Latest Breaking News: भारत को जगदीप धनखड़ के रूप में मिले नए उपराष्ट्रपति, जानिए उनकी जिंदगी की अनकही बातें

भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में जगदीप धनखड़ अब पदभार संभालेंगे बहुत ही सामान्य परिवार में जन्में इस शख्स का देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचना सच में देश के लिए गौरव की बात है।आपको बता दें कि परिवारिक हालातों और चुनौतियों से लड़कर उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसे देश जानना चाहता है। आज हम बताएंगे उनकी जिंदगी के संघर्षों  से भरी दास्तान और उनकी जीवन की उपलब्धियां।

कैसा रहा उनका प्रारंभिक जीवन

अगर उनकी प्रारंभिक शिक्षा की बात करें तो उन्होंने शुरू की पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल में पूरी की थी। मिली जानकारी के हिसाब से उपराष्ट्रपति पढ़ाई में शुरू से ही बहुत अच्छे थे। आपको बता दें कि 12वीं के बाद धनखड़ का चयन आईआईटी और फिर एनडीए के लिए भी हुआ था, लेकिन फिर भी वो कॉलेज नहीं गए। इसके पीछे उन्होंने दलील दी थी कि वो कोई ऐसी पढ़ाई नहीं करना चाहते जिसमें आगे चलकर नौकरी करनी पड़े। स्नातक के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन सिविल सर्विसेज परीक्षा भी पास कर ली थी। हालांकि आईएएस बनने की बजाय उन्होंने वकालत का काला कोट पहनना ज्यादा बेहतर समझा। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत राजस्थान हाईकोर्ट से की थी। वे राजस्थान बार काउसिंल के चेयरमैन भी रह चुके हैं।

कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर

धनखड़ ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत जनता दल से की थी। धनखड़ 1989 में झुंझनुं से सांसद बने। पहली बार सांसद चुने जाने पर ही उन्हें पार्टी आलाकमान ने बड़ा तोहफा दे दिया था। आपको बता दें कि 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया था। हालांकि, जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो पार्टी से नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था । इसके साथ ही अजमेर के किशनगढ से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर 1993 में चुनाव लड़ा और विधायक बने। 2003 में उनका कांग्रेस से मोहभंग हुआ और वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल भी बनाया गया

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