CMIE के अनुसार हरियाणा-राजस्थान में रिकॉर्डतोड़ बेरोजगारी, बढ़ते बेरोजगारी के कारण देश का युवा निराश

CMIE (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के आंकड़ों के हवाले से कहा गया की देश में इस वक्त सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर हरियाणा और राजस्थान में पाया गया है।

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देश के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। हालही में हुए एक सर्वे के अनुसार कोरोना और अन्य कारणों कि वजह से अब तक बेरोजगारी की दर काबू में नहीं आ पाई हैं। CMIE (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के आंकड़ों के हवाले से कहा गया की देश में इस वक्त सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर हरियाणा और राजस्थान में पाया गया है। हालांकि देश में आजकल युवाओं को रोजगार से ज्यादा चिंता मंदिर और मस्जिद को लेकर है। ऐसे में गलती भी युवाओं की कहा हैं? शायद जब नौकरी देने कि बात सामने आती है तो सरकार इस तरह के मुद्दों को उठाकर युवाओं को ध्यान कही और केंद्रित कर देती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये भी उठता है की कहा गई केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवर्ष मिलने वाली 2 करोड़ सरकारी नौकरियां?

CMIE  की रिपोर्ट में हरियाणा और राजस्थान सबसे ऊपर

देश की CMIE (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के अनुसार इस वक्त सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर हरियाणा और राजस्थान में दर्ज किया गया है। देश के सभी राज्यों में हुए सर्वे के बाद पाया गया की हरियाणा में सर्वाधिक बेरोजगारी दर 34.5 फीसदी पर पहुंच गया है। तो वहीं दूसरे नंबर पर राजस्थान 28.8 फीसदी कि बेरोजगारी दर तक जा पहुंचा है। ऐसे में युवाओं के सामने सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है की आखिर वो करें भी तो क्या? रिपोर्ट की माने तो पिछले 5 सालों में सरकारी नौकरियां बिल्कुल ही कम आई है। हालांकि CMIE के अनुसार  महंगाई का मुख्य कारण घरेलू मांग का कम होना बताया गया है। मनीकंट्रोल की माने तो इस कारण देश में अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ गई है और इस वजह से रोजगार के अवसर भी घट गए हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात देखने को ये है की सरकार ने अप्रैल में जारी आंकड़ों में दावा किया था कि देश में ट्रेड, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी के सेक्टर में पिछले साल दिसंबर में 4 लाख से ज्यादा रोजगार दिया गया है।

लेकिन CMIE द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के बाद से सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर कहा गुमशुदा हो गई हर साल मिलने वाली लाखों करोड़ों नौकरियां? आखिर कबतक देश का युवा यूं ही बेरोजगार घूमता रहेगा। CMIE द्वारा जारी आंकड़ों से ये कहना गलत नहीं होगा कि कही नौजवानों से किए गए सारे वादे केवल जुमले ही तो साबित हुए है?

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