Google ने ‘द ग्रेट गामा’ का Doodle बनाकर किया याद, जानें कौन थे कुश्ती के महानायक

विश्वभर में भारत की कुश्ती और पहलवानी का बिल्कुल ही अलग पहचान सदियों से बनी हुई है। भारत की मिट्टी में एक से बढ़कर एक पहलवानों ने जन्म लिया है। जिन्होंने भारत का सर शान से ऊंचा कर रखा है। हालांकि भारत की मिट्टी की बात ही बिल्कुल अलग है। भारत की मिट्टी से जन्में केई पहलवानों ने भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन किया था। आज Google ने भारत के मशहूर ‘गामा पहलवान’(द ग्रेट गामा) को उनके 144 वें जन्मदिन के मौके पर Doodle  बनाकर उनको याद किया है। बता दें ‘गामा पहलवान’ ने अपने 52 साल की कुश्ती करियर में एक भी मैच नहीं हारा था। तो आइए जानते है कौन थे ‘द ग्रेट गामा’..

क्यों लोगों के बीच फेमस थे ‘द ग्रेट गामा’

आजादी के पहले से प्रसिद्ध पहलवानों में से एक ‘द ग्रेट गामा’ का असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श दत्त था। पूरी दुनियाभर में अपनी ताकत को उन्होंने लोहा मनवाया था। कुश्ती की दुनिया में उनका नाम उस समय के जुबां पर हुआ करता था। उन्हें रुस्तम-ए-हिंद और द ग्रेट गामा के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से पूरी दुनिया में एक अलग ही छाप छोड़ी थी। हालांकि कहा ये जाता है की पहलवाने के परिवार में उनका जन्म हुआ था और कह सकते है की पहलवानी उनको विरासत में मिली थी। उन्होंने सन् 1910 में Gama World Heavyweight (गामा को वर्ल्ड हेवीवेट) का टाइटल जीता था।

1200 किलोग्राम का उठाया था पत्थर

उनकी मेहनत और नगन का अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि महज 10 वर्ष की उम्र में वो 500 बैठक और 500 पुश-अप लगाया करते थे। इसके साथ ही ये उनके रोज के रुटीन में शामिल था। बता दें उनके एक कारनामे को लोग आज भी याद करते है, जब उन्होंने 1902 में 1200 किलोग्राम के पत्थर को उठा लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वह पत्थर बरोदड़ा के एक म्यूजियम में रखा गया है।

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