कपड़ा उद्योगों को मिलेगी नई रफ़्तार, पीएलआई स्कीम पर मंत्रालय की मुहर, अब केंद्र की मंजूरी का है इंतजार

नई दिल्ली। टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए कपड़ा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके अन्तर्गत शुक्रवार को मंत्रालय ने पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव्स) योजना पर मुहर लगा दी है। और जल्दी ही आगे के प्रोसेस के लिए केंद्र के पास मंजूरी लेने के लिए भेज दिया जाएगा।

मोदी सरकार ने बंद पड़ी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज़ को फिर से जीवनदान देने के लिए इसी साल जुलाई में 10,680 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की थी। जिसे कपड़ा उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार और निर्यात क्षमता को बल देने पर खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था।

मैन मेड फाइबर और तकनीकि वस्त्रों पर मेन फ़ोकस

पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य मानव निर्मित फाइबर (Man Made Fibre) के अन्तर्गत 40 उत्पाद श्रेणियों और तकनीकी वस्त्रों के अन्तर्गत 10 उत्पाद श्रेणियों के निर्माण का लक्ष्य है। इस योजना के तहत ग्रीनफील्ड (नई कंपनियों की स्थापना) और ब्राउनफील्ड (पहले से परिचालित कंपनियां) में निवेश को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार पीएलआई योजना को फोकस प्रोडक्ट इंसेंटिव स्कीम (एफपीआईएस) के द्वारा मैन मेड फाइबर और टेक्निकल टेक्सटाइल सेक्टर में 5 सालों के लिए तय इंक्रीमेंटल टर्नओवर पर 3 से 15 प्रतिशत तक का बढ़ावा देकर इंटरनेशनल लेवल पर ले जाने का उद्देश्य है।

कपड़ा और परिधान क्षेत्रों को 6,000 करोड़ का पैकेज

भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही कपड़ा और परिधान उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू कर दिये थे। सरकार ने इन क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करने के लिए साल 2016 में विशेष पैकेज के अन्तर्गत 6,000 करोड़ की धनराशि का एलान किया था, जिसके तहत 6,000 करोड़ रुपये दिए गए थे।

गौरतलब है, कि कृषि क्षेत्रों के बाद टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज़ की भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बड़ी भूमिका है। कुछ आंकड़ों के अनुसार टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज़ में प्रत्यक्ष रूप से 4.5 करोड़ और अप्रत्यक्ष रूप से 6 करोड़ लोग जुड़े हैं।

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