी और पोर्टेबिलिटी पर केंद्रित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab PDS Beneficiaries : </strong>सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) के महत्व पर जोर देने और इसे और अधिक सुचारू बनाने के उद्देश्य से सोमवार को यहां सेक्टर 26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एम.जी.एस.आई.पी.ए.) में एक सेमिनार आयोजित किया गया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पी.डी.एस. सुधार और पारदर्शिता पर चर्चा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पी.डी.एस. सुधार, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी और पोर्टेबिलिटी पर केंद्रित इस सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने लाभार्थियों के लाभ के लिए पी.डी.एस. को और मजबूत बनाने हेतु अपने बहुमूल्य विचार साझा किए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">जमीनी फीडबैक को बताया बेहद महत्वपूर्ण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">चर्चा का नेतृत्व करते हुए पंजाब राज्य खाद्य आयोग (पी.एस.एफ.सी.) के चेयरमैन श्री बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि पी.डी.एस. संबंधी जमीनी स्तर पर फीडबैक लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस प्रणाली की व्यापक समीक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने भविष्य के सुधारों के लिए फीडबैक पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात भी कही। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की फील्ड टीम की प्रशंसा करते हुए चेयरमैन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अहम हिस्सा बताया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एन.एफ.एस.ए., ए.ए.वाई. और पी.एच.एच. योजनाओं की जानकारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अपने विचार साझा करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. अंजुमन भास्कर ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एन.एफ.एस.ए.), 2013 की जानकारी दी। अतिरिक्त निदेशक ने अंत्योदय अन्न योजना (ए.ए.वाई.) और प्राथमिकता वाले परिवार (पी.एच.एच.) योजनाओं के बारे में भी बताया, जिसमें प्राथमिकता वाले परिवार योजना के तहत लाभार्थियों को 5 किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह गेहूं मिलता है, जबकि अंत्योदय अन्न योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 35 किलो गेहूं प्रति माह मिलता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">1.36 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहा राशन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अधिक जानकारी देते हुए डॉ. अंजुमन भास्कर ने बताया कि एन.एफ.एस.ए. के तहत लाभार्थियों को राशन का वितरण 2023 से त्रैमासिक आधार पर किया जा रहा है। एन.एफ.एस.ए. के तहत 39,74,000 राशन कार्ड कवर किए गए हैं और लाभार्थियों की संख्या 1.36 करोड़ है। राशन कार्डों की 100 फीसदी आधार सीडिंग हो चुकी है। राज्य में 14,450 उचित मूल्य की दुकानें (एफ.पी.एस.) हैं जो लाभार्थियों को अनाज वितरित करती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पी.डी.एस. में डिजिटल और तकनीकी सुधार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विभाग द्वारा किए गए डिजिटल और तकनीकी सुधारों के बारे में अतिरिक्त निदेशक ने बताया कि राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, इसके अलावा आधार-सक्षम पी.डी.एस. पद्धति और फीस्ट (FEAST) नाम का एक पोर्टल है जो मंडियों से गोदामों और आगे उचित मूल्य की दुकानों तक अनाज की आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करता है। गेहूं के वितरण के लिए ई-पोस मशीनों के माध्यम से 100 फीसदी बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाता है। अब नए राशन कार्डों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">1.35 करोड़ लाभार्थियों की ई-केवाईसी पूरी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जहां तक ई-केवाईसी का संबंध है, जून 2024 से जून 2026 तक 1.35 करोड़ लाभार्थियों संबंधी यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मेरी रसोई योजना के तहत 36.72 लाख किट वितरित</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मेरी रसोई योजना के संबंध में, मई 2026 माह में लगभग 36.72 लाख किट वितरित की गई हैं। जुलाई से सितंबर 2026 तक दूसरी तिमाही के लिए वितरण 8 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक किट में मासिक उपभोग के लिए दो किलो दाल, दो किलो चीनी, एक किलो नमक, 200 ग्राम हल्दी पाउडर और एक लीटर सरसों का तेल शामिल है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पी.एस.एफ.सी. सदस्यों ने साझा किए फील्ड अनुभव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पी.एस.एफ.सी. सदस्य चेतन प्रकाश धालीवाल और विजय दत्त ने अपने फील्ड दौरों के अनुभव साझा किए। इस मौके पर पी.एस.एफ.सी. सदस्य जसवीर सिंह सेखों ने पी.डी.एस. के आम लोगों पर पड़ने वाले सामाजिक प्रभाव की विवेचना की।</p>



<h3 class="wp-block-heading">केंद्रीकृत कंट्रोल एंड कमांड सेंटर बनाने का सुझाव</h3>



<p class="wp-block-paragraph">श्री विजय दत्त द्वारा पी.डी.एस. लाभार्थियों से सीधा संपर्क करके उनकी फीडबैक लेने के लिए एम.जी.एस.आई.पी.ए. (मैग्सीपा) कार्यालय में आयोग का केंद्रीकृत कंट्रोल एंड कमांड सेंटर बनाने के सुझाव के जवाब में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रमुख सचिव श्री राहुल तिवारी ने पूरी सहमति व्यक्त की और लाभार्थियों तक पहुंच बनाने के लिए एस.एम.एस. सुविधा वाली आई.वी.आर. प्रणाली लगाने पर भी जोर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पी.एस.एफ.सी. की सेवा की सराहना</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक श्री वरिंदर कुमार शर्मा ने पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में पी.एस.एफ.सी. द्वारा निभाई जा रही सराहनीय सेवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि पी.एस.एफ.सी. के गठन का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र फीडबैक लेना था।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अच्छा कार्य करने वाले डिपो धारकों को प्रशंसा पत्र</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर आई.डी.सी. चंडीगढ़ से जे.एस. बेदी और अमृतसर से डॉ. सतीश वर्मा ने पी.डी.एस. में डिजिटलीकरण पहलों की प्रशंसा की और जमीनी स्तर की गतिविधियों की निगरानी के अलावा पी.डी.एस. के तहत निर्बाध वितरण प्रक्रिया के लिए बहु-विभागीय समन्वय की वकालत की। इस अवसर पर अच्छा कार्य करने वाले डिपो धारकों को प्रशंसा पत्र भी दिए गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सरकारी योजनाओं में पोषण को बढ़ावा देने पर चर्चा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;सरकारी योजनाओं में पोषण को बढ़ावा देना&#8217; विषय पर दूसरे सत्र में पी.एस.एफ.सी. के चेयरमैन ने कहा कि 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण का पहलू और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अपने हालिया विदेश दौरे के अनुभव साझा करते हुए चेयरमैन ने बताया कि उन्होंने मॉन्ट्रियल की मैकगिल यूनिवर्सिटी का दौरा करके वहां के विशेषज्ञों से बातचीत की। उन्होंने बायो-फोर्टिफिकेशन के पक्ष में तर्क दिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बच्चों के लिए सही समय पर पौष्टिक भोजन पर जोर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकारी फूड लैब की निदेशक रवनीत कौर ने बच्चों के लिए सही तरीके और सही समय पर पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। गुणवत्ता पक्ष की वकालत करते हुए पी.बी.टी.आई. से डॉ. अजीत कौर दुआ ने भोजन में विविधता लाने के अलावा प्रचुर मात्रा में प्रोटीन शामिल करने के महत्व पर जोर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सुरक्षित और स्वच्छ परिस्थितियों में भोजन तैयार करने पर जोर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पी.ए.यू. लुधियाना से डॉ. किरन बैंस ने कहा कि भोजन तैयार करते समय सुरक्षित और स्वच्छ परिस्थितियों को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, इसके अलावा पौष्टिक भोजनों के बारे में जागरूकता फैलाना भी जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="https://hindikhabar.com/punjab-government-structural-safety-audit-harbhajan-singh-eto/" data-type="post" data-id="213006426076">जन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, सभी सरकारी ढांचों की सुरक्षा जांच के आदेश — हरभजन सिंह ई.टी.ओ.</a></p>



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		<title>एवोकाडो को क्यों कहते हैं सुपरफूड? रोज खाने से मिलते हैं ये बड़े फायदे</title>
		<link>https://hindikhabar.com/avocado-superfood-benefits-daily-consumption-health-benefits/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 13:35:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Antioxidant Foods]]></category>
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					<description><![CDATA[Avocado Benefits : आज के समय में फिटनेस को लेकर जागरूक लोग अपनी डाइट में एवोकाडो को खास जगह दे रहे हैं। अपने स्वाद, क्रीमी टेक्सचर और पोषक तत्वों की वजह से यह फल नाश्ते, सलाद और कई हेल्दी रेसिपी में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे अक्सर ‘न्यूट्रिशन का पावरहाउस’ और ‘सुपरफूड’ कहा जाता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Avocado Benefits :</strong> आज के समय में फिटनेस को लेकर जागरूक लोग अपनी डाइट में एवोकाडो को खास जगह दे रहे हैं। अपने स्वाद, क्रीमी टेक्सचर और पोषक तत्वों की वजह से यह फल नाश्ते, सलाद और कई हेल्दी रेसिपी में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे अक्सर ‘न्यूट्रिशन का पावरहाउस’ और ‘सुपरफूड’ कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पोषक तत्वों से भरपूर है एवोकाडो</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, एवोकाडो सामान्य फलों से काफी अलग होता है। जहां ज्यादातर फलों में कार्बोहाइड्रेट और प्राकृतिक शुगर अधिक होती है, वहीं इसमें हेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फल में विटामिन K, विटामिन E, विटामिन C, फोलेट, फाइबर और पोटेशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की बेहतर कार्यप्रणाली में मदद करते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दिल की सेहत के लिए फायदेमंद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एवोकाडो में ओलिक एसिड नामक मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस वजह से एवोकाडो को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। संतुलित डाइट के साथ इसका सेवन दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">वजन कंट्रोल करने में मददगार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कई लोगों को लगता है कि फैट की वजह से एवोकाडो वजन बढ़ा सकता है, लेकिन इसमें मौजूद फाइबर इसे वजन प्रबंधन के लिए उपयोगी बनाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एवोकाडो खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है और ओवरईटिंग से बचने में मदद मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आंखों की सेहत के लिए भी बेहतर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एवोकाडो में ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये आंखों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।</p>



<blockquote class="instagram-media" data-instgrm-captioned data-instgrm-permalink="https://www.instagram.com/reel/Dc06qMBpZ_Q/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" data-instgrm-version="14" style="background:#FFF;border:0;border-radius:3px;margin: 1px;max-width:540px;min-width:326px;padding:0;width:99.375%;width:-webkit-calc(100% - 2px);width:calc(100% - 2px)"><div style="padding:16px"> <a href="https://www.instagram.com/reel/Dc06qMBpZ_Q/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style="background:#FFFFFF;line-height:0;padding:0 0;text-align:center;text-decoration:none;width:100%" target="_blank"> <div style="display: flex;flex-direction: row;align-items: center"> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 50%;flex-grow: 0;height: 40px;margin-right: 14px;width: 40px"></div> <div style="display: flex;flex-direction: column;flex-grow: 1;justify-content: center"> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 4px;flex-grow: 0;height: 14px;margin-bottom: 6px;width: 100px"></div> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 4px;flex-grow: 0;height: 14px;width: 60px"></div></div></div><div style="padding: 19% 0"></div> <div style="display:block;height:50px;margin:0 auto 12px;width:50px"></div><div style="padding-top: 8px"> <div style="color:#3897f0;font-family:Arial,sans-serif;font-size:14px;font-style:normal;font-weight:550;line-height:18px">View this post on Instagram</div></div><div style="padding: 12.5% 0"></div> <div style="display: flex;flex-direction: row;margin-bottom: 14px;align-items: center"><div> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 50%;height: 12.5px;width: 12.5px"></div> <div style="background-color: #F4F4F4;height: 12.5px;width: 12.5px;flex-grow: 0;margin-right: 14px;margin-left: 2px"></div> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 50%;height: 12.5px;width: 12.5px"></div></div><div style="margin-left: 8px"> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 50%;flex-grow: 0;height: 20px;width: 20px"></div> <div style="width: 0;height: 0;border-top: 2px solid transparent;border-left: 6px solid #f4f4f4;border-bottom: 2px solid transparent"></div></div><div style="margin-left: auto"> <div style="width: 0px;border-top: 8px solid #F4F4F4;border-right: 8px solid transparent"></div> <div style="background-color: #F4F4F4;flex-grow: 0;height: 12px;width: 16px"></div> <div style="width: 0;height: 0;border-top: 8px solid #F4F4F4;border-left: 8px solid transparent"></div></div></div> <div style="display: flex;flex-direction: column;flex-grow: 1;justify-content: center;margin-bottom: 24px"> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 4px;flex-grow: 0;height: 14px;margin-bottom: 6px;width: 224px"></div> <div style="background-color: #F4F4F4;border-radius: 4px;flex-grow: 0;height: 14px;width: 144px"></div></div></a><p style="color:#c9c8cd;font-family:Arial,sans-serif;font-size:14px;line-height:17px;margin-bottom:0;margin-top:8px;overflow:hidden;padding:8px 0 7px;text-align:center;white-space:nowrap"><a href="https://www.instagram.com/reel/Dc06qMBpZ_Q/?utm_source=ig_embed&amp;utm_campaign=loading" style="color:#c9c8cd;font-family:Arial,sans-serif;font-size:14px;font-style:normal;font-weight:normal;line-height:17px;text-decoration:none" target="_blank">A post shared by Dr. Shubham Vatsya (@dr.shubhamvatsya)</a></p></div></blockquote>





<h3 class="wp-block-heading">डाइट में शामिल करने से पहले रखें ध्यान</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि एवोकाडो पोषक तत्वों से भरपूर फल है, लेकिन किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर होता है। सही डाइट और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/kuwait-tamil-woman-video-viral-50-days-no-food-domestic-worker-issue/">कुवैत में फंसी तमिल महिला ने वीडियो जारी कर मांगी मदद, प्रताड़ना के लगाए आरोप</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>पीरियड्स का दर्द क्यों बढ़ रहा है? डाइट में ये बदलाव दे सकते हैं राहत</title>
		<link>https://hindikhabar.com/period-pain-causes-diet-changes-relief-women-health-tips/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 10:34:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Health News]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[menstrual pain]]></category>
		<category><![CDATA[period pain relief]]></category>
		<category><![CDATA[periods diet]]></category>
		<category><![CDATA[women health tips]]></category>
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					<description><![CDATA[Women Health : आज के समय में कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, कमजोरी, थकान और मूड में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में खानपान की अहम भूमिका होती है। शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Women Health :</strong> आज के समय में कई महिलाएं पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, कमजोरी, थकान और मूड में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने में खानपान की अहम भूमिका होती है। शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी दर्द और असहजता को बढ़ा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आयरन की कमी बढ़ा सकती है परेशानी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. वैशाली शर्मा के अनुसार, पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग से शरीर में आयरन का स्तर कम हो सकता है। आयरन की कमी के कारण थकान, कमजोरी, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मूड पर असर पड़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि डाइट में पालक, दालें, राजमा और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। नॉन-वेजिटेरियन महिलाएं सीमित मात्रा में रेड मीट भी ले सकती हैं। इसके अलावा आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन सी जरूरी है, इसलिए नींबू, टमाटर और संतरे जैसे खाद्य पदार्थ फायदेमंद हो सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मैग्नीशियम से मिल सकती है दर्द में राहत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के मुताबिक मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने और नर्वस सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करता है। इसकी कमी से पीरियड्स के दौरान दर्द अधिक महसूस हो सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मैग्नीशियम की पूर्ति के लिए कद्दू के बीज, बादाम, केला और ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को डाइट में शामिल किया जा सकता है। कुछ महिलाओं में इससे दर्द की तीव्रता कम होने में मदद मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ओमेगा-3 भी है फायदेमंद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पीरियड्स के दर्द का एक कारण प्रोस्टाग्लैंडिन नामक तत्वों का बढ़ना भी माना जाता है, जो गर्भाशय में संकुचन को बढ़ा सकते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड इन तत्वों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। डॉक्टर के अनुसार अखरोट, अलसी के बीज और सैल्मन जैसी चीजें ओमेगा-3 के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें नियमित आहार का हिस्सा बनाने से पीरियड्स के दौरान दर्द और असहजता में राहत मिल सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दर्द को केवल दवाओं पर निर्भर रहकर नहीं, बल्कि सही खानपान, पर्याप्त पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए भी नियंत्रित किया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/us-iran-war-america-attack-iran-5-killed-68-injured-retaliation/">अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, 5 की मौत, 68 लोग घायल, ईरान का जवाबी पलटवार</a></p>



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		<item>
		<title>मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सेप्सिस-सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचार, ₹51.58 करोड़ की वित्तीय सहायता</title>
		<link>https://hindikhabar.com/mukhya-mantri-sehat-yojana-sepsis-septic-shock-12467-treatments-rs-51-58-crore-financial-assistance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 07:27:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Mukhya Mantri Sehat Yojana]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Chief Minister Health Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health Scheme]]></category>
		<category><![CDATA[sepsis]]></category>
		<category><![CDATA[sepsis treatment]]></category>
		<category><![CDATA[septic shock]]></category>
		<category><![CDATA[septic shock treatment]]></category>
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					<description><![CDATA[Punjab Health Scheme : पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 01 सितंबर तक सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचार दर्ज किए गए हैं, जिन पर ₹51.58 करोड़ की राशि ख़र्च हुई है। यह आंकड़ा इस स्थिति से जुड़े चिकित्सा और वित्तीय बोझ, दोनों को दर्शाता है। गंभीर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab Health Scheme : </strong>पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 01 सितंबर तक सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचार दर्ज किए गए हैं, जिन पर ₹51.58 करोड़ की राशि ख़र्च हुई है। यह आंकड़ा इस स्थिति से जुड़े चिकित्सा और वित्तीय बोझ, दोनों को दर्शाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">गंभीर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक पर करोड़ों खर्च</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इनमें से, सीवियर सेप्सिस के 10,961 उपचारों पर ₹44.33 करोड़, जबकि सेप्टिक शॉक के 1,506 उपचारों पर ₹7.25 करोड़ ख़र्च हुए। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन(CDC) के अनुसार, सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया है, जो तेज़ी से ऊतकों (टिश्यूज) को नुकसान, अंगों के काम करना बंद करने और मृत्यु का कारण बन सकती है। लगभग किसी भी प्रकार का संक्रमण सेप्सिस को ट्रिगर कर सकता है। फेफड़ों, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के संक्रमण इसके सामान्य स्रोतों में शामिल हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सेप्सिस से अंगों के कामकाज में आ सकती है गड़बड़ी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सेप्सिस केवल एक संक्रमण नहीं है। जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अनियंत्रित हो जाती है, तो अंगों के कामकाज में गड़बड़ी शुरू हो सकती है। गंभीर मामलों में रक्तचाप कम होने और रक्त प्रवाह पर्याप्त न रहने की स्थिति सेप्टिक शॉक में बदल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्वास्थ्य मंत्री ने समय पर पहचान को बताया जरूरी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने समय पर पहचान के महत्त्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “सेप्सिस धीरे-धीरे अधिक गंभीर रूप ले सकता है। जब इसके कारण रक्त संचार संबंधी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं और महत्त्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुँचता, तो मरीज़ सेप्टिक शॉक की स्थिति में पहुँच सकता है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">सेप्टिक शॉक में गहन चिकित्सा की जरूरत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सेप्टिक शॉक से पीड़ित मरीज़ों को गहन चिकित्सा देखभाल, इंट्रावेनस फ्लूइड्स, एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप को बनाए रखने वाली दवाएँ , ऑक्सीजन या मैकेनिकल वेंटिलेशन और कुछ मामलों में काम करना बंद कर रहे अंगों के लिए सहायक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे उपचार का ख़र्च तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मुख्यमंत्री सेहत योजना में ₹10 लाख तक का कैशलेस कवर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री सेहत योजना पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है, जिससे गंभीर उपचार के दौरान वित्तीय बाधा को कम करने में मदद मिलती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सेप्सिस के आंकड़े बताते हैं वित्तीय सुरक्षा का महत्व</h3>



<p class="wp-block-paragraph">योजना के तहत सेप्सिस के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जब उपचार की ज़रूरत तेज़ी से बढ़ती है, तब ऐसी वित्तीय सुरक्षा परिवारों के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नवजात शिशुओं में सेप्सिस का खतरा अधिक गंभीर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">यह ख़तरा नवजात शिशुओं में विशेष रूप से गंभीर होता है। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर ने कहा कि नवजात शिशु के व्यवहार में होने वाले मामूली बदलावों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “नवजात शिशुओं में व्यवहार में छोटा-सा बदलाव भी एक महत्त्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है।” उन्होंने बताया कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की स्थिति कुछ ही घंटों में तेज़ी से बिगड़ सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नवजात में ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच जरूरी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दूध पीने/पोषण लेने में कमी, असामान्य रूप से अधिक नींद आना, शरीर का ठंडा महसूस होना और साँस लेने में बदलाव नवजात शिशु में गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय जाँच आवश्यक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल से बढ़ सकता है खतरा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जब बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका हो या इसकी पुष्टि हो जाए, तब एंटीबायोटिक्स आवश्यक होते हैं, लेकिन इनका अनुचित इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को बढ़ावा दे सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना, बची हुई एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना या उपचार बीच में रोक देना संक्रमण का इलाज मुश्किल बना सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">CDC ने बताए सेप्सिस के चेतावनी संकेत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, भ्रम की स्थिति, साँस लेने में कठिनाई, अत्यधिक दर्द या बेचैनी, बुख़ार या शरीर का असामान्य रूप से कम तापमान, चिपचिपी त्वचा और तेज़ हृदय गति ऐसे चेतावनी संकेतों में शामिल हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">समय पर इलाज और वित्तीय सुरक्षा दोनों जरूरी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसलिए सेप्सिस से निपटने के लिए दो मोर्चों पर तेज़ी से कार्रवाई ज़रूरी है—समय पर चिकित्सकीय पहचान और उपचार तथा अत्यधिक स्वास्थ्य ख़र्च से वित्तीय सुरक्षा। मुख्यमंत्री सेहत योजना के आंकड़े इस स्थिति के वित्तीय बोझ के पैमाने को दर्शाते हैं, जबकि चिकित्सकीय संदेश स्पष्ट है: संक्रमण से पीड़ित मरीज़ की स्थिति अचानक बिगड़ने पर देरी से इलाज की कीमत केवल पैसे के रूप में नहीं, बल्कि उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण—एक जीवन के रूप में चुकानी पड़ सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="https://hindikhabar.com/pm-modi-congratulates-india-on-7-8-percent-gdp-growth-viksit-bharat-dream-slug/" data-type="post" data-id="213006425417">7.8% GDP ग्रोथ पर PM मोदी ने देशवासियों को दी बधाई, बोले- विकसित भारत का सपना होगा पूरा</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली में स्वाइन फ्लू का बढ़ा प्रकोप, एक दिन में सामने आए 48 नए मामले</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-swine-flu-outbreak-48-new-h1n1-cases-in-one-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:38:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[48 new H1N1 cases]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi health department]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Swine Flu]]></category>
		<category><![CDATA[dengue cases Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[H1N1 Cases Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[influenza cases]]></category>
		<category><![CDATA[swine flu outbreak]]></category>
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					<description><![CDATA[Swine Flu Delhi : दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अगस्त को 48 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही इस साल दिल्ली में एच1एन1 के कुल मामले 3,629 हो गए हैं। इनमें 3,054 मामले दिल्ली के और 575 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Swine Flu Delhi : </strong>दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अगस्त को 48 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही इस साल दिल्ली में एच1एन1 के कुल मामले 3,629 हो गए हैं। इनमें 3,054 मामले दिल्ली के और 575 मामले बाहर के हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>फ्लूएंजा के कुल मामले </strong><strong>5 </strong><strong>हजार के पार</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">फ्लूएंजा ए और बी को मिलाकर इस साल अब तक कुल 5,029 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सामान्य खांसी-जुकाम या हल्के बुखार में बिना जरूरत अस्पताल जाने से बचना चाहिए। हालांकि, तेज बुखार, ज्यादा ठंड लगने या सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद लेने की सलाह दी गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>बारिश के बीच बढ़ा मच्छरों का प्रकोप</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली में बारिश के साथ मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अगस्त में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामलों में इस साल अब तक के मुकाबले तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। डेंगू के कुल 311 मामलों में से 90 मामले अगस्त में सामने आए हैं। इसी तरह मलेरिया के 119 मामलों में 53 और चिकनगुनिया के 22 मामलों में आठ अगस्त में दर्ज हुए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अगस्त में डेंगू के मामले दोगुने से ज्यादा बढ़े</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एमसीडी के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में डेंगू के 40 मामले सामने आए थे, जो अगस्त में बढ़कर 90 हो गए। इससे पहले अप्रैल में 52, मई में 35 और जून में 39 मामले दर्ज किए गए थे। अगस्त में हुई इस बढ़ोतरी ने मच्छर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पश्चिमी क्षेत्र में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले</strong><strong></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी क्षेत्र 47 मामलों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मध्य क्षेत्र में 39, उत्तरी शाहदरा में 32, सिविल लाइंस में 28 और दक्षिणी क्षेत्र में 21 मामले दर्ज किए गए हैं। सिटी एसपी में 19, नजफगढ़ में 18, रोहिणी में 17 और नरेला में 16 मामले सामने आए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मलेरिया के आधे से ज्यादा मामले अगस्त में</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मलेरिया ने भी अगस्त में तेजी पकड़ी है। जनवरी से जुलाई तक 66 मामले सामने आए थे, जबकि अकेले अगस्त में 53 नए मामले दर्ज हो चुके हैं। इस साल अब तक सामने आए 119 मामलों में करीब आधे अगस्त महीने के हैं। पश्चिमी क्षेत्र में 22 मामले सबसे ज्यादा हैं, जबकि दक्षिणी क्षेत्र में 17 और मध्य क्षेत्र में 16 मामले मिले हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चिकनगुनिया की रफ्तार भी बढ़ी</strong><strong></strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चिकनगुनिया के मामले संख्या में कम हैं, लेकिन अगस्त में इसमें भी बढ़ोतरी देखी गई। जनवरी में एक, फरवरी में एक, मार्च में तीन, अप्रैल में दो, मई में चार, जून में तीन और जुलाई में तीन मामले सामने आए थे। अगस्त में अब तक आठ मामले दर्ज किए जा चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="https://hindikhabar.com/burning-pyre-human-remains-video-viral-ujjain-chakratirth-cremation-ground-controversy/" data-type="post" data-id="213006425399">जलती चिता से निकालकर खाई मांस, उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान का वीडियो वायरल</a></p>



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			</item>
		<item>
		<title>Women Health : 30 के बाद महिलाओं के शरीर में आते हैं बड़े बदलाव, इन 5 प्रोटीन फूड्स से रखें खुद को फिट</title>
		<link>https://hindikhabar.com/women-health-after-30-protein-foods-to-stay-fit-and-healthy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 11:07:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[healthy diet tips]]></category>
		<category><![CDATA[High Protein Foods For Women]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Muscle Loss Prevention]]></category>
		<category><![CDATA[Protein Rich Indian Foods]]></category>
		<category><![CDATA[Women Health After 30]]></category>
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					<description><![CDATA[Women Health : उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। खासतौर पर 30 साल के बाद मसल्स मास कम होना, हड्डियों का कमजोर होना, हार्मोनल बदलाव और ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। फिटनेस एक्सपर्ट श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, भारतीय खानपान में अक्सर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Women Health : </strong>उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। खासतौर पर 30 साल के बाद मसल्स मास कम होना, हड्डियों का कमजोर होना, हार्मोनल बदलाव और ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिटनेस एक्सपर्ट श्वेतांबरी शेट्टी के अनुसार, भारतीय खानपान में अक्सर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यही वजह है कि शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता और कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">उम्र बढ़ने के साथ क्यों जरूरी है प्रोटीन</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारों के मुताबिक, 30 वर्ष की उम्र के बाद हर दशक में महिलाओं के शरीर में मसल्स मास कम होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। मेनोपॉज के बाद यह बदलाव और तेज हो जाता है, क्योंकि इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने, हड्डियों के घनत्व को सुरक्षित रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पनीर से मिलेगा प्रोटीन और कैल्शियम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। 100 ग्राम पनीर में करीब 18 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है। यह खासतौर पर शाकाहारी लोगों के लिए डाइट में प्रोटीन बढ़ाने का आसान विकल्प है। पनीर मसल्स और हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">टोफू और सोयाबीन भी बेहतर विकल्प</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जो लोग डेयरी उत्पाद नहीं लेते या वीगन डाइट फॉलो करते हैं, उनके लिए टोफू एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सोयाबीन से बने टोफू में प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा सोयाबीन भी शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। नियमित मात्रा में इसका सेवन शरीर की प्रोटीन जरूरत को पूरा करने में मदद कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अंडा और दालें भी हैं फायदेमंद</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अंडा हाई प्रोटीन फूड माना जाता है। एक अंडे में लगभग 6 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके पीले भाग से विटामिन डी समेत कई पोषक तत्व भी मिलते हैं। वहीं दालें, चना, छोले और राजमा जैसे खाद्य पदार्थ भी शरीर को प्लांट प्रोटीन देते हैं। रोजाना एक कटोरी पकी हुई दाल से अच्छी मात्रा में प्रोटीन मिल सकता है, जो मांसपेशियों की मजबूती के लिए जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer:</strong> यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। डाइट या फिटनेस में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। हिंदी ख़बर किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/ankit-balyan-murder-video-25-seconds-firing-two-people-claimed-responsibility/">अंकित बालियान मर्डर का खौफनाक VIDEO आया सामने, 25 सेकेंड तक बरसाई गईं गोलियां, दो लोगों ने ली हत्या की जिम्मेदारी</a></p>



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		<item>
		<title>हर जानकारी का Screenshot लेना छोड़ दें? नई स्टडी ने बढ़ाई चिंता, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/screenshot-taking-habit-memory-loss-study-scientists-research-reveal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 12:55:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Binghamton University Research]]></category>
		<category><![CDATA[Digital Memory Research News]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Phone Usage Memory Loss Study]]></category>
		<category><![CDATA[Screenshot Taking Habit Effect]]></category>
		<category><![CDATA[Smartphone Impact On Brain]]></category>
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					<description><![CDATA[Screenshot Weak Memory : आजकल लोग किसी भी जरूरी जानकारी को बाद में देखने के लिए तुरंत स्क्रीनशॉट ले लेते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट, रिजल्ट, जरूरी मैसेज या किसी जानकारी को सुरक्षित रखने का यह आसान तरीका बन चुका है। लेकिन एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि यह आदत हमारी याद रखने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Screenshot Weak Memory :</strong> आजकल लोग किसी भी जरूरी जानकारी को बाद में देखने के लिए तुरंत स्क्रीनशॉट ले लेते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट, रिजल्ट, जरूरी मैसेज या किसी जानकारी को सुरक्षित रखने का यह आसान तरीका बन चुका है। लेकिन एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि यह आदत हमारी याद रखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आई बात</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका की बिंगहैमटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने स्क्रीनशॉट लेने की आदत और याददाश्त के बीच संबंध को समझने के लिए अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि जो लोग किसी जानकारी का स्क्रीनशॉट लेते हैं, उन्हें बाद में उस जानकारी को याद करने में ज्यादा परेशानी हो सकती है। रिसर्चर्स ने इस प्रभाव को &#8220;फोटो टेकिंग इम्पेयरमेंट इफेक्ट&#8221; नाम दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">स्क्रीनशॉट लेने वालों को कम याद रही जानकारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">अध्ययन के दौरान छात्रों को पेंटिंग, तस्वीरें और स्केच जैसी चीजें दिखाई गईं। कुछ छात्रों से इनकी तस्वीरें लेने यानी स्क्रीनशॉट लेने को कहा गया, जबकि कुछ छात्रों को सिर्फ ध्यान से देखने के लिए कहा गया। बाद में जब छात्रों से इन तस्वीरों से जुड़े सवाल पूछे गए तो जिन लोगों ने केवल ध्यान से देखा था, उनके जवाब ज्यादा सटीक रहे। वहीं स्क्रीनशॉट लेने वाले छात्रों को कई जानकारियां कम याद रहीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्यों कमजोर हो सकती है याददाश्त?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीनशॉट लेने के दौरान व्यक्ति का ध्यान जानकारी को समझने के बजाय उसे सेव करने पर चला जाता है। इससे दिमाग उस जानकारी को गहराई से याद करने की प्रक्रिया कम कर देता है। इसके अलावा दिमाग में &#8220;कॉग्निटिव ऑफलोडिंग&#8221; की स्थिति बन सकती है। यानी जब दिमाग को पता होता है कि जानकारी फोन में सुरक्षित है, तो वह उसे याद रखने की कोशिश कम करता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">याद रखने के लिए लिखने की सलाह</h3>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी जानकारी को लंबे समय तक याद रखने के लिए उसे ध्यान से पढ़ना और समझना जरूरी है। फोन में सेव करने के बजाय कागज पर लिखना या अपने शब्दों में दोहराना याददाश्त को मजबूत करने में मदद कर सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer –</strong> इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है। अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. हिंदी ख़बर किसी तरह का दावा नहीं करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://hindikhabar.com/kanpur-ganga-barrage-training-aircraft-crashes-two-pilots-killed/">Kanpur Aircraft Crash : कानपुर में गंगा बैराज पर ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश, पायलट और ट्रेनर की मौत</a></p>



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		<item>
		<title>41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ, डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील</title>
		<link>https://hindikhabar.com/national-eye-donation-fortnight-dr-balbir-singh-appeals-for-eye-donation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanti Kumari]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 07:31:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Corneal Blindness]]></category>
		<category><![CDATA[Corneal Transplant]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Balbir Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Eye Bank]]></category>
		<category><![CDATA[Eye Donation]]></category>
		<category><![CDATA[Eye Donation Awareness]]></category>
		<category><![CDATA[National Eye Donation Fortnight]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab Health Minister]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://hindikhabar.com/?p=213006424807</guid>

					<description><![CDATA[Punjab News : नेत्र प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया की भारी कमी को दूर करने के लिए नेत्रदान करने के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने और लोगों से मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने का संकल्प लेने की अपील करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Punjab News :</strong> नेत्र प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया की भारी कमी को दूर करने के लिए नेत्रदान करने के महत्व के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने और लोगों से मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने का संकल्प लेने की अपील करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नेत्रदान को बताया नेक कार्य</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से नेत्रदान करने का संकल्प लेने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, &#8220;नेत्रदान करना एक नेक कार्य है क्योंकि यह किसी नेत्रहीन व्यक्ति को दृष्टि का उपहार दे सकता है।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलेगा पखवाड़ा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इस पखवाड़े के दौरान आम लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियाँ चलाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कॉर्नियल अंधेपन और केराटोप्लास्टी की दी जानकारी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉ. बलबीर सिंह, जो स्वयं एक नेत्र सर्जन हैं, ने जानकारी दी कि कॉर्निया के क्षतिग्रस्त होने के कारण अंधापन होता है, जिसे कॉर्नियल अंधापन कहा जाता है। कॉर्निया पुतली के सामने वाली एक पारदर्शी परत होती है। उन्होंने कहा, &#8220;यह कॉर्निया ही है जो दाता की आँखों से लिया जाता है और कॉर्नियल अंधेपन से पीड़ित व्यक्ति पर ट्रांसप्लांट किया जाता है, जिससे वह व्यक्ति दुनिया को देखने में सक्षम हो जाता है,&#8221; उन्होंने आगे बताया कि इस सर्जिकल प्रक्रिया को केराटोप्लास्टी कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">एक नेत्रदान से दो लोगों को मिल सकती है दृष्टि</h3>



<p class="wp-block-paragraph">नेत्रदान के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमारी आँखें बहुत महत्वपूर्ण संवेदी अंग हैं, क्योंकि हमारे सभी संवेदी अनुभवों में से 80% तक हमारी दृष्टि के माध्यम से अनुभव होते हैं। दृष्टि के उपहार के बिना सामान्य जीवन व्यतीत करना बहुत कठिन होता है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉर्नियल अंधापन मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को प्रभावित करता है, जिनका आगे लंबा जीवन होता है और एक व्यक्ति द्वारा नेत्रदान करने से दो कॉर्नियल नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भारत में कॉर्नियल अंधेपन के आंकड़े</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 11 लाख लोग कॉर्नियल अंधेपन से पीड़ित हैं और हर साल 25,000 नए मामले जुड़ रहे हैं। भारत में 1 लाख से अधिक कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है, लेकिन भारत में हर साल केवल 25,000 कॉर्नियल प्रत्यारोपण ही किए जाते हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हम नेत्रदान और कॉर्नियल नेत्रहीनों की संख्या के बीच एक बड़ा अंतर देख सकते हैं। इसलिए हम सभी को अपनी आँखें दान करने का संकल्प लेकर इस अंतर को भरने के लिए आगे आना चाहिए और अपने राज्य और देश को कॉर्नियल अंधेपन से मुक्त बनाना चाहिए।&#8221; उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि हमारे पास प्रत्यारोपण करने के लिए प्रशिक्षित, उच्च योग्य सर्जन और अस्पताल की सुविधाएँ मौजूद हैं, लेकिन सर्जरी करने के लिए हमारे पास पर्याप्त नेत्र ऊतक नहीं हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पंजाब में 13 आई बैंक और 20 कॉर्नियल ट्रांसप्लांट केंद्र</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पंजाब में कुल 13 पंजीकृत आई बैंक और 20 पंजीकृत कॉर्नियल ट्रांसप्लांट केंद्र हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान पंजाब में कुल 1041 केराटोप्लास्टी की गईं, जबकि जुलाई 2026 तक ऐसी 351 सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">राज्यभर में चलेंगी आई.ई.सी. गतिविधियाँ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशक डॉ. हितिंदर कौर ने बताया कि इस पखवाड़े के दौरान राज्य भर में विभिन्न आई.ई.सी. गतिविधियाँ चलाई जाएंगी और इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को पहले ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस जागरूकता अभियान के दौरान नेत्रदान से संबंधित विभिन्न भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर किया जाएगा। विभाग द्वारा लोगों को यह समझाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे कि कौन नेत्रदान कर सकता है, दान की गई आँखों का उपयोग कैसे किया जाता है और मृत्यु के बाद नेत्रदान करने का संकल्प लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">वेबसाइट से लिया जा सकता है नेत्रदान का संकल्प</h3>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय अंधत्व एवं दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीबीवीआई) की राज्य प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. नीति सिंगला ने बताया कि वेबसाइट <a href="https://notto.abdm.gov.in/">https://notto.abdm.gov.in/</a> पर जाकर नेत्रदान करने का संकल्प लिया जा सकता है। संकल्प लेने के बाद इसी वेबसाइट से प्रतिज्ञा प्रमाणपत्र डाउनलोड किया जा सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">बक्सा: नेत्रदान के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, तथ्य और भ्रांतियाँ</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>आई बैंक क्या होता है? &#8211; यह दाता और प्राप्तकर्ता/नेत्र सर्जन के बीच एक कड़ी का काम करता है। यह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एक ऐसी संस्था है जो कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता वाले लोगों के लिए मानव आँखें एकत्रित और प्रदान करती है।</li>



<li>कौन नेत्रदान कर सकता है? &#8211; आयु, लिंग और रक्त समूह की परवाह किए बिना कोई भी नेत्रदान कर सकता है।</li>



<li>क्या ट्रांसप्लांट के लिए पूरी आँख का उपयोग किया जाता है? &#8211; नहीं, केवल पुतली के सामने वाली पतली पारदर्शी परत जिसे कॉर्निया कहा जाता है, ट्रांसप्लांट के लिए उपयोग की जाती है। कॉर्निया बिना किसी रक्त वाहिकाओं वाला एक पारदर्शी ऊतक होता है। साफ कॉर्निया व्यक्ति को अच्छी दृष्टि प्रदान करता है।</li>



<li>कॉर्नियल प्रत्यारोपण से क्या अभिप्राय है? &#8211; यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जहाँ खोई हुई दृष्टि वापस लाने के लिए रोगी के क्षतिग्रस्त कॉर्निया को दाता के स्वस्थ कॉर्निया से बदल दिया जाता है।</li>



<li>मृत्यु के बाद कॉर्निया/आँख को कितनी जल्दी निकाला जाना चाहिए? &#8211; मृत्यु के 6 घंटों के भीतर।</li>



<li>क्या मधुमेह और उच्च रक्तचाप का रोगी नेत्रदान कर सकता है? &#8211; हाँ।</li>



<li>कौन नेत्रदान नहीं कर सकता? &#8211; उन दाताओं से आँखें नहीं ली जाती हैं जो निम्नलिखित बीमारियों से पीड़ित हैं या जिनकी मृत्यु निम्नलिखित कारणों से हुई हो: एड्स (एचआईवी)/हैपेटाइटिस बी या सी, सेप्सिस, ल्यूकेमिया, रेबीज, मेनिनजाइटिस, एन्सेफलाइटिस, टिटनेस और अन्य वायरल बीमारियाँ।</li>



<li>मृतक के रिश्तेदारों को क्या करना चाहिए? &#8211; मृत्यु के तुरंत बाद निकटतम आई बैंक या आई कलेक्शन सेंटर को सूचित करें।</li>



<li>नेत्रदान करना केवल मृत्यु के बाद ही संभव है।</li>



<li>कॉर्निया को 6 घंटों के भीतर निकालना आवश्यक होता है।</li>



<li>यद्यपि किसी व्यक्ति ने अपनी आँखें दान करने का संकल्प लिया हो, फिर भी दान की प्रक्रिया के लिए परिवार की सहमति अनिवार्य होती है।</li>



<li>आँखें निकालने की प्रक्रिया एक सामान्य सर्जिकल प्रक्रिया है जो दाता के चेहरे को विकृत नहीं करती।</li>



<li>नेत्रदान एक निःशुल्क सेवा है, दाता के परिवार से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।</li>



<li>यह सुनिश्चित करें कि आपके परिवार के सदस्य आपकी नेत्रदान करने की इच्छा से भली-भांति परिचित हों।</li>



<li>मृत्यु होने पर परिवार को तुरंत निकटतम आई बैंक से संपर्क करना चाहिए।</li>



<li>आई बैंक की टीम मृतक के स्थान पर जाकर आँखें एकत्रित करेगी।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये भी पढ़ें &#8211; </strong><a href="https://hindikhabar.com/finance-minister-cheema-meets-teachers-education-employees-pensioners-demands-resolution-instructions/" data-type="post" data-id="213006424801">वित्त मंत्री चीमा ने शिक्षकों, शिक्षा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से की बातचीत, मांगों के समाधान के दिए निर्देश</a></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.hindikhabar">Hindi Khabar App:</a>&nbsp;देश,&nbsp;राजनीति,&nbsp;टेक,&nbsp;बॉलीवुड,&nbsp;राष्ट्र,&nbsp;&nbsp;बिज़नेस,&nbsp;ज्योतिष,&nbsp;धर्म-कर्म,&nbsp;खेल,&nbsp;ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए.<a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=com.hindikhabar">&nbsp;हिन्दी ख़बर ऐप</a></strong></p>



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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली-NCR में H1N1 का बढ़ा खतरा, जानें स्वाइन फ्लू के ये खतरनाक लक्षण</title>
		<link>https://hindikhabar.com/delhi-ncr-h1n1-swine-flu-risk-symptoms-health-alert-experts-advice/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Karan Panchal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:54:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi NCR]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Swine Flu Cases]]></category>
		<category><![CDATA[H1N1 Infection India]]></category>
		<category><![CDATA[Health Alert India]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi Khabar]]></category>
		<category><![CDATA[Influenza Virus News]]></category>
		<category><![CDATA[latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Swine Flu Symptoms]]></category>
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					<description><![CDATA[Delhi Swine Flu Cases : देश के कई हिस्सों में H1N1 संक्रमण यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोग इस वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से सावधानी बरतने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>Delhi Swine Flu Cases :</strong> देश के कई हिस्सों में H1N1 संक्रमण यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोग इस वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से सावधानी बरतने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के करीब 2,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मामलों की पुष्टि हुई है। वहीं केरल में अगस्त महीने के दौरान स्वाइन फ्लू से कई मौतें दर्ज की गई हैं। कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में इन्फ्लूएंजा संक्रमण के मामले सामने आए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">H1N1 संक्रमण में दिखते हैं ये लक्षण</h3>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक H1N1 संक्रमण में तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर बुखार 48 घंटे से ज्यादा समय तक बना रहता है या दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह</h3>



<p class="wp-block-paragraph">डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में संक्रमण का असर अलग तरीके से दिखाई दे सकता है। बच्चों में बुखार, सांस लेने में परेशानी, सुस्ती, खाना-पीना कम करना या लगातार कमजोरी जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading">शुरुआती पहचान और समय पर इलाज</h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों ने बचाव के लिए संक्रमित होने पर घर में रहने, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और मास्क पहनने की सलाह दी है। इसके अलावा हाथों की सफाई रखने और आंख, नाक व मुंह को बार-बार छूने से बचने को कहा गया है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए शुरुआती पहचान और समय पर इलाज सबसे अहम है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>Disclaimer:</strong> यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी डाइट, फिटनेस प्रोग्राम या स्वास्थ्य उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। हिंदी ख़बर किसी दावे की पुष्टि नहीं करता है।</p>



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