इन जगहों पर दशहरे के दिन रावण दहन नहीं, पूजन होता है…

भारत में कई जगह है जहां दशहरा के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। इस जगह दशहरा के दिन पूजा-पाठ होती है और मंदिर में जाकर मनोकामना भी मंगाते हैं।

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रावण

बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में विजयदशमी पर रावण दहन की परंपरा करीब करीब पूरे भारत वर्ष में निभाई जाती है लेकिन देश के ही कुछ हिस्सों में इस दिन रावण की पूजा करने का विधान हैं। ऐसा होने के पीछे कई मान्यताएं और तथ्य प्रचलित हैं।

आइए जानें, देश के किन शहरों और गांवों में रावण का पूजन किया जाता है…

कोलार (कर्नाटक) 

कोलार में रावण का एक बड़ा मंदिर भी बनाया गया है। कर्नाटक के अलावा, मालवल्ली में भी रावण का एक मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि कर्नाटक का एक मछुआरा समुदाय रावण की पूजा करता है। आप भी सोच रहे होंगे कि रावण न जलाने की आखिर परंपरा क्या है, तो बता दें, लोगों का मानना है कि आग लगाते ही फसल जलने या ठीक से नहीं होने का डर रहता है, जिस वजह से यहां लोग दशहरा नहीं मनाते।

काकिनाड

काकिनाड आंध्रप्रदेश में स्थित है। यहां रावण का मंदिर है। यहां के लोग रावण को शक्ति सम्राट मानते हैं। इस मंदिर में शिव के साथ रावण की पूजा की जाती है।

मंदसौर, मध्यप्रदेश

कहा जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी का मायका था। मंदसौर रावण का ससुराल था इसलिए यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसे पूजा जाता है।

उज्जैन, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के चिखली गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता। यहां के बारे में कहा जाता है, कि रावण की पूजा नहीं नहीं करने पर गांव जलकर राख हो जाएगा।

बिसरख, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर बना हुआ है और उसका पूजन होता है। ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव, रावण का ननिहल था।

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