Navratri 2021: नौ दिनों की नहीं आठ दिनों की ही होगी इस बार नवरात्रि, पंचमी और षष्ठी पड़ रहे एक ही दिन

हिंदू धर्म का महापर्व शारदीय नवरात्र बृहस्पतिवार यानि शुक्रवार से आरंभ हो रहा है। लेकिन इस बार शक्ति उपासक यह सिर्फ आठ दिन ही रख सकेंगे, क्योंकि पंचमी और षष्ठी की तिथि एक दिन ही होने से नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस बार आठ दिनों का ही होगा।

शुरूआत और समाप्ति दोनों गुरूवार

इस पर्व की समाप्ति भी गुरुवार यानि 14 अक्टूबर को होगी। 15 अक्टूबर दशमी के दिन दशहरा मनाया जाएगा। सरकार की कोविड गाइडलाइन के अनुसार इस बार भी यह पर्व धूम-धाम से मनाया जाएगा। देश के लगभग हर शहर में सभी देवी मंदिर श्रद्धापूर्वक सजाए जा रहे हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों के अनुसार 7 अक्टूबर को प्रतिपदा की तिथि दिन में सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक बहुत शुभ मुहूर्त है। इस दौरान कलश स्थापित करना अत्यंत फलदायी साबित होगा। इसके बाद यह मुहूर्त 3 बजकर 28 मिनट तक बना रहेगा। इस मुहुर्त के अंदर किसी भी समय उपासक कलश की स्थापना कर सकते हैं।

पूजा-विधि

नवरात्रि का पर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोना चाहिए। उसके बाद उस पर कलश स्थापित करना चाहिए। कलश पर माँ-दुर्गा की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करना चाहिए। सारी पूजा सामग्री के साथ एक साफ और शुद्ध आसन पर पूर्व या उत्तर की दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए। इसके बाद शांति मंत्र का पाठ करके मन को शांत करना चाहिए। इसके बाद दीपक जलाएं। सर्वप्रथम गणेश जी की स्तुति, उसके बाद  कलश (वरुण), नवग्रहों आदि का पूजन करने के बाद शांत मन व श्रद्धा भाव से माता की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

शारदीय नवरात्रि के कार्यक्रम

07 अक्टूबर– माँ शैलपुत्री की पूजा व कलश स्थापना

08 अक्टूबर– माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा

09 अक्टूबर– माँ चंद्रघंटा की पूजा

10 अक्टूबर– माँ कुष्मांडा की पूजा

11 अक्टूबर– माँ स्कंदमाता और माँ कात्यायनी की पूजा

12 अक्टूबर- माँ कालरात्रि की पूजा

13 अक्टूबर- माँ महागौरी की पूजा

14 अक्टूबर– माँ सिद्धिदात्री की पूजा

Disclaimer इस लेख को लिखने का उद्देश्य मात्र पाठकों की जानकारी में वृद्धि करना है। इस लेख की सत्यता की पुष्टि हिन्दी ख़बर नहीं करता है।

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