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	<title>चैत्र नवरात्रि 2022 Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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	<title>चैत्र नवरात्रि 2022 Articles, Hindi News (हिंदी न्यूज) Articles - Hindi Khabar</title>
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		<title>नवरात्रि छठवां दिन: ऐसे करें माँ कात्यायनी की पूजा, जानें माँ के प्रिय पुष्प</title>
		<link>https://hindikhabar.com/navratri-sixth-day-worship-mother-katyayani-like-this-know-mothers-favorite-flower/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Apr 2022 03:23:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
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		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
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		<category><![CDATA[नवरात्रि का छठा दिन]]></category>
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					<description><![CDATA[Chaitra Navratri 2022: आज चैत्र नवरात्रि का छठवां दिन है। नवरात्रि के छठवें दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन माँ कात्यायनी की विधिवत पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर &#8230;]]></description>
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<p>Chaitra Navratri 2022: आज चैत्र नवरात्रि का छठवां दिन है। नवरात्रि के छठवें दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन माँ कात्यायनी की विधिवत पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती है।</p>



<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिषासुर का वध माँ कात्यायनी ने किया था। असुर महिसासुर का वध करने के कारण माँ को दानवों, पापियों और असुरों का नाश करने वाली देवी कहा गया। आइए जानते हैं माँ कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र और आरती के बारे में-</p>



<h4 class="wp-block-heading">कैसा है माता का स्वरूप</h4>



<p>माँ कात्यायनी का स्वरूप बहुत ही आकर्षक है। माँ की चार भुजाएं हैं। माँ की सवारी शेर है और एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में कमल का पुष्प है। माँ के दूसरे दोनों हाथ वर और अभयमुद्रा में हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading">माँ कात्यायनी का भोग</h4>



<p>नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी को पूजा के बाद भोग अर्पित करना चाहिए। भोग में माँ को शहद अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि माँ को शहद अतिप्रिय है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">माँ के प्रिय पुष्प और रंग</h4>



<p>माँ कात्यायनी को लाल रंग के पुष्प प्रिय हैं। माता को हमेशा लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। लाल गुलाब फूल माँ को अर्पित करें।</p>



<h4 class="wp-block-heading">माँ कात्यायनी की पूजा विधि</h4>



<p>माँ कात्यायनी की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें और माँ की प्रतिमा को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं।<br>अब माँ को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।<br>माँ को पु्ष्प अर्पित करें।<br>माँ को रोली कुमकुम लगाएं।<br>माँ को पांच प्रकार के फल और मिष्ठान का भोग दें।<br>माँ कात्यायनी को शहद का भोग अति प्रिय है। शहद का भोग अवश्य दें।<br>माँ कात्यायनी का ध्यान करें और आरती करें।</p>



<h4 class="wp-block-heading">मां कात्यायनी मंत्र</h4>



<p>या देवी सर्वभूतेषु मा कात्यायनी रूपेण संस्थिता।<br>नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥</p>



<p>पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/dharma/navratri-5-day-maa-skandmata-pujan/">संतान प्राप्ति के लिए करें मां स्कंदमाता का पूजन</a></p>



<p>पढ़ें &#8211; <a href="https://hindikhabar.com/dharma/in-navratri-just-do-this-work-prosperity-will-come-in-the-house/">नवरात्रि में माँ का आशीर्वाद पाने के लिए बस करें यह काम, घर में समृद्धि आएगी</a></p>
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		<title>Chaitra Navratri 2022: मां कूष्मांडा के दर्शन से दूर होगा संकट, इस मंत्र का जाप करने से होगीं प्रसन्न</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chaitra-navratri-2022-the-darshan-of-mother-kushmanda-will-remove-the-crisis-will-be-happy-by-chanting-this-mantra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 06:46:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चैत्र नवरात्रि 2022]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि चौथा दिन]]></category>
		<category><![CDATA[मां कूष्मांडा]]></category>
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					<description><![CDATA[इन दिनों देवी आराधना का पर्व नवरात्र चल रहा है और हर दिन देवी के अलग-अलग रूप की पूजा करने का विधान है काशी में नव दुर्गा के अलग-अलग मंदिर हैं और हर दिन अलग देवी के दर्शन की मान्यता है आज चौथा दिन है और देवी के कूष्मांडा (Devi Kushmanda) स्वरूप जिसे दुर्गा रूप &#8230;]]></description>
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<p>इन दिनों देवी आराधना का पर्व नवरात्र चल रहा है और हर दिन देवी के अलग-अलग रूप की पूजा करने का विधान है काशी में नव दुर्गा के अलग-अलग मंदिर हैं और हर दिन अलग देवी के दर्शन की मान्यता है आज चौथा दिन है और देवी के कूष्मांडा <strong>(Devi Kushmanda) </strong>स्वरूप जिसे दुर्गा रूप में पूजा जाता है। उनके दर्शन का विधान है काशी के दुर्गा कुंड क्षेत्र में स्थित इस मंदिर की महिमा अपरंपार है। सुबह से भक्तो का ताता माँ के दर्शन के लिए लगा हुआ हैं। मान्यता है कि माता स्वयं यहां अदृश्य रूप वास करती हैं। यहां दर्शन करने मात्र से डर भय दूर होता है और माता भक्तों पर अपनी कृपा बनाती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मां कूष्मांडा का पूजन</strong></h3>



<p>इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता की पूजा करें। फिर देवी की प्रतिमा के दोनों तरफ विराजमान देवी- देवताओं की पूजा करें। इनकी पूजन के पश्र्चात देवी कूष्मांडा का पूजन करें। देवी कूष्मांडा <strong>(Devi Kushmanda) </strong>को लाल पुष्प अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनके पूजन में इन्हें अवश्य अर्पित करें और फल मिष्ठान का भोग लगाएं। मां कूष्मांडा के पूजन के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ या कूम्हड़ा अर्पित करें। कपूर से आरती करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मां कूष्मांडा के मंत्र</strong></h3>



<p>मां कुष्मांडा का पूजन करते समय 108 बार इन मंत्रों का जाप करना चाहिऐ। जानिए</p>



<p>या देवी सर्वभू&#x200d;तेषु मां कूष्&#x200d;मांडा रूपेण संस्थिता।</p>



<p>नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।</p>



<p>ध्यान मंत्र:</p>



<p>वन्दे वांछित कामर्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।</p>



<p>सिंहरूढाअष्टभुजा कुष्माण्डायशस्वनीम्॥</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मां कुष्मांडा के इस रूप का दर्शन करने से भक्तों के दूर हो जाते है सकंट</strong></h3>



<p>नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के स्वरूप के दर्शन का विधान है चेहरे पर अद्भुत तेज और सिंह पर सवार मां कुष्मांडा के इस रूप का दर्शन करने मात्र से भक्तों के अंदर व्याप्त डर भय दूर होता है और मां भक्तों को शक्ति का संचार करने का आशीर्वाद देते हैं मां के इस रूप के दर्शन करने के लिए वैसे तो हर बार दूर-दूर से लोगो यहां पर आते है ,माँ की दर्शन के लिये देर रात से भक्त अपनी बारी की इंतजार करते नजर आ रहे आप को बता डे माता रानी को नारियल और गुड़हल की माला बहुत अधिक पसंद है माँ की जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंज उठा! फ़िलहाल नवरात्र के चौथे दिन माता के स्वरूप के दर्शन के साथ आप अपने दिल को उत्तम बनाएं।</p>



<p><strong>Read Also:-</strong>  <a href="https://hindikhabar.com/dharma/pujan-of-maa-kushmanda/">Navratri 2022: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा का पूजन, जानें पूजा विधि और मंत्र</a></p>
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		<title>Chaitra Navratri: झांसी का यह महाकाली मंदिर है कुछ खास, इस रूप में होती है देवी की पूजा</title>
		<link>https://hindikhabar.com/chaitra-navratri-this-mahakali-temple-of-jhansi-is-something-special-the-goddess-is-worshiped-in-this-form/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Apr 2022 05:38:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी ख़बर]]></category>
		<category><![CDATA[chaitra navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri Puja]]></category>
		<category><![CDATA[चैत्र नवरात्रि 2022]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी का महाकाली मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि 2022]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि पूजा]]></category>
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					<description><![CDATA[झांसी का महाकाली मंदिर में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के अवसर पर 2 अप्रैल 2022, शनिवार से कई तरह के कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। भक्त माता के मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस मौके पर देवी के कई मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी हो रहा है। कई जगहों &#8230;]]></description>
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<p>झांसी का महाकाली मंदिर में चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के अवसर पर 2 अप्रैल 2022, शनिवार से कई तरह के कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। भक्त माता के मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। इस मौके पर देवी के कई मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी हो रहा है। कई जगहों पर अखंड ज्योति जलाई जा रही है तो कहीं पर 9 दिनों का मंत्र जाप भी शुरू हो चुका है।</p>



<p>चैत्र नवरात्रि के दौरान बुंदेलखंड के झांसी स्थित लक्ष्मी तालाब स्थित प्रसिद्ध देवी मंदिर महाकाली विद्यापीठ (Mahakali Temple Bundelkhand) में भी विशाल आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के प्रधान पुजारी के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मंदिर में माँ महाकाली के सवा करोड़ मंत्रों का जाप होगा। इसके बाद नवमी तिथि को देवी मंत्रों से अभिमंत्रित चांदी का मंडप अर्पण किया जाएगा।</p>



<h4 class="wp-block-heading">क्या-क्या आयोजन होगा</h4>



<p>चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन यानी 2 अप्रैल को 5100 दीएं जलाए जाएंगे। नवरात्रि के 9 दिनों में विश्व शांति के लिए मां महाकाली के मंत्रों का जाप और अनुष्ठान होगा। इसके साथ ही विशाल भंडारा भी किया जाएगा। इसके साथ-साथ भक्त माता का प्रसाद भी पाएँगे।</p>



<h4 class="wp-block-heading">देवी की कन्या रूप में होती है पूजा</h4>



<p>महाकाली की ज्यादातर प्रतिमाएं आमतौर पर रौद्र रूप में देखने को मिलती हैं। लेकिन झांसी की इस मंदिर में मां कन्या रूप में पूजी जाती हैं। यहां पर किसी भी प्रकार की तामसिक पूजा नहीं की जाती है। जानकारों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण 1687 में ओरछा के महाराज वीर सिंह जूदेव ने करवाया था। 1977 में चुनाव हारने के बाद इंदिरा गांधी ने 1978 में यहां पर एक धार्मिक अनुष्ठान भी करवाया था। इसके बाद 1980 में इंदिरा गांधी दोबारा जीतीं तो फिर से मंदिर में पूजा करने के लिए आई थीं।</p>



<p>यह भी पढ़ें- <a href="https://hindikhabar.com/dharma/chaitra-navratri-2022-people-of-these-5-zodiac-signs-should-worship-maa-durga-in-chaitra-navratri/">Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि में इन 5 राशियों वाले लोग करें माँ दुर्गा की पूजा, कष्ट होंगे दूर</a></p>
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		<title>चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना 2022: जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि</title>
		<link>https://hindikhabar.com/%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%aa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aarti Agravat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Mar 2022 07:52:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[chaitra navratri 2022]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Durga]]></category>
		<category><![CDATA[puja vidhi]]></category>
		<category><![CDATA[चैत्र नवरात्रि 2022]]></category>
		<category><![CDATA[पूजा विधि]]></category>
		<category><![CDATA[मां दुर्गा]]></category>
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					<description><![CDATA[चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना 2022: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि का त्योहार शनिवार, 2 अप्रैल 2022 से शुरू होगा &#8230;]]></description>
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<p>चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना 2022: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि का त्योहार शनिवार, 2 अप्रैल 2022 से शुरू होगा और सोमवार, 11 अप्रैल 2022 को समाप्त होगा।</p>



<p>चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2022- चैत्र प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना की जाती है। माना जाता है कि नवरात्रि में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें तो दुर्गा मां के 9 रूपों की कृपा आपके जीवन में बरसती है। इस बार चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना की संपूर्ण पूजा विधि-</h4>



<p><a href="https://hindikhabar.com/news/dharma/">हिंदु धर्म</a> के अनुसार, नवरात्रि में सुबह पूरे घर की घुलाई की जाती है। इसके बाद स्नान आदि करने के बाद पूजा की तैयारी करनी चाहिए। पूजन में सबसे पहले मिट्टी का एक पात्र लें। उस पात्र में थोड़ी सी मिट्टी डालें और उसमें जौ मिलाएं। जौ में थोड़ा सा पानी मिलाएं।</p>



<p>मिट्टी के बने ढेर के उपर कलश रखें। उस कलश के ऊपर मौली बांध दें। साथ में तिलक लगाएं। उस कलश को जल से भरें। जल में सुपारी, इत्र, दूर्वा घास, चावल और एक सिक्का भी डालें। कलश के किनारों पर 5 आम के पत्तों को लगाएं और ढक्कन से ढक दें। कलश के ढक्कन के ऊपर एक नारियल रखें, जिसको लाल कपड़े या चुन्नी से बांध दें।</p>



<p>इसके बाद देवताओं का आह्वाहन करके पूजन प्रारंभ करें। लोग अपनी घर की सुख-शान्ति के लिए दुर्गा चलीसा का पाठ करते हैं। पाठ समाप्त होने के बाद हवन करते हैं। इस प्रकार पूजा विधि करने से मां नव दुर्गा की कृपा आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहती है।</p>
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